ईडी ने क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन गिरफ्तार, ₹500 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिमला उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 17 जुलाई 2026 को क्रिप्टोकरेंसी आधारित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा को गिरफ्तार किया। जाँच में सामने आया है कि इस घोटाले में 24.8 लाख से अधिक निवेशक ठगे गए और कुल नुकसान लगभग ₹500 करोड़ रहा।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जाँच हिमाचल प्रदेश और पंजाब राज्य पुलिस द्वारा मुख्य साजिशकर्ता सुभाष शर्मा और अन्य आरोपियों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जाँच के अनुसार, 2018 में सुभाष शर्मा ने हेम राज, मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर एक क्रिप्टोकरेंसी-आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) योजना की नींव रखी।
आरोपियों ने कोरवियो, डीजीटी, हाइपेनेक्स्ट और ए-ग्लोबल सहित कई फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म संचालित किए और निवेशकों को उच्च व सुनिश्चित रिटर्न का प्रलोभन देकर ठगा। यह प्लेटफॉर्म बाद में डिजिटल ओशन पर होस्ट विदेशी सर्वरों पर स्थानांतरित कर दिया गया और corvio.io तथा voskro.com जैसे डोमेन के ज़रिए चलाया गया।
घोटाले का तरीका
जाँच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने 'कोरवियो कॉइन (KRO)' में निवेश के लिए जनता को लुभाने हेतु भ्रामक सेमिनार आयोजित किए, टोकन के मूल्यों में हेरफेर किया और पोंजी स्कीम को जीवित रखने के लिए नए टोकन जारी करते रहे। इस स्कीम में नए निवेशकों से जुटाई गई रकम का उपयोग पुराने निवेशकों को रिटर्न देने में किया जाता था — जो एक क्लासिक पोंजी संरचना है।
धोखाधड़ी छिपाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और डोमेन डेटा मिटा दिए गए। हालाँकि, बरामद डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि कुल लेनदेन 21.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक था।
तीनों आरोपियों की भूमिका
ईडी की जाँच के अनुसार, मिलन गर्ग इन फर्जी प्लेटफॉर्मों का तकनीकी सूत्रधार था। उसने कोरवियो/वोस्क्रो, हाइपेनेक्स्ट और ए-ग्लोबल को विकसित और नियंत्रित किया, क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट का प्रबंधन किया, नकदी को क्रिप्टो में परिवर्तित करने में सहायता की और धोखाधड़ी के तकनीकी व वित्तीय संचालन पर पूर्ण नियंत्रण रखा।
सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा कोरवियो/वोस्क्रो के शुरुआती प्रमोटरों में शामिल थे। इन्होंने निवेशकों से बड़ी मात्रा में नकदी एकत्र की और उसे सुभाष शर्मा के निर्देश पर विजय जुनेजा और मासूम जुनेजा सहित अन्य सह-साजिशकर्ताओं को सौंपा। जाँच में यह भी सामने आया कि सुखदेव ठाकुर ऐसे बैंक खाते और क्रिप्टो वॉलेट संचालित करते थे जिनके ज़रिए घोटाले की राशि भेजी जाती थी। अभिषेक शर्मा के बैंक खाते में क्रिप्टोकरेंसी और रियल एस्टेट परियोजनाओं में अपराध की आय को लॉन्ड्रिंग करने से जुड़े महत्त्वपूर्ण वित्तीय लेनदेन दर्ज हैं।
मास्टरमाइंड अभी फरार
इस पूरे घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता सुभाष शर्मा इस समय फरार है और ईडी उसकी तलाश जारी रखे हुए है। तीनों गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। आगे की जाँच में अन्य सह-साजिशकर्ताओं और धन के प्रवाह की पड़ताल की जा रही है।