उत्तराखंड CM धामी ने काफिला आधा किया, PM मोदी की ऊर्जा बचत अपील को बताया 'राष्ट्रहित का संकल्प'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 13 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा संरक्षण अपील पर अमल करते हुए अपना सरकारी काफिला आधा कर दिया। उन्होंने इस पहल को केवल प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि 'राष्ट्रहित का संकल्प' करार दिया। धामी उन भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं जिन्होंने पीएम की अपील पर तत्काल कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री धामी का फैसला
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सरकारी वाहन फ्लीट को आधा करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की यह अपील केवल ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर, सक्षम और जिम्मेदार भारत के निर्माण का सामूहिक संकल्प है। उनके अनुसार, जब देशहित सर्वोपरि हो, तब प्रत्येक नागरिक और जनप्रतिनिधि का दायित्व है कि वह संसाधनों के संरक्षण में योगदान दे।
मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश
मुख्यमंत्री धामी ने सभी मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अनावश्यक वाहनों के उपयोग से बचें और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें। उन्होंने ऊर्जा संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उत्तराखंड सरकार इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों से भी जोड़ रही है।
PM मोदी ने खुद दिखाई राह
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इस अपील पर अमल करते हुए कैबिनेट बैठक में मात्र चार गाड़ियों के काफिले के साथ पहुँचे। उन्होंने अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने पर भी जोर दिया। इससे पहले हैदराबाद के सिकंदराबाद परेड ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने देशवासियों से अगले एक साल तक सोने की खरीद कम करने की अपील की थी, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके।
ईंधन बचत के सुझाव
पीएम मोदी ने ईंधन की खपत कम करने के लिए कई सुझाव दिए थे। उन्होंने कहा था कि जहाँ संभव हो, वहाँ मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग किया जाए। उनकी इस अपील पर भाजपा शासित राज्यों के अनेक मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने काफिले आधे कर दिए हैं, जो इस पहल को एक व्यापक राजनीतिक संदेश का रूप दे रहा है।
आगे की राह
उत्तराखंड सरकार ने संकेत दिया है कि वह इस ऊर्जा संरक्षण अभियान को जमीनी स्तर तक ले जाने के लिए ठोस कदम उठाएगी। यदि अन्य राज्य भी इसी तर्ज पर आगे बढ़ते हैं, तो यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर संसाधन बचत का एक सार्थक मॉडल बन सकती है।