25 जुलाई 2026
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ईडी की बड़ी छापेमारी: मुंबई, पुणे, बेंगलुरु में ऑनलाइन सट्टेबाजी और निवेश धोखाधड़ी गिरोह पर शिकंजा

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ईडी की बड़ी छापेमारी: मुंबई, पुणे, बेंगलुरु में ऑनलाइन सट्टेबाजी और निवेश धोखाधड़ी गिरोह पर शिकंजा

सारांश

ईडी ने मुंबई, पुणे और बेंगलुरु में एक साथ छापेमारी कर ऑनलाइन सट्टेबाजी और निवेश धोखाधड़ी के बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया। एडसोम फिनटेक के जरिए ₹800 करोड़ से अधिक का क्रिप्टो लेन-देन, फर्जी कंपनियाँ और विदेशी हस्तांतरण — यह मामला डिजिटल वित्तीय अपराध के नए और खतरनाक आयाम को उजागर करता है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 25 जुलाई को मुंबई , पुणे और बेंगलुरु में पीएमएलए, 2002 के तहत तलाशी अभियान चलाया।
जांच का केंद्र ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म 'ऑल पैनल एक्सचेंज' और पुणे स्थित एडसोम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड है।
एक क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के जाली दस्तावेजों का उपयोग कर क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर लगभग ₹800 करोड़ का लेन-देन किया गया।
बेंगलुरु पुलिस की एफआईआर में एक शिकायतकर्ता से ₹5.30 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप।
अपराध की आय क्रिप्टो के जरिए विदेशी संस्थाओं को हस्तांतरित की गई; कई बैंक खाते फ्रीज किए गए।
आगे की जांच जारी; गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की संभव।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने 25 जुलाई को मुंबई, पुणे और बेंगलुरु में एक साथ तलाशी अभियान चलाकर ऑनलाइन सट्टेबाजी, गेमिंग और निवेश धोखाधड़ी के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई इस कार्रवाई में आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और अन्य भौतिक साक्ष्य जब्त किए गए, साथ ही कई बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए।

मामले की पृष्ठभूमि

जांच की शुरुआत जलगांव पुलिस द्वारा दर्ज एक एफआईआर से हुई, जिसमें एक शिकायतकर्ता को व्हाट्सएप के जरिए ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म 'ऑल पैनल एक्सचेंज' पर लुभाया गया था। आरोपियों ने पहले लॉगिन क्रेडेंशियल देकर शुरुआती निकासी की अनुमति दी, जिससे पीड़ित का विश्वास जीता गया। इसके बाद उसे बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। जब पीड़ित ने निकासी का अनुरोध किया, तो उसे अस्वीकार कर दिया गया और ऑपरेटरों ने कोई जवाब देना बंद कर दिया।

एडसोम फिनटेक और धन का जाल

पीएमएलए के तहत जांच में खुलासा हुआ कि पीड़ितों से ऐंठी गई धनराशि पुणे स्थित कंपनी एडसोम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। फर्जी खातों और बिचौलियों के जरिए इन खातों में करोड़ों रुपए जमा किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि एडसोम फिनटेक के खाते देशभर में दर्ज कई साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े हैं — जिनमें ऑनलाइन गेमिंग धोखाधड़ी, निवेश धोखाधड़ी, शेयर ट्रेडिंग धोखाधड़ी, क्रिप्टो धोखाधड़ी और ऑनलाइन टास्क-आधारित धोखाधड़ी शामिल हैं।

इसके अलावा, बेंगलुरु पुलिस ने भी एडसोम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड और अन्य आरोपियों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें एक शिकायतकर्ता से ₹5.30 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है।

₹800 करोड़ का क्रिप्टो लेन-देन और फर्जी संस्थाएँ

जांच के अनुसार, अपराध से प्राप्त धन का एक हिस्सा फर्जी संस्थाओं के जाल के माध्यम से व्यवस्थित रूप से छिपाया गया और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के जरिए आभासी डिजिटल संपत्तियों में परिवर्तित करके विदेशी संस्थाओं और व्यक्तियों को हस्तांतरित किया गया। एक क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के केवाईसी और जाली दस्तावेजों का उपयोग कर एक व्यक्ति ने क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर खाता खोला, जिसके माध्यम से लगभग ₹800 करोड़ का लेन-देन हुआ।

