बिहार में 'नो व्हीकल डे': मोदी की फ्यूल सेविंग अपील पर मंत्री पैदल, ई-रिक्शा से पहुंचे दफ्तर

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बिहार में 'नो व्हीकल डे': मोदी की फ्यूल सेविंग अपील पर मंत्री पैदल, ई-रिक्शा से पहुंचे दफ्तर

सारांश

PM मोदी की फ्यूल सेविंग अपील पर बिहार ने प्रतीकात्मक जवाब दिया — मुख्यमंत्री 150 मीटर पैदल चले, मंत्री ई-रिक्शा से दफ्तर पहुंचे और जिला अधिकारी साइकिल पर निकले। वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच यह पहल संरक्षण और शासन की बहस को नया आयाम देती है।

मुख्य बातें

15 मई 2026 को बिहार में 'नो व्हीकल डे' मनाया गया, जो PM नरेंद्र मोदी की फ्यूल सेविंग अपील के जवाब में था।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में मुख्यमंत्री आवास से सचिवालय तक 150 मीटर पैदल चले।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने एक किलोमीटर पैदल चलकर और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने ई-रिक्शा से दफ्तर पहुंचकर भागीदारी दर्ज की।
खगड़िया और गया सहित कई जिलों के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक साइकिल से कार्यालय पहुंचे।
जेजेडी प्रमुख तेज प्रताप यादव ने ईंधन की बढ़ती कीमतों और बड़े काफिलों के उपयोग पर केंद्र व राज्य सरकारों की आलोचना की।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित राज्य के कई वरिष्ठ मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने 15 मई 2026 को 'नो व्हीकल डे' मनाया — यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल और डीजल की खपत घटाने की अपील के जवाब में उठाया गया। पटना से लेकर गया और खगड़िया तक, नेता और अफसर पैदल, साइकिल और इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा से कार्यालय पहुंचे।

मुख्यमंत्री और मंत्रियों की पहल

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास से सचिवालय तक लगभग 150 मीटर पैदल चलकर इस अभियान की शुरुआत की। उनके साथ मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी और सुरक्षाकर्मी भी थे। गौरतलब है कि चौधरी पहले ही पटना और आसपास की आधिकारिक यात्राओं में अपने काफिले का आकार कम कर चुके हैं।

पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने अपने आधिकारिक आवास से सचिवालय तक लगभग एक किलोमीटर पैदल तय किया। उन्होंने पहले ही घोषणा की थी कि वे अमेरिका-ईरान संघर्ष से उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच ईंधन संरक्षण के प्रतीक के रूप में यह कदम उठाएंगे।

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा से कार्यालय पहुंचकर पर्यावरण-अनुकूल विकल्प चुना। तिवारी ने कहा, 'हमने ईंधन बचाने का संदेश देने के लिए ई-रिक्शा का इस्तेमाल किया है। यह अधिकारियों के लिए भी ईंधन बचाने का संदेश है। वैश्विक संकट को देखते हुए, ईंधन बचाना हमें सुरक्षित रहने में मदद करेगा।'

प्रशासनिक स्तर पर भागीदारी

इस पहल में केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन भी शामिल हुआ। कई जिलों के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक साइकिल से अपने कार्यालय पहुंचे। खगड़िया के जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य न केवल ईंधन बचाना है, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देना भी है। गया में सुरक्षाकर्मियों को भी साइकिलों पर आवागमन करते देखा गया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आलोचना

इन घटनाक्रमों पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया भी आई। गया में जेजेडी प्रमुख तेज प्रताप यादव ने ईंधन की बढ़ती कीमतों और बड़े राजनीतिक काफिलों के निरंतर उपयोग को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री काफिलों को कम करने की वकालत कर रहे हैं, तो बिहार सरकार को इसे और अधिक सख्ती से लागू करना चाहिए।

आलोचकों का कहना है कि यह पहल प्रतीकात्मक तो है, लेकिन ईंधन की कीमतों पर दीर्घकालिक नीतिगत कदमों की जरूरत इससे कहीं अधिक है।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर हैं और ईंधन की कीमतें आम जनता के लिए प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई हैं। बिहार का 'नो व्हीकल डे' संरक्षण, शासन और बढ़ती लागतों पर चल रही राष्ट्रीय बहस में एक प्रत्यक्ष आयाम जोड़ता है। यह देखना होगा कि क्या यह एकदिवसीय प्रतीकात्मक पहल नीतिगत बदलाव की दिशा में ठोस कदमों में तब्दील होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब मंत्रियों का एक दिन पैदल चलना या ई-रिक्शा लेना सुर्खियां तो बनाता है, लेकिन ईंधन की कीमतों पर दीर्घकालिक राहत का विकल्प नहीं है। तेज प्रताप यादव की आलोचना — कि काफिले अभी भी चल रहे हैं — इस विरोधाभास को रेखांकित करती है। असली सवाल यह है कि क्या यह एकदिवसीय इशारा ईंधन सब्सिडी, सार्वजनिक परिवहन निवेश या काफिले-नीति सुधार जैसे ठोस कदमों में बदलेगा — या अगले संकट तक भुला दिया जाएगा।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में 'नो व्हीकल डे' क्यों मनाया गया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल और डीजल की खपत घटाने की अपील के जवाब में बिहार सरकार ने 15 मई 2026 को 'नो व्हीकल डे' मनाया। अमेरिका-ईरान संघर्ष से उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच ईंधन संरक्षण को प्रोत्साहित करना इसका मुख्य उद्देश्य था।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 'नो व्हीकल डे' पर क्या किया?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास से सचिवालय तक लगभग 150 मीटर पैदल चलकर इस पहल में भाग लिया। उनके साथ सचिवालय के अधिकारी और सुरक्षाकर्मी भी थे।
बिहार के किन मंत्रियों ने फ्यूल सेविंग पहल में हिस्सा लिया?
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने अपने आवास से सचिवालय तक लगभग एक किलोमीटर पैदल चले, जबकि शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा से कार्यालय पहुंचे। खगड़िया और गया सहित कई जिलों के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक भी साइकिल से दफ्तर पहुंचे।
तेज प्रताप यादव ने इस पहल पर क्या कहा?
जेजेडी प्रमुख तेज प्रताप यादव ने गया में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के बावजूद बड़े राजनीतिक काफिले जारी हैं और सरकार को इस अभियान को और अधिक सख्ती से लागू करना चाहिए।
क्या यह पहल नियमित नीति बनेगी या एकदिवसीय प्रतीकात्मक कदम है?
अभी तक बिहार सरकार ने इसे नियमित नीति बनाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। आलोचकों का कहना है कि ईंधन संरक्षण के लिए दीर्घकालिक नीतिगत बदलाव — जैसे सार्वजनिक परिवहन में निवेश और काफिले-नीति सुधार — की जरूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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