जिउझांग 4.0: चीनी वैज्ञानिकों का क्वांटम कंप्यूटिंग में विश्व रिकॉर्ड, सुपरकंप्यूटर से 10⁵⁴ गुना तेज़
सारांश
मुख्य बातें
चीन के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (USTC) के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने 'जिउझांग 4.0' नामक एक प्रोग्रामेबल फोटोनिक क्वांटम कंप्यूटिंग प्रोटोटाइप विकसित किया है, जिसने ऑप्टिकल क्वांटम सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। 14 मई 2025 को प्रतिष्ठित जर्नल नेचर में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यह प्रोटोटाइप गॉसियन बोसोन सैंपलिंग समस्या को दुनिया के सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर की तुलना में 10 की घात 54 गुना से अधिक गति से हल करने में सक्षम है।
मुख्य तकनीकी उपलब्धि
अध्ययन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने 3,050 फोटॉनों तक की क्वांटम अवस्थाओं में परिवर्तन और उनका पता लगाने में सफलता पाई। यह इस श्रृंखला के पिछले संस्करण 'जिउझांग 3.0' में हासिल किए गए 255 फोटॉनों की तुलना में एक असाधारण छलांग है। फोटॉनों की संख्या में यह वृद्धि क्वांटम प्रणाली की जटिलता और क्षमता दोनों में नाटकीय सुधार का संकेत देती है।
जिउझांग श्रृंखला की तकनीक कैसे काम करती है
क्वांटम कंप्यूटिंग की वर्तमान मुख्यधारा की विधियों में सुपरकंडक्टिंग, आयन ट्रैप, फोटोनिक और न्यूट्रल एटम सिस्टम शामिल हैं। 'जिउझांग' श्रृंखला के प्रोटोटाइप फोटोनिक पद्धति पर आधारित हैं — अर्थात ये फोटॉनों का उपयोग करके क्वांटम बिट्स (क्यूबिट्स) को एन्कोड करते हैं। इन फोटॉनों के परिवर्तन और मापन के ज़रिए क्वांटम गणनाएँ संपन्न की जाती हैं, जो इसे पारंपरिक सुपरकंडक्टिंग क्वांटम कंप्यूटरों से अलग करता है।
वैश्विक क्वांटम दौड़ में महत्व
यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब अमेरिका, यूरोप और भारत समेत कई देश क्वांटम श्रेष्ठता हासिल करने की होड़ में हैं। गौरतलब है कि Google ने 2019 में अपने सुपरकंडक्टिंग प्रोसेसर 'Sycamore' के ज़रिए क्वांटम श्रेष्ठता का दावा किया था, और IBM भी इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। USTC की यह नई उपलब्धि फोटोनिक क्वांटम कंप्यूटिंग को वैश्विक दौड़ में एक प्रमुख प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित करती है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, गॉसियन बोसोन सैंपलिंग जैसी समस्याओं को हल करने की क्षमता दवा अनुसंधान, सामग्री विज्ञान, वित्तीय मॉडलिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। हालाँकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्वीकार किया है कि व्यावसायिक उपयोग के लिए सार्वभौमिक प्रोग्रामेबल क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने की दिशा में अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।