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ब्रिक्स नेताओं की 18वीं बैठक: नई दिल्ली घोषणापत्र जारी, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर जोर

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ब्रिक्स नेताओं की 18वीं बैठक: नई दिल्ली घोषणापत्र जारी, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर जोर

सारांश

ब्रिक्स नेताओं की 18वीं बैठक नई दिल्ली में हुई और एक व्यापक घोषणापत्र जारी किया गया — जिसमें बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, UN सुधार, WTO की रक्षा और एकपक्षीय टैरिफ का विरोध शामिल है। 2027 में चीन अगली अध्यक्षता संभालेगा।

मुख्य बातें

ब्रिक्स नेताओं की 18वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई और नई दिल्ली घोषणापत्र जारी किया गया।
घोषणापत्र में बहुध्रुवीयता , संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ मज़बूत करने पर जोर।
IMF 16वीं कोटा समीक्षा की वृद्धि को शीघ्र लागू करने और 17वीं समीक्षा में सार्थक समायोजन की माँग।
एकपक्षीय टैरिफ का विरोध; चीन द्वारा 53 अफ्रीकी देशों के लिए शून्य-टैरिफ उपायों की सराहना।
मध्य पूर्व तनाव और परमाणु जोखिम पर चिंता; क्यूबा पर एकपक्षीय नाकाबंदी की निंदा।
वर्ष 2027 में चीन की ब्रिक्स अध्यक्षता और 19वीं नेता-स्तरीय बैठक को पूर्ण समर्थन।

ब्रिक्स देशों के नेताओं की 18वीं शिखर बैठक नई दिल्ली में संपन्न हुई, जिसमें नई दिल्ली घोषणापत्र जारी किया गया। इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ में पारस्परिक सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र, खुलेपन और समावेशिता की ब्रिक्स मूल भावना को फिर से रेखांकित किया गया। यह बैठक ऐसे समय में आई जब वैश्विक भू-राजनीति में तेज़ी से ध्रुवीकरण हो रहा है और विकासशील देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी आवाज़ को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

त्रि-आयामी सहयोग और विस्तारित ब्रिक्स ढाँचा

पिछले 20 वर्षों के सहयोग और सदस्य देशों के विस्तार के बाद, घोषणापत्र में राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक-व्यापारिक एवं वित्तीय, तथा सांस्कृतिक एवं मानविकी आदान-प्रदान के 'त्रि-आयामी' सहयोग ढाँचे को और मज़बूत बनाने पर विशेष ज़ोर दिया गया। घोषणापत्र में एक अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

वैश्विक शासन में सुधार के लिए परामर्श, सह-निर्माण और साझा लाभ के सिद्धांत को अपनाने की अपील की गई। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका की रक्षा करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों का पूर्ण रूप से पालन करने पर सहमति बनी।

वैश्विक दक्षिण और संयुक्त राष्ट्र सुधार

घोषणापत्र में बहुध्रुवीयता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लोकतंत्रीकरण को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई गई। वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की आवाज़ मज़बूत करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार के समर्थन को भी शामिल किया गया। अफ्रीकी देशों की 'एज़ुलविनी आम सहमति' और 'सिर्ते घोषणा' में व्यक्त वैध आकांक्षाओं को मान्यता दी गई — जो अफ्रीकी महाद्वीप को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट दिलाने की माँग से जुड़ी हैं।

अंतरराष्ट्रीय आर्थिक शासन और व्यापार

आर्थिक मोर्चे पर, घोषणापत्र में ब्रेटन वुड्स संस्थानों — यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक — में व्यापक सुधार की माँग की गई। IMF की 16वीं कोटा समीक्षा में तय कोटा वृद्धि को शीघ्र लागू करने और 17वीं कोटा समीक्षा में सार्थक समायोजन की योजना बनाने की अपील की गई।

विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार, बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की रक्षा और विवाद निपटान तंत्र को बहाल करने के लिए भी दृढ़ समर्थन जताया गया। घोषणापत्र में एकपक्षीय टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों का स्पष्ट विरोध किया गया। गौरतलब है कि चीन द्वारा 53 अफ्रीकी देशों के लिए लागू किए गए शून्य-टैरिफ उपायों की विशेष रूप से सराहना की गई।

