30 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में संपन्न, ग्लोबल साउथ की एकता और भारत-चीन सहयोग पर जोर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में संपन्न, ग्लोबल साउथ की एकता और भारत-चीन सहयोग पर जोर

सारांश

नई दिल्ली में 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन — 20 साल, 11 सदस्य, 140 NDB परियोजनाएँ और भारत-चीन के बीच बहाल उड़ानें व सीमा व्यापार। ग्लोबल साउथ की एकजुटता अब सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, ठोस आँकड़ों पर खड़ी है — लेकिन आम सहमति की चुनौती भी उतनी ही बड़ी है।

मुख्य बातें

18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ; यह ब्रिक्स की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ है।
ब्रिक्स अब 11 औपचारिक सदस्यों और 10 साझेदार देशों तक विस्तारित; वैश्विक GDP में 30% हिस्सेदारी।
IMF के अनुसार 2028 तक 'ग्रेटर ब्रिक्स' की विकास दर जी7 से तीन गुना अधिक होगी।
नव विकास बैंक (NDB) ने 42.9 अरब डॉलर की 140 परियोजनाओं को 2026 की पहली तिमाही तक स्वीकृति दी।
भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 1 खरब 55 अरब 60 करोड़ डॉलर ; पाँच सीधी उड़ानें बहाल, छह साल बाद सीमा व्यापार पुनः शुरू।
सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं बैठक में आठ-सूत्री सहमति बनी।

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ — ऐसे समय में जब यह बहुपक्षीय मंच अपनी स्थापना की 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस सम्मेलन ने निष्पक्षता, न्याय और समावेशी विकास के लिए ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को एक साझा मंच दिया, और यह परखा कि उभरती बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ एकजुटता के ज़रिए वैश्विक अनिश्चितताओं में स्थिरता का स्रोत बन सकती हैं या नहीं।

ब्रिक्स का विस्तार और आर्थिक वज़न

शुरुआत में मात्र चार सदस्य देशों वाला यह समूह अब 11 औपचारिक सदस्यों और 10 साझेदार देशों तक पहुँच चुका है। ब्रिक्स देशों में दुनिया की लगभग आधी आबादी निवास करती है, वैश्विक आर्थिक उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है और वैश्विक व्यापार का पाँचवाँ हिस्सा इन्हीं देशों से होकर गुज़रता है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान के अनुसार वर्ष 2028 तक 'ग्रेटर ब्रिक्स' की आर्थिक विकास दर जी7 की तुलना में तीन गुना हो जाएगी।

गौरतलब है कि वर्ष 2026 में नई औद्योगिक क्रांति में साझेदारी पर ब्रिक्स फोरम के तहत 11 शहरों ने साझेदार शहरों का नेटवर्क बनाना शुरू किया है, जिससे सहयोग का दायरा राष्ट्रीय स्तर से शहर-स्तर तक विस्तृत हुआ है। इस वर्ष की पहली तिमाही तक नव विकास बैंक (NDB) ने कुल 42.9 अरब डॉलर की 140 निवेश परियोजनाओं को स्वीकृति दे दी है।

भारत-चीन संबंधों की अहम भूमिका

ब्रिक्स सहयोग में भारत और चीन की केंद्रीय भूमिका इस साल और अगले साल क्रमशः दोनों देशों की अध्यक्षता के रूप में और भी स्पष्ट हो गई है। दोनों देशों के नेताओं ने रणनीतिक सहमति बनाई है कि वे एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं और एक-दूसरे के विकास के लिए खतरा नहीं, बल्कि अवसर हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब द्विपक्षीय संबंधों में ठोस सुधार भी दर्ज हुए हैं। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1 खरब 55 अरब 60 करोड़ डॉलर रहा। इसके अलावा दोनों पक्षों ने पाँच सीधी उड़ानें फिर से शुरू कीं और छह साल के अंतराल के बाद सीमा व्यापार बहाल किया। सुरक्षा मोर्चे पर, चीन-भारत सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं बैठक में आठ-सूत्री सहमति बनी, जिसमें दोनों पक्षों ने सीमांत क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

