17 जुलाई 2026
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ईडी ने क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन गिरफ्तार, ₹500 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश

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ईडी ने क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन गिरफ्तार, ₹500 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश

सारांश

ईडी ने ₹500 करोड़ के क्रिप्टो पोंजी घोटाले में तीन प्रमुख आरोपियों को दबोचा — तकनीकी सूत्रधार मिलन गर्ग सहित। 24.8 लाख से अधिक निवेशकों को ठगने वाला मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा अभी फरार है। कोरवियो कॉइन के नाम पर खड़ा यह नेटवर्क 2018 से सक्रिय था।

मुख्य बातें

ईडी ने 17 जुलाई 2026 को पीएमएलए की धारा 19(1) के तहत मिलन गर्ग , सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा को गिरफ्तार किया।
घोटाले में 24.8 लाख से अधिक निवेशक प्रभावित; कुल लेनदेन 21.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक; अनुमानित नुकसान ₹500 करोड़ ।
फर्जी प्लेटफॉर्म कोरवियो , हाइपेनेक्स्ट और ए-ग्लोबल के ज़रिए 2018 से पोंजी स्कीम चलाई जा रही थी।
मुख्य साजिशकर्ता सुभाष शर्मा अभी फरार, ईडी की तलाश जारी।
मिलन गर्ग तकनीकी सूत्रधार था; सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा ने धन संग्रह और वितरण में भूमिका निभाई।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिमला उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 17 जुलाई 2026 को क्रिप्टोकरेंसी आधारित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा को गिरफ्तार किया। जाँच में सामने आया है कि इस घोटाले में 24.8 लाख से अधिक निवेशक ठगे गए और कुल नुकसान लगभग ₹500 करोड़ रहा।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जाँच हिमाचल प्रदेश और पंजाब राज्य पुलिस द्वारा मुख्य साजिशकर्ता सुभाष शर्मा और अन्य आरोपियों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जाँच के अनुसार, 2018 में सुभाष शर्मा ने हेम राज, मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर एक क्रिप्टोकरेंसी-आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) योजना की नींव रखी।

आरोपियों ने कोरवियो, डीजीटी, हाइपेनेक्स्ट और ए-ग्लोबल सहित कई फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म संचालित किए और निवेशकों को उच्च व सुनिश्चित रिटर्न का प्रलोभन देकर ठगा। यह प्लेटफॉर्म बाद में डिजिटल ओशन पर होस्ट विदेशी सर्वरों पर स्थानांतरित कर दिया गया और corvio.io तथा voskro.com जैसे डोमेन के ज़रिए चलाया गया।

घोटाले का तरीका

जाँच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने 'कोरवियो कॉइन (KRO)' में निवेश के लिए जनता को लुभाने हेतु भ्रामक सेमिनार आयोजित किए, टोकन के मूल्यों में हेरफेर किया और पोंजी स्कीम को जीवित रखने के लिए नए टोकन जारी करते रहे। इस स्कीम में नए निवेशकों से जुटाई गई रकम का उपयोग पुराने निवेशकों को रिटर्न देने में किया जाता था — जो एक क्लासिक पोंजी संरचना है।

धोखाधड़ी छिपाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और डोमेन डेटा मिटा दिए गए। हालाँकि, बरामद डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि कुल लेनदेन 21.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक था।

तीनों आरोपियों की भूमिका

ईडी की जाँच के अनुसार, मिलन गर्ग इन फर्जी प्लेटफॉर्मों का तकनीकी सूत्रधार था। उसने कोरवियो/वोस्क्रो, हाइपेनेक्स्ट और ए-ग्लोबल को विकसित और नियंत्रित किया, क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट का प्रबंधन किया, नकदी को क्रिप्टो में परिवर्तित करने में सहायता की और धोखाधड़ी के तकनीकी व वित्तीय संचालन पर पूर्ण नियंत्रण रखा।

सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा कोरवियो/वोस्क्रो के शुरुआती प्रमोटरों में शामिल थे। इन्होंने निवेशकों से बड़ी मात्रा में नकदी एकत्र की और उसे सुभाष शर्मा के निर्देश पर विजय जुनेजा और मासूम जुनेजा सहित अन्य सह-साजिशकर्ताओं को सौंपा। जाँच में यह भी सामने आया कि सुखदेव ठाकुर ऐसे बैंक खाते और क्रिप्टो वॉलेट संचालित करते थे जिनके ज़रिए घोटाले की राशि भेजी जाती थी। अभिषेक शर्मा के बैंक खाते में क्रिप्टोकरेंसी और रियल एस्टेट परियोजनाओं में अपराध की आय को लॉन्ड्रिंग करने से जुड़े महत्त्वपूर्ण वित्तीय लेनदेन दर्ज हैं।

मास्टरमाइंड अभी फरार

इस पूरे घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता सुभाष शर्मा इस समय फरार है और ईडी उसकी तलाश जारी रखे हुए है। तीनों गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। आगे की जाँच में अन्य सह-साजिशकर्ताओं और धन के प्रवाह की पड़ताल की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ एमएलएम की आड़ में लाखों निवेशकों को ठगा जाता है। चिंताजनक यह है कि मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा 2018 से सक्रिय रहने के बावजूद अभी तक फरार है — जो जाँच एजेंसियों के बीच समन्वय और त्वरित कार्रवाई पर सवाल उठाता है। डिजिटल साक्ष्य मिटाए जाने के बाद भी 24.8 लाख पीड़ितों का डेटा बरामद होना ईडी की तकनीकी क्षमता की सराहना योग्य है, लेकिन ₹500 करोड़ की वसूली का रास्ता तब तक अधूरा रहेगा जब तक मुख्य आरोपी कानून की पकड़ से बाहर है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग मामले में किन्हें गिरफ्तार किया?
ईडी ने 17 जुलाई 2026 को मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा को पीएमएलए, 2002 की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया। तीनों कोरवियो कॉइन घोटाले के प्रमुख साजिशकर्ता और प्रमोटर रहे हैं।
कोरवियो कॉइन (KRO) घोटाला क्या है?
कोरवियो कॉइन एक फर्जी क्रिप्टोकरेंसी-आधारित एमएलएम योजना है जो 2018 में सुभाष शर्मा और उसके सहयोगियों ने शुरू की थी। निवेशकों को उच्च और सुनिश्चित रिटर्न का लालच देकर ठगा गया; नए निवेशकों की रकम से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था — यानी एक क्लासिक पोंजी संरचना।
इस घोटाले में कितने लोग प्रभावित हुए और नुकसान कितना है?
बरामद डिजिटल साक्ष्यों के अनुसार, 24.8 लाख से अधिक उपयोगकर्ता इस घोटाले का शिकार हुए। कुल लेनदेन 21.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा और निवेशकों को अनुमानित ₹500 करोड़ का नुकसान हुआ।
मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा की क्या स्थिति है?
सुभाष शर्मा, जिसे इस क्रिप्टोकरेंसी घोटाले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, इस समय फरार है। ईडी उसकी तलाश जारी रखे हुए है और आगे की जाँच में अन्य सह-साजिशकर्ताओं की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
मिलन गर्ग की इस घोटाले में क्या भूमिका थी?
जाँच के अनुसार, मिलन गर्ग इन फर्जी प्लेटफॉर्मों का तकनीकी सूत्रधार था। उसने कोरवियो, हाइपेनेक्स्ट और ए-ग्लोबल जैसे प्लेटफॉर्म विकसित और नियंत्रित किए, क्रिप्टो वॉलेट प्रबंधित किए और नकदी को क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित करने में सहायता की।
राष्ट्र प्रेस
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