क्या नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ?
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने फर्जी नौकरी घोटाले का भंडाफोड़ किया।
- छापेमारी 16 स्थानों पर हुई।
- महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए।
- जांच जारी है, गिरोह के अन्य सदस्य तलाशे जा रहे हैं।
- हजारों बेरोजगार युवा प्रभावित हुए हैं।
पटना, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले के एक विशाल रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए 8 जनवरी 2026 को देशभर में 16 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।
यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत की गई। छापेमारी मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, कोलकाता, एर्नाकुलम, पंडालम, अडूर, कोडूर, चेन्नई, राजकोट, गोरखपुर, प्रयागराज और लखनऊ सहित कई शहरों में की गई।
ईडी ने तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए, जिनमें बिक्री विलेख, बैंक खातों का विवरण, हाथ से लिखे नोट्स, चेक, ऋण समझौते, निवेश के कागजात, फर्जी नौकरी विज्ञापनों की प्रतियां और डिजिटल सबूत शामिल हैं। ये दस्तावेज घोटाले की पूरी योजना और पैसे के लेन-देन को उजागर करने में सहायक साबित हो रहे हैं।
जांच की शुरुआत सोनपुर जीआरपीएस पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से हुई थी, जिसमें दीपक कुमार तिवारी और सक्षम श्रीवास्तव के खिलाफ बीएनएस 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
दोनों आरोपी सोनपुर रेलवे स्टेशन पर नौकरी की तलाश में आए लोगों को लुभाते पाए गए थे। पूछताछ में पता चला कि ये लोग एक संगठित गिरोह का हिस्सा थे, जो लोगों को भारतीय रेलवे और अन्य सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झूठा वादा करके ठगते थे।
यह गिरोह आरपीएफ, टीटीई, तकनीशियन जैसी नौकरियों के नाम पर फर्जी जॉइनिंग लेटर जारी करता था। उसने फर्जी प्रशिक्षण केंद्र बनाए, नकली पहचान पत्र और ईमेल आईडी तैयार कीं, जो असली सरकारी ईमेल जैसे लगते थे। एक उदाहरण के तौर पर कोई ई-मेल जैसा कुछ इस्तेमाल किया गया। गिरोह ने उम्मीदवारों को 2-3 महीने तक फर्जी बैंक खातों से वेतन का भुगतान भी किया, जैसे "आरआरबी या बाय सेलरी" नाम से, ताकि धोखा वैध लगे।
ईडी ने बताया कि जांच अभी जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। इस बड़े घोटाले से हजारों बेरोजगार युवा प्रभावित हुए हैं। आगे की कार्रवाई से और खुलासे होने की संभावना है।