ब्रिक्स बैठक में जयशंकर का आह्वान: 'सहयोग, संवाद और सुधार अब नहीं टाले जा सकते'

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ब्रिक्स बैठक में जयशंकर का आह्वान: 'सहयोग, संवाद और सुधार अब नहीं टाले जा सकते'

सारांश

नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर ने तीन-सूत्री संदेश दिया — सहयोग, संवाद और सुधार अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता हैं। भारत की अध्यक्षता में यह पहली मंत्रिस्तरीय बैठक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के एजेंडे की नींव रख रही है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 15 मई को नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में 'वैश्विक शासन सुधार' सत्र की अध्यक्षता की।
जयशंकर ने कहा कि UN सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी — दोनों श्रेणियों का विस्तार किए बिना संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता सीमित रहेगी।
बहुपक्षीय विकास बैंकों (MDB) को अधिक जवाबदेह बनाने और जलवायु व विकास वित्त तक पहुँच सुलभ करने की माँग रखी।
WTO -केंद्रित, नियम-आधारित और समावेशी व्यापार प्रणाली की वकालत; गैर-बाज़ार प्रथाओं और आपूर्ति श्रृंखला केंद्रीकरण पर चिंता जताई।
यह भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की पहली प्रमुख मंत्रिस्तरीय बैठक है, जो इस वर्ष होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के एजेंडे की दिशा तय करेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर कहा कि ब्रिक्स 'ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आवाज देने का महत्वपूर्ण मंच' है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार, 15 मई को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में स्पष्ट कहा कि आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक परस्पर जुड़ी, जटिल और बहुध्रुवीय हो चुकी है, और इस नई वास्तविकता के अनुरूप वैश्विक व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय एवं सुधारित बहुपक्षवाद की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने 'वैश्विक शासन और बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार' विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता करते हुए यह विचार रखे।

संयुक्त राष्ट्र सुधार पर जयशंकर का रुख

जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता तब तक सीमित रहेगी, जब तक सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी — दोनों श्रेणियों का विस्तार नहीं किया जाता। यह भारत का वह पुराना और सुसंगत रुख है जिसे वह विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोहराता रहा है। गौरतलब है कि भारत दशकों से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का दावेदार रहा है।

वित्तीय ढाँचे और व्यापार प्रणाली में सुधार की माँग

विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढाँचे में आमूल सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बहुपक्षीय विकास बैंकों (एमडीबी) को अधिक मजबूत, जवाबदेह और सक्षम बनाया जाना चाहिए। साथ ही विकास और जलवायु वित्त तक पहुँच सुलभ करना भी अनिवार्य है।

उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को केंद्र में रखते हुए नियम-आधारित, निष्पक्ष, खुली और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली की पुरज़ोर वकालत की। इसके साथ ही उन्होंने गैर-बाजार प्रथाओं, आपूर्ति श्रृंखलाओं के केंद्रीकरण और बाज़ार पहुँच में बढ़ती अनिश्चितता जैसी चुनौतियों को भी रेखांकित किया।

जयशंकर का मूल संदेश

बैठक में विदेश मंत्री ने कहा, 'आज के दौर का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है — सहयोग आवश्यक है, संवाद जरूरी है और सुधार अब टाले नहीं जा सकते।' यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव, भू-राजनीतिक संघर्ष और जलवायु संकट एक साथ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की साख को चुनौती दे रहे हैं।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता और शिखर सम्मेलन की तैयारी

दो दिवसीय यह बैठक शुक्रवार को संपन्न हुई। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत यह पहली प्रमुख मंत्रिस्तरीय बैठक है, जिसे इस वर्ष प्रस्तावित ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के एजेंडे की रूपरेखा तय करने की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।

इससे एक दिन पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। इस अवसर पर उन्होंने एक्स पर लिखा, 'ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आवाज देने का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है।'

मोदी ने यह भी कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स बहुपक्षवाद को मजबूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने, आर्थिक लचीलापन बढ़ाने और अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था बनाने के लिए मिलकर काम करेगा। आने वाले महीनों में शिखर सम्मेलन की तैयारियाँ इन्हीं प्राथमिकताओं के इर्द-गिर्द आकार लेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ब्रिक्स — जो अब एक विस्तारित और आंतरिक रूप से विविध समूह है — इन सुधारों पर सहमति की बाधा कैसे पार करेगा। UN सुरक्षा परिषद विस्तार की माँग दशकों पुरानी है और ब्रिक्स के भीतर ही चीन जैसे स्थायी सदस्य इस पर सहमत नहीं हैं। MDB सुधार और WTO की केंद्रीयता पर भी समूह के सदस्यों के बीच अलग-अलग हित हैं। भारत की अध्यक्षता की असली परीक्षा यह होगी कि क्या वह इन विरोधाभासों को पाटकर शिखर सम्मेलन तक कोई ठोस साझा दस्तावेज़ तैयार कर पाती है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर ने क्या कहा?
जयशंकर ने कहा कि सहयोग आवश्यक है, संवाद जरूरी है और सुधार अब टाले नहीं जा सकते। उन्होंने UN सुरक्षा परिषद विस्तार, MDB सुधार और WTO-केंद्रित व्यापार प्रणाली की वकालत की।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में यह बैठक क्यों महत्वपूर्ण है?
यह भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की पहली प्रमुख मंत्रिस्तरीय बैठक है। इसे इस वर्ष होने वाले ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के एजेंडे की रूपरेखा तय करने के लिहाज़ से अहम माना जा रहा है।
जयशंकर ने UN सुरक्षा परिषद पर क्या रुख रखा?
उन्होंने कहा कि जब तक सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी — दोनों श्रेणियों का विस्तार नहीं होता, तब तक संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता सीमित रहेगी। यह भारत का सुसंगत दीर्घकालिक रुख है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आवाज देने का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में बहुपक्षवाद को मजबूत करने और अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था बनाने पर ध्यान केंद्रित रहेगा।
बहुपक्षीय विकास बैंकों (MDB) पर जयशंकर की क्या माँग थी?
जयशंकर ने कहा कि MDB को अधिक मजबूत, जवाबदेह और सक्षम बनाया जाना चाहिए और विकास तथा जलवायु वित्त तक पहुँच को सुलभ किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे वैश्विक वित्तीय ढाँचे के व्यापक सुधार का हिस्सा बताया।
राष्ट्र प्रेस
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