जितेंद्र आव्हाड ने सीएम को कमजोर करने के लिए खरात के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- जितेंद्र आव्हाड ने राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया।
- अशोक खरात पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप है।
- महाराष्ट्र में अंधविश्वास और राजनीतिक हस्तक्षेप का मामला उठाया गया।
- सुरक्षा और निगरानी की मांग की गई।
- विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्तावों की संख्या बढ़ी है।
मुंबई, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एनसीपी (एसपी) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा में यह आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के कुछ नेता नासिक के स्वयंभू बाबा अशोक खरात का उपयोग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कमजोर करने के लिए कर रहे हैं। आव्हाड ने कहा कि अशोक खरात पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप हैं और उन्हें राजनीतिक लाभ के लिए इस खेल में शामिल किया जा रहा है।
आव्हाड ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री को उनके पद से हटाने के लिए एक गहरी साजिश रची गई थी। उन्होंने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और इसे अंधविश्वास, जादू-टोना तथा राजनीतिक हस्तक्षेप का खतरनाक मिश्रण बताया।
विधायक ने इस पर खेद जताया कि महाराष्ट्र जैसे राज्य में, जहां संत तुकाराम, ज्ञानेश्वर और छत्रपति शिवाजी महाराज का महत्वपूर्ण स्थान है, इस तरह की घटनाएं घटित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि कई मंत्री और विधायक अनुष्ठानों में हिस्सा लेने के लिए खरात के पास जा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, आव्हाड ने यह आरोप भी लगाया कि सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए ईशान्येश्वर देवस्थान क्षेत्र में निर्माण कार्य कराए गए, जहां खरात अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने खरात और ट्रस्ट के अन्य सदस्यों द्वारा वित्तीय और जमीन-जायदाद के सौदों की गहन जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि खरात के पास पिछले 20 वर्षों की कई राजनीतिक घटनाओं की जानकारी है, इसलिए उन्हें सुरक्षा और गहन निगरानी की आवश्यकता है। उन्होंने मांग की कि खरात को 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी में रखा जाए, क्योंकि उनकी जान खतरे में हो सकती है।
आव्हाड ने नासिक जिले में २००७ में एक पत्रकार की हत्या का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन, पुलिस और कुछ राजनीतिक हस्तियां पहले से ही खरात के अपराधों से अवगत थीं, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने इसे इंटेलिजेंस ब्यूरो की विफलता करार दिया।
आव्हाड ने पुलिस पर सवाल उठाते हुए यह भी मांग की कि जांच की जाए कि किन अधिकारियों ने कथित तौर पर मामले को दबाने के लिए पैसे लिए थे।
इस बीच, पार्टी के अन्य विधायक जयंत पाटिल ने विधानसभा के आखिरी दिन 'ध्यानाकर्षण प्रस्तावों' की संख्या बढ़ने पर चुटीले अंदाज में टिप्पणी की। पाटिल ने कहा कि सदन की कार्यवाही अब इन प्रस्तावों तक ही सीमित हो गई है। उन्होंने मजाक में कहा, “मुझे अब यह सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि क्या यह सत्र वास्तव में एक ‘लक्ष्याधिवेशन’ बन गया है।”
उन्होंने कहा कि ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर बहुत समय खर्च हो रहा है, जिससे मुख्य मुद्दों पर चर्चा के लिए समय नहीं बच रहा। उन्होंने कहा कि यह बात बार-बार बताई जा रही है, लेकिन इसका असर दिखाई दे रहा है।
इस पर अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने हल्की चुटकी लेते हुए कहा, “आप अंतिम सप्ताह के प्रस्तावों पर कम और सदन की कार्यप्रणाली पर ज्यादा बोल रहे हैं।” पाटिल ने जवाब दिया, “मैं आज इस सत्र को विदाई दे रहा हूं, इसीलिए बोल रहा हूं।” अध्यक्ष ने मजाक में कहा, “मुझे लगता है आप विदाई नहीं दे रहे हैं। आप तो हमारी क्लास ले रहे हैं।”
अपनी हाजिरजवाबी और व्यंग्यपूर्ण शैली के लिए मशहूर पाटिल ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सदन को सही दिशा दिखाना है और उनके मन में कोई दुर्भावना नहीं है। उन्होंने बताया कि 175 विधायकों ने ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के लिए अपने हस्ताक्षर दिए हैं।
पाटिल ने कहा, “अगर मैं भी कोई कागज लेकर चलूं तो मैं भी हस्ताक्षर इकट्ठा कर सकता हूं। हर कोई चाहता है कि उसका प्रस्ताव पेश हो, लेकिन सदन पर नियंत्रण बनाए रखना अध्यक्ष का काम है। सदन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए और इसे केवल विधायकों के हस्ताक्षरों के आधार पर नहीं चलाया जा सकता।”