मध्य पूर्व तनाव, परमाणु जोखिम और क्यूबा

घोषणापत्र में मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। सभी पक्षों से विवादों का राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान तलाशने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने की अपील की गई। वैश्विक सैन्य खर्च में तेज़ बढ़ोतरी और बढ़ते परमाणु जोखिम पर चिंता जताते हुए निरस्त्रीकरण एवं परमाणु अप्रसार व्यवस्था को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही, क्यूबा पर एकपक्षीय नाकाबंदी की कड़ी निंदा की गई।

सतत विकास, AI और 2027 में चीन की अध्यक्षता

घोषणापत्र में 2030 एजेंडा को लागू करने के साथ-साथ स्वास्थ्य, ऊर्जा संक्रमण, नई औद्योगिक क्रांति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के दूसरे 'स्वर्णिम दशक' की शुरुआत का स्वागत करते हुए उसके विस्तार का समर्थन किया गया। ब्रिक्स औद्योगिक क्षमता केंद्र, लघु एवं मध्यम उद्यम मंच और व्यावसायिक शिक्षा गठबंधन जैसे मंचों की भूमिका की भी सराहना की गई।

अंत में, वर्ष 2027 में चीन की ब्रिक्स अध्यक्षता और चीन में 19वीं नेता-स्तरीय बैठक आयोजित करने का पूर्ण समर्थन व्यक्त किया गया। नई दिल्ली घोषणापत्र ब्रिक्स के विस्तारित स्वरूप में पहली बड़ी परिणाम-दस्तावेज़ों में से एक है, और आने वाले वर्षों में यह समूह वैश्विक बहुपक्षवाद को किस दिशा में ले जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

UN सुधार, WTO की रक्षा — लेकिन असली सवाल यह है कि ब्रिक्स इन प्रतिबद्धताओं को ठोस परिणामों में कैसे बदलेगा। चीन द्वारा 53 अफ्रीकी देशों के लिए शून्य-टैरिफ की सराहना और एकपक्षीय टैरिफ का विरोध — ये दोनों स्थितियाँ अमेरिकी व्यापार नीति पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी हैं, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है। IMF कोटा सुधार और WTO विवाद तंत्र की बहाली की माँग दशकों पुरानी है — ब्रिक्स घोषणापत्र इन्हें दोहराने से आगे कितना जाएगा, यही इसकी वास्तविक कसौटी होगी।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स नेताओं की 18वीं बैठक कहाँ और कब हुई?
ब्रिक्स नेताओं की 18वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई और इस अवसर पर नई दिल्ली घोषणापत्र जारी किया गया। इस बैठक में ब्रिक्स के विस्तारित सदस्य देशों के नेताओं ने भाग लिया।
नई दिल्ली घोषणापत्र में मुख्य प्रतिबद्धताएँ क्या हैं?
घोषणापत्र में बहुध्रुवीयता, संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका की रक्षा, UN सुरक्षा परिषद सुधार, ब्रेटन वुड्स संस्थानों में सुधार, WTO विवाद निपटान तंत्र की बहाली और एकपक्षीय टैरिफ का विरोध शामिल है। साथ ही 2030 एजेंडा, AI, ऊर्जा संक्रमण और डिजिटल कनेक्टिविटी में सहयोग पर जोर दिया गया।
ब्रिक्स में IMF कोटा सुधार की माँग क्यों की गई?
घोषणापत्र में IMF की 16वीं कोटा समीक्षा में तय वृद्धि को शीघ्र लागू करने और 17वीं समीक्षा में सार्थक समायोजन की माँग इसलिए की गई ताकि उभरते बाज़ारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का IMF में प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सके। यह वैश्विक दक्षिण की दीर्घकालिक माँग रही है।
अगली ब्रिक्स शिखर बैठक कहाँ और कब होगी?
वर्ष 2027 में चीन ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा और नेताओं की 19वीं बैठक चीन में आयोजित की जाएगी। नई दिल्ली घोषणापत्र में इसके लिए पूर्ण समर्थन व्यक्त किया गया।
ब्रिक्स ने मध्य पूर्व तनाव और परमाणु जोखिम पर क्या कहा?
घोषणापत्र में मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की गई। वैश्विक सैन्य खर्च में तेज़ी से बढ़ोतरी और परमाणु जोखिम बढ़ने पर भी चिंता जताई गई और निरस्त्रीकरण व्यवस्था को मज़बूत करने पर बल दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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