चुनौतियाँ और ब्रिक्स की विशिष्टता

हालाँकि, ग्लोबल साउथ के लिए एकजुटता का यह रास्ता चुनौतियों से मुक्त नहीं है। आंतरिक विकास का अंतर बढ़ रहा है, विदेशी तकनीक पर निर्भरता बनी हुई है और वैश्वीकरण-विरोधी सोच तथा एकपक्षवाद का दबाव भी मौजूद है। ब्रिक्स के विस्तार से समूह का प्रतिनिधित्व तो बढ़ा है, लेकिन आम सहमति तक पहुँचना भी अपेक्षाकृत जटिल हो गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार ब्रिक्स की खासियत यही है कि यह 'रणनीतिक अलगाव के बिना रणनीतिक स्वायत्तता' का मंच है — यानी सभी मुद्दों पर एकमत होना अनिवार्य नहीं। इसी वजह से भारत अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाए रख सकता है, जबकि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पश्चिमी देशों से गहरे आर्थिक संबंध रख सकते हैं।

ब्रिक्स का दीर्घकालिक उद्देश्य

ब्रिक्स मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को प्रतिस्थापित करने की कोशिश नहीं करता। बल्कि, समानांतर तंत्र बनाकर उभरती आर्थिक शक्तियों के लिए संस्थागत स्थान विस्तारित करना इसका मूल उद्देश्य है। आँकड़ों के अनुसार, चीन और भारत — दुनिया की दो सर्वाधिक आबादी वाली उभरती अर्थव्यवस्थाओं — के बीच सीमा, व्यापार और राजनयिक संबंधों में आया सुधार ग्लोबल साउथ की एकता का सबसे ठोस प्रमाण माना जा रहा है।

आगे देखें तो नई दिल्ली सम्मेलन के बाद ब्रिक्स की अगली अध्यक्षता चीन के पास जाएगी, जिससे यह देखना दिलचस्प होगा कि समूह अपने विस्तारित ढाँचे में एकता और गति दोनों कायम रख पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पश्चिमी देशों को असहज करता है। भारत-चीन के बीच व्यापार और कूटनीतिक पुनर्बहाली वास्तव में उल्लेखनीय है, लेकिन सीमा पर आठ-सूत्री सहमति का क्रियान्वयन अभी बाकी है — इतिहास बताता है कि सहमति और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई अक्सर गहरी होती है। NDB की 140 परियोजनाएँ प्रभावशाली आँकड़ा है, लेकिन जब तक परियोजनाओं के सामाजिक-आर्थिक परिणामों की स्वतंत्र समीक्षा नहीं होती, 'ग्लोबल साउथ के विश्वासपात्र साझेदार' का दावा अधूरा रहेगा।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कब और कहाँ हुआ?
18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली, भारत में आयोजित हुआ। यह सम्मेलन ब्रिक्स सहयोग व्यवस्था की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुआ।
ब्रिक्स में अभी कितने सदस्य और साझेदार देश हैं?
वर्तमान में ब्रिक्स में 11 औपचारिक सदस्य और 10 साझेदार देश शामिल हैं। यह समूह शुरुआत में केवल चार सदस्य देशों के साथ गठित हुआ था।
नव विकास बैंक ने अब तक कितनी परियोजनाओं को मंजूरी दी है?
2026 की पहली तिमाही तक नव विकास बैंक (NDB) ने कुल 42.9 अरब डॉलर की 140 निवेश परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। बैंक ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तपोषण माध्यम बन रहा है।
भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में हाल में क्या बदलाव आए हैं?
वर्ष 2025 में भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार 1 खरब 55 अरब 60 करोड़ डॉलर रहा। दोनों देशों ने पाँच सीधी उड़ानें बहाल कीं, छह साल बाद सीमा व्यापार फिर शुरू हुआ और सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं बैठक में आठ-सूत्री सहमति बनी।
ब्रिक्स की ग्लोबल साउथ के लिए क्या प्रासंगिकता है?
ब्रिक्स मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बदलने की बजाय समानांतर संस्थागत ढाँचा खड़ा कर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए नीति-स्थान बढ़ाना चाहता है। IMF के अनुमान के अनुसार 2028 तक 'ग्रेटर ब्रिक्स' की विकास दर जी7 से तीन गुना अधिक हो सकती है, जो ग्लोबल साउथ के लिए इस मंच की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले