प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार में बेटियों की मासूम आंखें, अखिलेश ने थामा परिवार का दामन
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के भैंसाकुंड घाट पर गुरुवार, 14 मई को पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ। इस विदाई की वेला में परिवार के दर्द की जो तस्वीर उभरी, वह वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति के मन पर अमिट छाप छोड़ गई। चिता की लपटों के बीच दो मासूम बेटियों की खामोश आँखें हर शब्द से भारी साबित हुईं।
मुख्य घटनाक्रम
श्मशान घाट पर मंत्रोच्चार के बीच चिता धीरे-धीरे प्रज्वलित हो रही थी और चारों ओर गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था। प्रतीक यादव की दोनों बेटियाँ अपने पिता को अंतिम विदाई देते हुए मौन खड़ी थीं। बड़ी बेटी स्वयं को संयत रखने का प्रयास कर रही थी, जबकि छोटी बच्ची बार-बार परिजनों की ओर देख रही थी — मानो उसे अब भी विश्वास न हो कि उसके पिता अब लौटकर नहीं आएँगे।
छोटी बच्ची की आँखों में बेचैनी, भय और बिछड़ने की पीड़ा स्पष्ट दिख रही थी। घाट पर उपस्थित लोग उस मासूम चेहरे को देखकर अपने आँसू नहीं रोक पाए।
अखिलेश यादव का पारिवारिक रूप
इसी भावुक माहौल में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बच्चियों के पास बैठे नज़र आए। राजनीतिक मंचों पर सदा संयमित दिखने वाले अखिलेश उस क्षण परिवार के एक जिम्मेदार मुखिया की भूमिका में थे। उन्होंने छोटी बच्ची को चॉकलेट देकर उसे सहलाने की कोशिश की और उसे स्नेह से अपने पास बैठाए रखा।
कुछ पलों के लिए बच्ची उनकी ओर देखने लगी, किंतु उसकी आँखों में पिता को खो देने का खालीपन साफ झलक रहा था।
घाट पर मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया
घाट पर उपस्थित लोगों की निगाहें उसी दृश्य पर टिकी रहीं। वहाँ उपस्थित एक राजनेता ने कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन बड़ा दिल रखना सबके वश की बात नहीं। उनके अनुसार यह गुण स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव से अखिलेश यादव में आया है, इसीलिए वह ऐसे दुखद क्षण में सब कुछ परे रखकर परिवार को संभाल रहे थे।
अनेक लोगों की आँखों से आँसू अनायास बह निकले। किसी ने वहाँ राजनीति नहीं देखी, सत्ता नहीं देखी — सबकी दृष्टि उन दो बेटियों पर थी जो शायद पहली बार जीवन का सबसे बड़ा विछोह महसूस कर रही थीं।
आगे क्या
यादव परिवार पर दुखों का यह पल ऐसे समय आया है जब समाजवादी राजनीति पहले से कई चुनौतियों से जूझ रही है। परिवार के सदस्यों और पार्टी नेताओं ने एकजुट होकर इस कठिन घड़ी का सामना किया। प्रतीक यादव की बेटियों का भविष्य और परिवार की एकता अब आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगी।