31 जुलाई 2026
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ईडी की ऑनलाइन निवेश फ्रॉड पर बड़ी कार्रवाई: चार शहरों में 8 ठिकानों पर छापे, ₹18.4 करोड़ फ्रीज

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ईडी की ऑनलाइन निवेश फ्रॉड पर बड़ी कार्रवाई: चार शहरों में 8 ठिकानों पर छापे, ₹18.4 करोड़ फ्रीज

सारांश

ईडी की यह कार्रवाई सिर्फ छापेमारी नहीं — यह एक सुनियोजित साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश है। चार शहरों में एक साथ 8 ठिकानों पर दबिश, 129 खाते फ्रीज और ₹18.4 करोड़ जब्त — यह दर्शाता है कि फर्जी निवेश ऐप्स और पेमेंट गेटवे मिलकर किस तरह आम निवेशकों को लूट रहे थे।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 1 और 4 जून 2026 को मुंबई, ठाणे, बेंगलुरु और गुरुग्राम में 8 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
पीएमएलए, 2002 की धारा 17(1ए) के तहत 129 बैंक खाते फ्रीज किए गए, जिनमें ₹18.4 करोड़ जमा थे।
छापेमारी में पेक्स डिजिटल, स्मूथपे डिजिटल, सेफपे टेक्नोलॉजीज सहित 6 कंपनियाँ जांच के दायरे में आईं।
पीड़ितों को व्हाट्सएप ग्रुप्स और फर्जी ऐप्स के ज़रिए शेयर बाज़ार से अधिक रिटर्न का लालच देकर ठगा गया।
जांच में कई संस्थाओं के बीच कॉमन डायरेक्टर और साझा परिसरों की कड़ियाँ उजागर हुई हैं।
मामला पश्चिम बंगाल के बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर पर आधारित है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोनल ऑफिस ने 1 और 4 जून 2026 को मुंबई, ठाणे, बेंगलुरु और गुरुग्राम में 8 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में की गई। जांच के दौरान 129 बैंक खातों को फ्रीज किया गया, जिनमें कुल ₹18.4 करोड़ जमा थे।

किन संस्थाओं पर हुई छापेमारी

तलाशी अभियान में जिन कंपनियों और संस्थाओं के परिसरों की जांच की गई, उनमें पेक्स डिजिटल पेमेंट प्राइवेट लिमिटेड, स्मूथपे डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड, किंसेन बिजनेस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, सेफपे टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जो अब मेसर्स टूरस टेक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जानी जाती है), ज्ञान कुबेर लिमिटेड और मेसर्स डिसेंट्रो टेक प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन परिसरों से बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है। इसके अलावा, कुछ लॉकर भी फ्रीज किए गए हैं।

कैसे होती थी ठगी

ईडी की जांच के अनुसार, पीड़ितों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप ग्रुप्स — जैसे 'स्टॉक फ्रंटलाइन सी4', 'वैनगार्ड सी7' आदि — के ज़रिए निशाना बनाया जाता था। उन्हें सीएचसी-एसईएस, एलिस, एस्कॉर्ट्स जैसे फर्जी ऐप्स पर निवेश करने के लिए उकसाया जाता था और शेयर बाज़ार से कहीं अधिक रिटर्न का लालच दिया जाता था। जब भोले-भाले निवेशक पैसा लगाते, तो ऐप पर बड़ा मुनाफा दर्शाया जाता — लेकिन जैसे ही वे राशि निकालने की कोशिश करते, उनसे 'टैक्स' के नाम पर और अधिक धनराशि की मांग की जाती। इस तरह, कई निवेशकों को अलग-अलग आरोपियों ने ठगा।

मनी लॉन्ड्रिंग का जटिल जाल

पीएमएलए के तहत जांच से यह सामने आया है कि साइबर धोखाधड़ी से अर्जित धनराशि को 'म्यूल एंटिटीज', चैरिटेबल ट्रस्ट खातों और पेमेंट गेटवे कंपनियों के नेटवर्क के ज़रिए घुमाया और लेयर किया गया। लेनदेन के पैटर्न से स्पष्ट होता है कि संदिग्ध 'म्यूल अकाउंट्स' से पैसे प्राप्त हुए, कई संस्थाओं के बीच धन का आदान-प्रदान हुआ और पेमेंट गेटवे के बीच बड़ी रकम ट्रांसफर की गई — जो अपराध से हुई कमाई को छिपाने और लॉन्डर करने का संकेत देता है।

जांच में उभरे अहम कनेक्शन

ईडी की जांच में इन संस्थाओं के बीच कॉमन डायरेक्टर, साझा व्यावसायिक परिसर, आपसी वित्तीय संबंध और फंड ट्रांसफर की कड़ियाँ सामने आई हैं। गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल के बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुआ था। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर निवेश धोखाधड़ी के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। ईडी की ओर से आगे की जांच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित कॉर्पोरेट ढाँचे के भीतर चल रहा नेटवर्क था। असली सवाल यह है कि इन कंपनियों को पेमेंट लाइसेंस देने वाली नियामक संस्थाओं ने इतने समय तक इन्हें कैसे अनदेखा किया। जब तक लाइसेंसिंग और KYC ढाँचे में सुधार नहीं होता, ऐसे नेटवर्क नए नामों से फिर खड़े हो सकते हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने ऑनलाइन निवेश फ्रॉड में किन शहरों पर छापे मारे?
ईडी ने 1 और 4 जून 2026 को मुंबई, ठाणे, बेंगलुरु और गुरुग्राम में कुल 8 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत कोलकाता जोनल ऑफिस द्वारा की गई।
ईडी ने इस मामले में कितनी राशि फ्रीज की?
जांच के दौरान पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत 129 बैंक खाते फ्रीज किए गए, जिनमें कुल ₹18.4 करोड़ जमा थे। इसके अलावा कुछ लॉकर भी फ्रीज किए गए हैं।
पीड़ितों को कैसे ठगा जाता था?
पीड़ितों को व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया के ज़रिए सीएचसी-एसईएस, एलिस, एस्कॉर्ट्स जैसे फर्जी ऐप्स पर निवेश के लिए लुभाया जाता था। शेयर बाज़ार से अधिक रिटर्न का लालच दिया जाता और पैसे निकालने पर 'टैक्स' के नाम पर और रकम वसूली जाती थी।
इस मामले में कौन-सी कंपनियाँ जांच के दायरे में हैं?
पेक्स डिजिटल पेमेंट प्राइवेट लिमिटेड, स्मूथपे डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड, किंसेन बिजनेस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, सेफपे टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (अब टूरस टेक ग्लोबल), ज्ञान कुबेर लिमिटेड और डिसेंट्रो टेक प्राइवेट लिमिटेड जांच के दायरे में हैं। इनके बीच कॉमन डायरेक्टर और साझा परिसरों की कड़ियाँ भी सामने आई हैं।
यह जांच कहाँ दर्ज एफआईआर पर आधारित है?
यह जांच पश्चिम बंगाल के बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। ईडी की ओर से आगे की जांच अभी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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