सिंधुदुर्ग में ₹150 करोड़ की इलेक्ट्रिक बोट फैक्ट्री, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और एम. ज़ोया मरीन का MOU
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में ₹150 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बोट निर्माण इकाई स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया गया है। महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और एम. ज़ोया मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच 10 जुलाई को एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए, जो राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था को हरित और तकनीक-आधारित दिशा देने की योजना का हिस्सा है। यह परियोजना मुंबई वॉटर मेट्रो के लिए आधुनिक इलेक्ट्रिक नौकाओं की आपूर्ति और सिंधुदुर्ग में शिपबिल्डिंग क्षमता के विकास को एकसाथ साधती है।
परियोजना का विवरण
सावंतवाड़ी तालुका के तलवणे गाँव में लगभग 22 एकड़ भूमि पर यह इलेक्ट्रिक बोट फैक्ट्री बनाई जाएगी। यहाँ नवीनतम तकनीक से लैस पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक नौकाओं का निर्माण होगा, जिनका उपयोग सबसे पहले मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना में किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य महाराष्ट्र में समुद्री परिवहन को आधुनिक, सुरक्षित और कार्बन-मुक्त बनाना है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार समुद्री क्षेत्र में बड़े निवेश को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है। उनके अनुसार, मुंबई वॉटर मेट्रो और सिंधुदुर्ग की यह इलेक्ट्रिक बोट इकाई राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगी और परिवहन को अधिक सुरक्षित तथा पर्यावरण के अनुकूल बनाएगी।
राज्य के मत्स्य एवं बंदरगाह विकास मंत्री तथा सिंधुदुर्ग के संरक्षक मंत्री नितेश राणे ने विश्वास जताया कि इस परियोजना से सिंधुदुर्ग और आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार परियोजना को समय पर पूरा कराने के लिए हर आवश्यक सहयोग देगी।
आम जनता और उद्योग पर असर
यह परियोजना कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। एक ओर मुंबई के जल-परिवहन उपयोगकर्ताओं को आधुनिक और प्रदूषण-मुक्त नौकाएँ मिलेंगी, वहीं दूसरी ओर सिंधुदुर्ग जैसे तटीय जिले में औद्योगिक गतिविधि बढ़ेगी। गौरतलब है कि सिंधुदुर्ग पहले से पर्यटन के लिए जाना जाता है, और शिपबिल्डिंग उद्योग का विकास इसे एक नई आर्थिक पहचान दे सकता है।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
MOU हस्ताक्षर समारोह में परिवहन एवं बंदरगाह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय सेठी, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी तथा एम. ज़ोया मरीन सर्विसेज के निदेशक जॉन फर्नांडिस, निदेशक सूरज देवाढिया और डॉ. नीलेश बनावलीकर सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
क्या होगा आगे
MOU के बाद अब दोनों परियोजनाओं को जल्द लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। बैठक में विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। यदि यह परियोजना तय समयसीमा में पूरी होती है, तो महाराष्ट्र देश में ग्रीन मैरीटाइम मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभर सकता है।