8 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पूर्व नक्सली भूपति की कहानी: हथियार छोड़कर संविधान के अनुसार कार्य करने की अपील

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पूर्व नक्सली भूपति की कहानी: हथियार छोड़कर संविधान के अनुसार कार्य करने की अपील

सारांश

पूर्व नक्सली भूपति ने सरेंडर के पीछे की वजहों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कैसे संगठन में रहकर उन्होंने लोगों का विश्वास जीता लेकिन हथियारबंद रहने से दूरी बनी। अब वे संविधान के अनुसार कार्य करने की अपील कर रहे हैं।

मुख्य बातें

भूपति ने नक्सल आंदोलन में गलतियों को स्वीकार किया।
सरेंडर के बाद संविधान के अनुसार काम करने की अपील।
सरकार की पुनर्वास योजनाएं महत्वपूर्ण हैं।
नक्सलवाद के खिलाफ यह सरेंडर एक बड़ी सफलता है।
भूपति का संगठन में ४३ वर्षों का अनुभव।

गढ़चिरौली, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व नक्सली मल्लेजुला वेणुगोपाल राव, जिन्हें सोनू और भूपति के नाम से भी जाना जाता है, ने बुधवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस के साथ एक विशेष बातचीत में अपनी जीवन यात्रा साझा की।

उन्होंने बताया कि संगठन में शामिल होने के बाद उन्हें कई प्रकार की जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, "मैं तेलंगाना से महाराष्ट्र आया हूँ। मैंने छत्तीसगढ़ में कभी काम नहीं किया। जो जिम्मेदारी मुझे दी गई, उसे मैंने निभाया। मैं पहले से ही महाराष्ट्र में हूँ।"

सरेंडर करने के पीछे का कारण बताते हुए उन्होंने कहा, "नक्सली आंदोलन में कई गलतियाँ हुईं। हमारी पार्टी ने भी कुछ गलतियाँ कीं। हमने अच्छा काम किया और लोगों का विश्वास जीता, लेकिन हथियारबंद रहने से लोग हमसे दूर हो गए। अब हमें लोगों के मुद्दों को उठाना है और संविधान के अनुसार काम करना है।"

भूपति ने कहा कि नक्सल का मुद्दा केंद्र सरकार से संबंधित है। उन्होंने कहा, "केंद्र पिछले २५-३० वर्षों से मार्गदर्शन कर रहा है। विभिन्न स्तरों पर ऑपरेशन कमांड्स हैं। राज्यों को केंद्र से मार्गदर्शन मिलता है। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही होता है।"

उन्होंने सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा, "महाराष्ट्र में एकल खिड़की योजनाएं हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में पुनर्वास योजनाएं हैं। विभिन्न राज्यों में विभिन्न प्रकार की योजनाएं हैं।"

सरेंडर के बाद भूपति ने कहा कि उनकी कानूनी पहचान बन रही है। आधार कार्ड की प्रक्रिया चल रही है। कुछ लोगों का आधार कार्ड बन गया है और उसके बाद वे लोगों के बीच जा सकते हैं।

उन्होंने जेल में रहते हुए ही अपने कैडरों से अपील की थी कि हथियार छोड़ दें। हथियार से संघर्ष संभव नहीं है। उन्होंने कहा, "हम जनता से दूर हो गए हैं। संविधान के तहत काम करें। बाहर आने के बाद भी मैं यही संदेश दे रहा हूँ।"

उन्होंने हाल ही में राज रेड्डी और देवजी जैसे वरिष्ठ नेताओं के सरेंडर का उल्लेख करते हुए कहा, "झारखंड में भी लोग बचे हुए हैं। मैं अपील करता हूँ कि वे बाहर आएं। मैं एक राजनीतिक ब्यूरो सदस्य के तौर पर कहता हूँ कि बाहर आइए, जनता के साथ रहिए और संविधान के अनुसार काम कीजिए।"

भूपति ने कहा कि बदलती वास्तविकता में सशस्त्र संघर्ष व्यावहारिक नहीं रह गया है। हमें लोगों के साथ रहकर काम करना होगा।

यह उल्लेखनीय है कि भूपति, जो सीपीआई (माओवादी) के पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी के सदस्य थे, ने ४३ वर्षों तक संगठन में काम किया। उन्होंने १५ अक्टूबर २०२५ को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष एके-४७ सहित अन्य हथियार सौंपे और ६० से अधिक कैडरों के साथ सरेंडर किया। यह सरेंडर गढ़चिरौली पुलिस मुख्यालय में हुआ, जहां ५४ हथियार (७ एके-४७, ९ आईएनएसएएस राइफल्स सहित) जमा किए गए। भूपति पर ६ करोड़ रुपये का इनाम था।

यह सरेंडर नक्सलवाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता है। गढ़चिरौली में पिछले साल कई सरेंडर हुए हैं, लेकिन भूपति का सरेंडर सबसे बड़ा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने २०२६ तक नक्सलवाद मुक्त भारत का लक्ष्य रखा है। महाराष्ट्र सरकार की सख्त कार्रवाई, विकास योजनाएं और पुनर्वास नीतियां सरेंडर को बढ़ावा दे रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

भूपति का सरेंडर नक्सलवाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह दर्शाता है कि कैसे नक्सली आंदोलन में व्याप्त गलतियों को स्वीकारते हुए, एक नई दिशा की ओर बढ़ा जा सकता है। उनकी अपील एक सकारात्मक संदेश है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूपति ने सरेंडर क्यों किया?
भूपति ने बताया कि नक्सली आंदोलन में कई गलतियाँ हुईं और अब वे संविधान के अनुसार काम करना चाहते हैं।
सरेंडर के बाद भूपति की स्थिति क्या है?
सरेंडर के बाद भूपति की कानूनी पहचान बन रही है और वे आधार कार्ड की प्रक्रिया में हैं।
नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की क्या योजनाएं हैं?
सरकार ने विभिन्न राज्यों में पुनर्वास योजनाएं और विकास कार्यक्रम लागू किए हैं।
भूपति का संगठन में क्या स्थान था?
भूपति सीपीआई (माओवादी) के पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी के सदस्य थे।
सरेंडर का महत्व क्या है?
भूपति का सरेंडर नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता है और यह सरकार की सख्त कार्रवाई का परिणाम है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले