ब्रिक्स वैश्विक मंच पर निर्णायक भूमिका निभा सकता है: यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने 12 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि ब्रिक्स समूह वैश्विक आबादी और जीडीपी के विशाल हिस्से का प्रतिनिधित्व करने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका निभाने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने वित्तीय-व्यापारिक असमानताओं को समाप्त करने और आतंकवाद जैसी साझा चुनौतियों से मिलकर लड़ने के लिए बहुपक्षीय सहयोग को अपरिहार्य बताया। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ब्रिक्स की सदस्य संख्या 11 प्लस 10 तक पहुँच चुकी है और समूह की वैश्विक प्रासंगिकता पर बहस तेज़ हो गई है।
ग्लोबल साउथ के हितों और वित्तीय सुधार पर ज़ोर
दुजारिक ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों के हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में व्यापक सुधार ज़रूरी है। उनका तर्क था कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था को इस तरह पुनर्गठित किया जाना चाहिए कि वह किसी विशेष देश-समूह की ओर न झुके और सभी राष्ट्रों को समान अवसर मिलें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यूएन महासचिव 'गहन बहुपक्षवाद' के प्रबल समर्थक हैं और चाहते हैं कि क्षेत्रीय समूह आपसी तनावों को कम करने के लिए सकारात्मक समझौतों की दिशा में आगे बढ़ें।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता पर सकारात्मक टिप्पणी
स्टीफन दुजारिक ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को 'काफ़ी सकारात्मक' बताया। उनके अनुसार, भारत ने इस दौरान विभिन्न पक्षों के बीच पुल बनाने और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। गौरतलब है कि ब्रिक्स का नई दिल्ली शिखर सम्मेलन समूह के विस्तार के लिहाज़ से ऐतिहासिक रहा था, जिसमें कई नए साझेदार देश जोड़े गए थे।
आतंकवाद पर दोहरे मापदंड अस्वीकार्य
प्रवक्ता ने आतंकवाद को एक वैश्विक ख़तरा बताते हुए कहा कि इससे लड़ने में किसी भी तरह का दोहरा मापदंड अपनाना अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, 'आतंकवाद का असर दुनिया के हर देश पर पड़ता है, इसलिए सभी को मिलजुलकर इससे लड़ना होगा।' यूएन के पास इसके लिए कई संस्थाएँ और कार्यक्रम हैं जो सदस्य देशों को सहायता प्रदान करते हैं।
चीन की आगामी अध्यक्षता और भविष्य की दिशा
पीपुल्स डेली के अंतरराष्ट्रीय समाचार विभाग के संपादक मेंग शियांगलिन ने कहा कि ब्रिक्स अब एक 'बड़ा परिवार' बन चुका है और जनवरी से चीन की अध्यक्षता शुरू होगी। उन्होंने नई दिल्ली शिखर सम्मेलन की अपनी यादों को 'शानदार' बताया, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि माहौल अत्यंत गतिशील है — 'घोषणापत्र एक बात है और असली फ़ैसलों का क्रियान्वयन दूसरा पहलू।' उन्होंने दीर्घकालिक रणनीतिक सोच की ज़रूरत पर बल दिया।
यूएन सुधार और समुद्री सुरक्षा पर पीएम मोदी की अपील
विंग कमांडर प्रफुल बख्शी (रिटायर्ड) ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएन सुधार संबंधी बयान का विश्लेषण करते हुए कहा कि मोदी ने सबसे छोटे देश तक प्रतिनिधित्व पहुँचाने और सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को नया स्वरूप देना 'बहुत बड़ा काम है' और यह रातों-रात नहीं होगा, लेकिन इस मुद्दे को ब्रिक्स मंच पर उठाना एक सार्थक शुरुआत है।
समुद्री मार्गों की सुरक्षा और सप्लाई चेन को खुला रखने की मोदी की अपील पर बख्शी ने कहा कि हॉर्मुज़ स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से दुनिया का 25 से 30 फ़ीसदी तेल और 60 फ़ीसदी वैश्विक व्यापार गुज़रता है। दक्षिण-पूर्व एशिया और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाएँ पश्चिमी देशों से व्यापारिक संपर्क के बिना टिक नहीं सकतीं, इसलिए इन जलमार्गों की निर्बाध सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आने वाले समय में चीन की अध्यक्षता में ब्रिक्स का एजेंडा किस दिशा में जाता है और यूएन सुधार तथा आतंकवाद जैसे मुद्दों पर कितनी ठोस प्रगति होती है — यह वैश्विक बहुपक्षवाद के भविष्य के लिए निर्णायक होगा।