हिंदी दिवस 2026: ह्यूस्टन, यूएई और बहरीन में भारतीय मिशनों ने साहित्यिक उत्सव मनाया
सारांश
मुख्य बातें
दुनिया भर में फैले भारतीय मिशनों ने 14 सितंबर 2026 को हिंदी दिवस के अवसर पर साहित्यिक सभाओं, कविता पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। ह्यूस्टन, अबू धाबी और मनामा (बहरीन) सहित कई शहरों में भारतीय राजनयिक प्रतिष्ठानों ने स्थानीय हिंदी प्रेमी समुदायों के साथ मिलकर यह उत्सव धूमधाम से मनाया।
ह्यूस्टन में साहित्यिक मिलन
ह्यूस्टन स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने इंटरनेशनल हिंदी एसोसिएशन-ह्यूस्टन चैप्टर के सहयोग से एक विशेष साहित्यिक मिलन आयोजित किया। इस कार्यक्रम में आवास, शहरी मामलों और विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया।
महावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह आयोजन 'हिंदी भाषा की समृद्धि, समावेशिता और जीवंतता का जश्न' था। दूतावास ने कहा कि मंत्री मनोहर लाल की उपस्थिति और 'प्रेरणादायक शब्दों ने पूरे क्षेत्र में हिंदी प्रेमी समुदाय को उत्साहित और प्रेरित किया।'
यूएई में कविता पाठ और निबंध प्रतियोगिता
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भारतीय दूतावास ने अबू धाबी और अल ऐन के भारतीय स्कूलों के सहयोग से हिंदी दिवस 2026 मनाया। कार्यक्रम में कविता पाठ, निबंध प्रतियोगिताएँ और हिंदी क्विज़ का आयोजन हुआ।
यूएई में भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट किया कि इस उत्सव में शिक्षकों और छात्रों को सम्मानित किया गया, जिससे 'हिंदी की सुंदरता और रचनात्मकता का जश्न' मनाया गया। यह आयोजन प्रवासी भारतीय बच्चों में हिंदी भाषा के प्रति लगाव बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बहरीन में सांस्कृतिक रंग
बहरीन में भारतीय दूतावास ने नाटक, नृत्य प्रदर्शन, कविता पाठ और हिंदी क्विज़ के माध्यम से यह दिन मनाया। दूतावास ने एक्स पर बताया कि 'दूतावास परिवार ने हिंदी की समृद्धि और प्रासंगिकता का जश्न मनाने के लिए एक साथ आए।'
कार्यक्रम में महामहिम राजदूत ने हिंदी में अपना संबोधन दिया और प्रतिभागियों को सम्मानित किया। गौरतलब है कि बहरीन आयोजन के दौरान 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को भी बढ़ावा दिया गया, जिसमें ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मज़बूत करने में भारत की भूमिका को रेखांकित किया गया।
हिंदी दिवस का महत्व
प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1949 में भारत की संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। यह ऐसे समय में और प्रासंगिक हो जाता है जब भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति के साथ-साथ हिंदी भाषा का प्रसार भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ रहा है।
विदेश में भारतीय मिशनों द्वारा इस प्रकार के आयोजन प्रवासी भारतीय समुदाय को उनकी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने का प्रयास करते हैं। आने वाले वर्षों में इन आयोजनों का दायरा और अधिक बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि भारत सरकार भाषाई कूटनीति को प्राथमिकता दे रही है।