पैरीमैच पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: 6 राज्यों में छापे, ₹112 करोड़ की संपत्ति फ्रीज
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल ऑफिस ने 27 मई 2025 को साइप्रस स्थित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म 'पैरीमैच' के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई की। महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, दमन और उत्तर प्रदेश में 17 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया। इस मामले में अब तक कुल ₹112 करोड़ की संपत्ति फ्रीज की जा चुकी है।
तलाशी में क्या मिला
छापेमारी के दौरान ईडी ने लगभग ₹1.56 करोड़ की चल संपत्ति जब्त की, जिसमें करीब ₹1.2 करोड़ नकद शामिल है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न बैंक खातों में जमा लगभग ₹3.8 करोड़ की राशि को फ्रीज कर दिया गया। तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने मुंबई साइबर पुलिस स्टेशन में पैरीमैच के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर यह जांच शुरू की थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि इस ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के जरिए यूजर्स के साथ धोखाधड़ी की जा रही थी। जांच के अनुसार, पैरीमैच ने निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर ठगा और कथित तौर पर एक वर्ष में ₹3,000 करोड़ से अधिक की कमाई की।
धन शोधन का जटिल नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि पैरीमैच और उससे जुड़े सहयोगियों ने यूजर्स के पैसे जमा करने, उन्हें घुमाने और स्थानांतरित करने के लिए 'म्यूल अकाउंट्स', पेमेंट बिचौलियों और वित्तीय समावेशन चैनलों का एक जटिल नेटवर्क इस्तेमाल किया। कुछ मामलों में, निकासी के दौरान प्लेटफॉर्म-नियंत्रित खातों से सीधा भुगतान करने की बजाय अन्य यूजर्स की जमा राशि को सीधे निकासी करने वाले यूजर के बैंक खाते या यूपीआई आईडी में कई किस्तों में भेजा गया — इस तरह धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि यूजर्स के जमा और निकाले गए पैसे को सॉफ्टवेयर, फिनटेक और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की संस्थाओं के नाम पर खोले गए करंट खातों के जरिए प्रवाहित किया गया। आरोप है कि इन खातों का उपयोग 'वेंडर पेमेंट्स', व्यावसायिक लेन-देन और 'पेमेंट गेटवे सेवाओं' की आड़ में किया गया। इसके अलावा, 'बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट' (बीसी) नेटवर्क, मोबाइल मनी ट्रांसफर एजेंटों, 'ग्राहक सेवा केंद्रों', 'नकद प्रबंधन सेवाओं' (सीएमएस), स्थानीय किराना और खुदरा दुकानों का भी दुरुपयोग किया गया। कुछ एजेंट्स ने कथित तौर पर सीएमएस चैनलों से प्राप्त नकदी को मोड़कर उसे आरटीजीएस ट्रांसफर के साथ समायोजित किया और बाद में इन फंड्स को हवाला चैनलों के जरिए देश से बाहर भेजा गया।
सरोगेट विज्ञापन और हाइपरलोकल मार्केटिंग
जांच में यह भी सामने आया है कि पैरीमैच ने 'पैरीमैच स्पोर्ट्स' और 'पैरीमैच न्यूज' नामों के तहत सरोगेट विज्ञापनों के जरिए अपने बेटिंग प्लेटफॉर्म का प्रचार किया। अन्य बेटिंग वेबसाइटों के विपरीत, इस प्लेटफॉर्म ने हाइपरलोकल मार्केटिंग रणनीति अपनाई और भारत के 15 से अधिक राज्यों में स्थानीय क्रिकेट लीग टीमों के साथ-साथ हॉकी और फुटबॉल टूर्नामेंट को भी प्रायोजित किया।
इसके अलावा, प्लेटफॉर्म ने प्रमुख क्विक-कॉमर्स ऐप्स के जरिए बेटिंग विज्ञापन प्रमोट किए और किराने के सामान की डिलीवरी के साथ प्रचार सामग्री बाँटी — ताकि नए यूजर्स को आकर्षित किया जा सके।
आगे की जांच जारी
ईडी के अनुसार, इस मामले में अब तक कुल ₹112 करोड़ की संपत्ति फ्रीज की जा चुकी है और आगे की जांच अभी भी जारी है। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स पर नकेल कसने के लिए नियामक ढाँचे को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।