10 जुलाई 2026
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महादेव बेटिंग केस: ईडी ने विकास गर्ग की ₹940.77 करोड़ की संपत्ति अटैच की, PMLA के तहत कार्रवाई

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महादेव बेटिंग केस: ईडी ने विकास गर्ग की ₹940.77 करोड़ की संपत्ति अटैच की, PMLA के तहत कार्रवाई

सारांश

महादेव बेटिंग ऐप मामले में ईडी की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई — ₹940.77 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच। विकास गर्ग के नेटवर्क पर आरोप है कि विदेश से संचालित फ्रेंचाइज़ी पैनल के ज़रिए हर महीने ₹450 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई होती थी, जिसे शेल कंपनियों से वैध दिखाया जाता था।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 10 जुलाई 2026 को महादेव बेटिंग मामले में ₹940.77 करोड़ की संपत्तियाँ अस्थायी रूप से अटैच कीं।
अटैचमेंट PMLA, 2002 के तहत रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा की गई; अटैच संपत्तियों में मकान, भूखंड, शेयर और प्रतिभूतियाँ शामिल।
संपत्तियाँ विकास गर्ग , उनके परिवार और उनकी कंपनियों से जुड़ी हैं।
बेटिंग सिंडिकेट विदेश से संचालित फ्रेंचाइज़ी पैनल नेटवर्क के ज़रिए काम करता था; हर महीने ₹450 करोड़ से अधिक की कथित अवैध कमाई।
जाँच छत्तीसगढ़ , आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में दर्ज एफआईआर पर आधारित।
अवैध धन को शेल कंपनियों और फर्जी एंट्रियों के ज़रिए वैध दिखाने का आरोप।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 10 जुलाई 2026 को महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज से जुड़े कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाज़ी मामले में ₹940.77 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से अटैच की हैं। यह कार्रवाई ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की है।

किसकी संपत्तियाँ अटैच हुईं

ईडी के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियाँ विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनके स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनियों से संबंधित हैं। इनमें रिहायशी मकान, भूमि के भूखंड, इक्विटी शेयर और अन्य प्रतिभूतियाँ शामिल हैं। यह अब तक इस मामले में की गई सबसे बड़ी एकल अटैचमेंट कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

जाँच की पृष्ठभूमि

ईडी ने इस मामले की जाँच छत्तीसगढ़ के दुर्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के साथ-साथ आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में दर्ज अन्य प्राथमिकियों के आधार पर शुरू की थी। इन मामलों में अवैध ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के संचालकों, प्रमोटरों और उनके सहयोगियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाज़ी के आरोप लगाए गए हैं।

गौरतलब है कि महादेव बेटिंग ऐप का मामला पहली बार छत्तीसगढ़ में उजागर हुआ था और बाद में इसके तार कई राज्यों तक फैले पाए गए। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय एजेंसियाँ देशभर में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाज़ी नेटवर्क के खिलाफ अभियान तेज कर रही हैं।

बेटिंग सिंडिकेट का तरीका

जाँच में ईडी को पता चला कि यह बेटिंग सिंडिकेट विदेश से संचालित फ्रेंचाइज़ी आधारित 'पैनल' नेटवर्क के ज़रिए काम करता था। ईडी के अनुसार, इस नेटवर्क के माध्यम से हर महीने ₹450 करोड़ से अधिक की कथित अवैध कमाई की जाती थी।

जाँच में यह भी सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज से अर्जित कथित अवैध आय को बहुस्तरीय और जटिल वित्तीय व्यवस्था के ज़रिए वैध धन के रूप में दर्शाया जाता था। इसके लिए नकद राशि, शेल कंपनियों, फर्जी एंट्रियों और कई स्तरों वाले वित्तीय लेनदेन का इस्तेमाल किया गया।

धन का प्रवाह कैसे हुआ

ईडी की जाँच के अनुसार, ₹940.77 करोड़ की कथित अवैध कमाई पहले विकास गर्ग के स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनियों तक पहुँचाई गई। इसके बाद इस धन को विभिन्न कंपनियों के ज़रिए आगे ट्रांसफर किया गया और इसका उपयोग शेयर, प्रतिभूतियों तथा अन्य संपत्तियों की खरीद में किया गया।

यह मनी लॉन्ड्रिंग का वह क्लासिक मॉडल है जिसे 'लेयरिंग' कहा जाता है — जहाँ अवैध धन को इतनी परतों में लपेटा जाता है कि उसका मूल स्रोत ट्रेस करना कठिन हो जाए। आलोचकों का कहना है कि ऐसे नेटवर्क को बिना स्थानीय सांठगांठ के इतने बड़े पैमाने पर चलाना संभव नहीं।

आगे क्या होगा

PMLA के तहत अटैचमेंट के बाद ईडी को निर्धारित समयसीमा में न्यायनिर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) के समक्ष मामला पेश करना होगा, जो यह तय करेगा कि अटैचमेंट को स्थायी रखा जाए या नहीं। इस मामले में आगे गिरफ्तारियाँ और चार्जशीट दाखिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इतने विशाल नेटवर्क को छत्तीसगढ़ से लेकर आंध्र प्रदेश तक बिना स्थानीय संरक्षण के चलाया जा सकता था या नहीं — एक पहलू जिस पर जाँच एजेंसियाँ अभी तक सार्वजनिक रूप से मौन हैं। विदेश से संचालित फ्रेंचाइज़ी मॉडल और हर महीने ₹450 करोड़ की कथित कमाई यह बताती है कि यह केवल तकनीकी अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र था। PMLA के तहत अटैचमेंट दोष-सिद्धि नहीं है — और भारत में ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया वर्षों खिंचती है, जिससे संपत्ति की वास्तविक वसूली अनिश्चित रहती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महादेव ऑनलाइन बेटिंग केस में ईडी ने क्या कार्रवाई की?
ईडी ने 10 जुलाई 2026 को PMLA, 2002 के तहत ₹940.77 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से अटैच की हैं। ये संपत्तियाँ विकास गर्ग, उनके परिवार और उनकी कंपनियों से जुड़ी हैं और इनमें मकान, भूखंड, शेयर व प्रतिभूतियाँ शामिल हैं।
महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज क्या हैं?
महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाज़ी प्लेटफॉर्म हैं, जिन पर आरोप है कि ये विदेश से संचालित फ्रेंचाइज़ी पैनल नेटवर्क के ज़रिए काम करते थे। ईडी के अनुसार इस नेटवर्क से हर महीने ₹450 करोड़ से अधिक की कथित अवैध कमाई होती थी।
विकास गर्ग कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
ईडी की जाँच के अनुसार विकास गर्ग इस बेटिंग नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों के स्वामी और नियंत्रक हैं। उन पर आरोप है कि कथित अवैध कमाई को उनकी कंपनियों के ज़रिए ट्रांसफर कर शेयर और संपत्तियों में लगाया गया।
यह जाँच किन राज्यों में दर्ज एफआईआर पर आधारित है?
ईडी ने यह जाँच छत्तीसगढ़ के दुर्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के साथ-साथ आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर शुरू की। इन मामलों में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाज़ी के आरोप शामिल हैं।
PMLA के तहत अटैचमेंट के बाद आगे क्या होगा?
PMLA के तहत अस्थायी अटैचमेंट के बाद ईडी को निर्धारित समयसीमा में न्यायनिर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) के समक्ष मामला पेश करना होगा। प्राधिकरण यह तय करेगा कि अटैचमेंट स्थायी हो या नहीं; इसके अलावा आगे गिरफ्तारियाँ और चार्जशीट दाखिल होने की संभावना भी बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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