फडणवीस बाइक से विधानसभा पहुंचे, मंत्रियों-अधिकारियों को ईंधन बचत के सख्त निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील पर अमल करते हुए मोटरसाइकिल से मुंबई विधानसभा तक का सफर तय किया। उनके काफिले में गाड़ियों की संख्या भी उल्लेखनीय रूप से घटाई गई। इस पहल के तहत मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को ईंधन खपत कम करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
मुख्य निर्देश और दिशानिर्देश
महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल बैठक में कई अहम निर्देश दिए। काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने, गैरज़रूरी वाहनों को हटाने और पीए तथा अन्य अधिकारियों को मंत्री की गाड़ी में ही स्थान देने का आदेश दिया गया है।
इसके अलावा एयरपोर्ट पर स्वागत के लिए वाहनों की तैनाती पर रोक लगाई गई है। सार्वजनिक कार्यक्रमों की संख्या घटाने, बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए करने और अधिकारियों को अनावश्यक रूप से मंत्रालय न बुलाने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।
इलेक्ट्रिक व्हीकल और सोलर ऊर्जा पर ज़ोर
बावनकुले ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की सलाह भी दी है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी आधिकारिक कामकाज के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने का निर्णय लिया है। बावनकुले ने कहा, 'हम सभी ने ईंधन बचत का संदेश दिया है। बचत से देश चलता है और विदेश में पैसा भेजने से बचना चाहिए।'
मुख्यमंत्री फडणवीस का बयान
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस अवसर पर कहा, 'देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी को आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है। इस संदर्भ में हम सभी को यथासंभव पेट्रोल, डीजल और अन्य संसाधनों की खपत कम करने का प्रयास करना चाहिए। हमने पहले ही अपने काफिले का आकार कम कर दिया है। मैं भी इस निर्णय का समर्थन करने के लिए मोटरसाइकिल पर यहां आया हूं, ताकि यह संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।'
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्ष ने इस पूरी कवायद को 'नाटक' करार दिया है। इस पर बावनकुले ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री — तीनों ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाई है, जो इस अभियान की गंभीरता को दर्शाता है। आलोचकों का कहना है कि ऐसी प्रतीकात्मक पहलों का दीर्घकालिक नीतिगत असर सीमित होता है, जब तक संस्थागत बदलाव न हों।
आगे क्या होगा
यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय संसाधनों के मितव्ययी उपयोग पर ज़ोर दिया है। महाराष्ट्र सरकार के इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना अब संबंधित विभागों की ज़िम्मेदारी होगी। आने वाले हफ्तों में इन दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा किए जाने की संभावना है।