शिमला में ईडी की छापेमारी: क्रिप्टो पोंजी फ्रॉड में जुनेजा बंधु गिरफ्त में, ₹500 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिमला कार्यालय ने सोमवार, 15 जून 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 17(1) के तहत क्रिप्टोकरेंसी आधारित पोंजी घोटाले में विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस छापेमारी में अहम दस्तावेज़ और डिजिटल उपकरण ज़ब्त किए गए, जो जाँच में साक्ष्य के रूप में काम आएंगे। इस घोटाले में 2.48 लाख से अधिक निवेशकों को ₹500 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान होने का अनुमान है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा और अन्य के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी के आधार पर यह जाँच शुरू की थी। जाँच के अनुसार, 2018 में सुभाष शर्मा ने हेम राज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और राधिका शर्मा जैसे सह-आरोपियों के साथ मिलकर एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए क्रिप्टोकरेंसी-आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) स्कीम की शुरुआत की। यह स्कीम बाद में विदेशी सर्वर (डिजिटल ओशन) पर स्थानांतरित कर दी गई और अलग-अलग डोमेन के ज़रिए संचालित की गई।
कैसे चला फ्रॉड का जाल
आरोपियों ने निवेशकों को 'कोर्वियो कॉइन (केआरओ)' में निवेश के लिए प्रेरित किया। इसके लिए भारी रिटर्न का वादा किया गया, भ्रामक सेमिनार आयोजित किए गए, टोकन की कीमतों में मनमाना हेरफेर किया गया और नए टोकन लॉन्च किए गए। यह एक क्लासिक पोंजी संरचना थी — नए निवेशकों से जुटाई गई रकम से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था।
अपनी आपराधिक गतिविधियों को छुपाने के लिए आरोपियों ने डिजिटल रिकॉर्ड और डोमेन डिलीट कर दिए। हालाँकि, रिकवर किए गए डेटा से पता चला कि 2.48 लाख से अधिक उपयोगकर्ता इस वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हुए और कुल लेन-देन 21.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹500 करोड़) से अधिक का रहा। घोटाला उजागर होने के बाद मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए दुबई फरार हो गए।
जुनेजा बंधुओं की भूमिका
जाँच में पता चला कि निवेशकों से एकत्र की गई अपराध की कमाई विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा तक पहुँचाई गई। पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों के अनुसार, सुभाष शर्मा और उनके साथियों ने जुनेजा बंधुओं को नकद राशि दी। जुनेजा बंधुओं ने कथित तौर पर इस फंड का उपयोग अचल संपत्ति खरीदने में किया, जिसमें पंजीकृत मूल्य वास्तव में चुकाई गई कीमत से काफी कम रखा गया — इस तरह लेन-देन के एक बड़े हिस्से को नकद में निपटाया गया और धोखाधड़ी की कमाई की लॉन्ड्रिंग को आसान बनाया गया।
इसके अलावा, जाँच में यह भी सामने आया कि जुनेजा बंधु अपने कर्मचारियों के नाम पर खोले गए कई बैंक खातों में नॉमिनी थे। जाँचकर्ताओं के अनुसार, इन खातों पर उनका पूर्ण नियंत्रण था और इनका उपयोग अपराध से अर्जित धन को छिपाने और उसकी लेयरिंग के लिए किया गया था। इस आपराधिक नेटवर्क ने फर्जी फर्मों और बिचौलियों के ज़रिए धन को घुमाया और ऑडिट ट्रेल छुपाने के लिए एक हिस्से को क्रिप्टोकरेंसी में भी बदला।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
अपराध की कमाई की कुल राशि निर्धारित करने के लिए मासूम जुनेजा को पीएमएलए, 2002 की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया गया है। ईडी की यह कार्रवाई देश में बढ़ते क्रिप्टोकरेंसी-आधारित वित्तीय घोटालों के विरुद्ध केंद्रीय एजेंसियों की सख्त होती मुद्रा को दर्शाती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत में क्रिप्टो फ्रॉड के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और नियामक ढाँचा अभी भी विकसित हो रहा है। आगे की जाँच जारी है और अन्य आरोपियों की संलिप्तता की भी पड़ताल की जा रही है।