10 जुलाई 2026
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सिंधुदुर्ग में ₹150 करोड़ की इलेक्ट्रिक बोट फैक्ट्री, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और एम. ज़ोया मरीन का MOU

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सिंधुदुर्ग में ₹150 करोड़ की इलेक्ट्रिक बोट फैक्ट्री, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और एम. ज़ोया मरीन का MOU

सारांश

सिंधुदुर्ग के तलवणे गाँव में ₹150 करोड़ की इलेक्ट्रिक बोट फैक्ट्री महाराष्ट्र की समुद्री अर्थव्यवस्था को हरित दिशा देने की बड़ी पहल है — मुंबई वॉटर मेट्रो को आधुनिक नौकाएँ और सिंधुदुर्ग को नई औद्योगिक पहचान, दोनों एक साथ।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और एम.
ज़ोया मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच 10 जुलाई को MOU पर हस्ताक्षर।
सावंतवाड़ी तालुका के तलवणे गाँव में 22 एकड़ भूमि पर ₹150 करोड़ की इलेक्ट्रिक बोट निर्माण इकाई स्थापित होगी।
परियोजना का उद्देश्य मुंबई वॉटर मेट्रो के लिए पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक नौकाएँ उपलब्ध कराना।
मंत्री नितेश राणे ने स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने का भरोसा जताया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा — यह पहल राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई गति देगी।

महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में ₹150 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बोट निर्माण इकाई स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया गया है। महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और एम. ज़ोया मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच 10 जुलाई को एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए, जो राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था को हरित और तकनीक-आधारित दिशा देने की योजना का हिस्सा है। यह परियोजना मुंबई वॉटर मेट्रो के लिए आधुनिक इलेक्ट्रिक नौकाओं की आपूर्ति और सिंधुदुर्ग में शिपबिल्डिंग क्षमता के विकास को एकसाथ साधती है।

परियोजना का विवरण

सावंतवाड़ी तालुका के तलवणे गाँव में लगभग 22 एकड़ भूमि पर यह इलेक्ट्रिक बोट फैक्ट्री बनाई जाएगी। यहाँ नवीनतम तकनीक से लैस पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक नौकाओं का निर्माण होगा, जिनका उपयोग सबसे पहले मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना में किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य महाराष्ट्र में समुद्री परिवहन को आधुनिक, सुरक्षित और कार्बन-मुक्त बनाना है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार समुद्री क्षेत्र में बड़े निवेश को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है। उनके अनुसार, मुंबई वॉटर मेट्रो और सिंधुदुर्ग की यह इलेक्ट्रिक बोट इकाई राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगी और परिवहन को अधिक सुरक्षित तथा पर्यावरण के अनुकूल बनाएगी।

राज्य के मत्स्य एवं बंदरगाह विकास मंत्री तथा सिंधुदुर्ग के संरक्षक मंत्री नितेश राणे ने विश्वास जताया कि इस परियोजना से सिंधुदुर्ग और आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार परियोजना को समय पर पूरा कराने के लिए हर आवश्यक सहयोग देगी।

आम जनता और उद्योग पर असर

यह परियोजना कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। एक ओर मुंबई के जल-परिवहन उपयोगकर्ताओं को आधुनिक और प्रदूषण-मुक्त नौकाएँ मिलेंगी, वहीं दूसरी ओर सिंधुदुर्ग जैसे तटीय जिले में औद्योगिक गतिविधि बढ़ेगी। गौरतलब है कि सिंधुदुर्ग पहले से पर्यटन के लिए जाना जाता है, और शिपबिल्डिंग उद्योग का विकास इसे एक नई आर्थिक पहचान दे सकता है।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

MOU हस्ताक्षर समारोह में परिवहन एवं बंदरगाह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय सेठी, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी तथा एम. ज़ोया मरीन सर्विसेज के निदेशक जॉन फर्नांडिस, निदेशक सूरज देवाढिया और डॉ. नीलेश बनावलीकर सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

क्या होगा आगे

MOU के बाद अब दोनों परियोजनाओं को जल्द लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। बैठक में विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। यदि यह परियोजना तय समयसीमा में पूरी होती है, तो महाराष्ट्र देश में ग्रीन मैरीटाइम मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — MOU से फैक्ट्री तक की राह में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरियाँ और तकनीकी क्षमता जैसी बाधाएँ अक्सर तटीय औद्योगिक परियोजनाओं को पटरी से उतारती हैं। मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना खुद वर्षों की देरी झेल चुकी है, इसलिए इस नई आपूर्ति श्रृंखला की समयसीमा पर नज़र रखना ज़रूरी है। सिंधुदुर्ग जैसे पर्यटन-केंद्रित जिले में शिपबिल्डिंग उद्योग का विकास स्थानीय रोजगार के लिए सकारात्मक हो सकता है, बशर्ते कौशल विकास और स्थानीय भर्ती की ठोस योजना हो — जिसका विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंधुदुर्ग में इलेक्ट्रिक बोट फैक्ट्री कहाँ बनेगी और इसकी लागत क्या है?
यह फैक्ट्री सिंधुदुर्ग जिले के सावंतवाड़ी तालुका स्थित तलवणे गाँव में लगभग 22 एकड़ भूमि पर ₹150 करोड़ की लागत से स्थापित की जाएगी। यहाँ आधुनिक तकनीक से लैस पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक नौकाओं का निर्माण होगा।
महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और एम. ज़ोया मरीन के बीच MOU क्यों हुआ?
यह MOU मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना के लिए आधुनिक इलेक्ट्रिक नौकाएँ उपलब्ध कराने और सिंधुदुर्ग में शिपबिल्डिंग सुविधाओं के विकास के लिए 10 जुलाई को हस्ताक्षरित किया गया। इसका उद्देश्य महाराष्ट्र के समुद्री परिवहन को हरित और तकनीक-आधारित बनाना है।
मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना में इस MOU की क्या भूमिका है?
इस समझौते के तहत सिंधुदुर्ग की नई फैक्ट्री में निर्मित इलेक्ट्रिक नौकाएँ मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना को आपूर्ति की जाएंगी। इससे वॉटर मेट्रो के बेड़े को पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक नौकाएँ मिलेंगी।
इस परियोजना से सिंधुदुर्ग के स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा?
मंत्री नितेश राणे के अनुसार, इस परियोजना से सिंधुदुर्ग और आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य में आधुनिक शिपबिल्डिंग उद्योग को मजबूती मिलेगी।
इस परियोजना में कौन-कौन से प्रमुख अधिकारी और कंपनी प्रतिनिधि शामिल हैं?
बैठक में परिवहन एवं बंदरगाह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय सेठी, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी तथा एम. ज़ोया मरीन सर्विसेज के निदेशक जॉन फर्नांडिस, निदेशक सूरज देवाढिया और डॉ. नीलेश बनावलीकर उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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