यह राशि कथित तौर पर अवैध गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के जरिए भोले-भाले पीड़ितों से धोखाधड़ी से अर्जित अपराध की आय से सीधे जुड़ी पाई गई। गौरतलब है कि धन छिपाने में इस्तेमाल की गई कई संस्थाएँ फर्जी थीं — उनका कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था, उन्हें फर्जी निदेशकों के नाम पर स्थापित किया गया था और उनका वास्तविक नियंत्रण अन्य व्यक्तियों के हाथ में था। इनमें से कुछ अपने पंजीकृत पते पर मौजूद भी नहीं थीं।

छापेमारी में क्या मिला

तलाशी अभियान के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और भौतिक साक्ष्य बरामद कर जब्त किए गए। अनेक संस्थाओं और व्यक्तियों से जुड़े विभिन्न बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। ईडी के अनुसार आगे की जांच जारी है।

आगे क्या होगा

यह मामला उस बढ़ती प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है जिसमें साइबर अपराधी डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्रिप्टो नेटवर्क का उपयोग धन शोधन के लिए कर रहे हैं। ईडी की यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब देशभर में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में तेज़ वृद्धि दर्ज की जा रही है। जांच के नतीजों के आधार पर आगे गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्रिप्टो वॉलेट और विदेशी खातों तक फैला है। ₹800 करोड़ का आँकड़ा बताता है कि ये अपराधी अब छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम नेटवर्क के रूप में काम कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के केवाईसी का इस्तेमाल इतने बड़े पैमाने पर कैसे हुआ — और वित्तीय नियामक निगरानी की इस चूक की जवाबदेही कौन तय करेगा। जब तक डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्रिप्टो एक्सचेंज पर वास्तविक समय की निगरानी नहीं होगी, ऐसी कार्रवाइयाँ हिमशैल की नोक को ही छू पाएंगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने मुंबई, पुणे और बेंगलुरु में किस मामले में छापेमारी की?
ईडी ने ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म 'ऑल पैनल एक्सचेंज' और पुणे स्थित एडसोम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े धन शोधन मामले में 25 जुलाई को तीन शहरों में तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत की गई और इसमें साइबर धोखाधड़ी, क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी धन हस्तांतरण की जांच शामिल है।
एडसोम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड का इस धोखाधड़ी से क्या संबंध है?
जांच के अनुसार, ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के पीड़ितों से ऐंठी गई धनराशि एडसोम फिनटेक के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इस कंपनी के खाते देशभर में दर्ज कई साइबर अपराध शिकायतों — जिनमें निवेश धोखाधड़ी, शेयर ट्रेडिंग धोखाधड़ी और क्रिप्टो धोखाधड़ी शामिल हैं — से जुड़े पाए गए।
इस मामले में ₹800 करोड़ का क्रिप्टो लेन-देन कैसे हुआ?
एक व्यक्ति ने क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के केवाईसी और जाली दस्तावेजों का उपयोग करके क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर खाता खोला। इस खाते के माध्यम से उक्त सोसाइटी के बैंक खाते से लगभग ₹800 करोड़ का लेन-देन हुआ, जिसका बड़ा हिस्सा अवैध गेमिंग-सट्टेबाजी से प्राप्त अपराध की आय से जुड़ा पाया गया।
इस धोखाधड़ी में आम लोगों को कैसे फंसाया जाता था?
आरोपी व्हाट्सएप संदेश के जरिए लोगों को ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर लुभाते थे। शुरुआत में लॉगिन क्रेडेंशियल देकर और छोटी निकासी की अनुमति देकर विश्वास जीता जाता था, फिर बड़ी रकम निवेश कराई जाती थी। बाद में निकासी के अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया जाता था और ऑपरेटर संपर्क से गायब हो जाते थे।
ईडी की इस छापेमारी में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
तलाशी अभियान में आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और भौतिक साक्ष्य जब्त किए गए हैं। कई संस्थाओं और व्यक्तियों से जुड़े बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। ईडी के अनुसार आगे की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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