प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार में बेटियों की मासूम आंखें बनीं भावनाओं की भाषा

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प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार में बेटियों की मासूम आंखें बनीं भावनाओं की भाषा

सारांश

लखनऊ के भैंसाकुंड घाट पर प्रतीक यादव की चिता के सामने उनकी दो मासूम बेटियों की आंखों ने जो कहा, वह कोई शब्द नहीं कह सकता था। अखिलेश यादव उस पल राजनेता नहीं, परिवार के मुखिया बनकर बच्चियों के पास बैठे रहे।

मुख्य बातें

प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार 14 मई को लखनऊ के भैंसाकुंड घाट पर संपन्न हुआ।
प्रतीक यादव पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र थे।
उनकी दोनों बेटियां अंतिम संस्कार में उपस्थित थीं; छोटी बच्ची की आंखों में दर्द और बेचैनी स्पष्ट दिखी।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बच्चियों के पास बैठकर उन्हें संभाला और छोटी बच्ची को चॉकलेट दी।
घाट पर उपस्थित लोग और राजनेता उस भावुक दृश्य को देखकर आंसू रोक नहीं पाए।

लखनऊ के भैंसाकुंड घाट पर 14 मई 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार के दौरान एक ऐसा दृश्य उभरा, जिसने घाट पर उपस्थित हर व्यक्ति को भीतर तक हिला दिया। चिता की लपटों के बीच दो मासूम बच्चियों की आंखों में उतरा दर्द किसी भी शब्द से कहीं अधिक भारी था।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्रोच्चार और सन्नाटे के बीच प्रतीक यादव की दोनों बेटियां अपने पिता को अंतिम बार जाते हुए देख रही थीं। बड़ी बेटी खुद को संभालने का प्रयास कर रही थी, जबकि छोटी बच्ची बार-बार परिजनों की ओर देख रही थी — जैसे उसे अब भी यह विश्वास न हो कि उसके पिता लौटकर उसे गोद में नहीं उठाएंगे। उस पल की खामोशी हर उपस्थित व्यक्ति के मन में एक अमिट छाप छोड़ गई।

अखिलेश यादव का पारिवारिक रूप

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव उस भावुक माहौल में राजनेता नहीं, बल्कि परिवार के बड़े सदस्य की भूमिका में नजर आए। वे बच्चियों के पास बैठे और छोटी बच्ची को चॉकलेट देकर उसे संभालने की कोशिश की। उन्होंने उससे प्यार से बातें कीं और उसे अपने पास बैठाए रखा। कुछ पलों के लिए बच्ची उनकी ओर देखने लगी, किंतु उसकी आंखों में पिता को खो देने का खालीपन स्पष्ट दिखता रहा।

घाट पर उपस्थित लोगों की प्रतिक्रिया

घाट पर मौजूद लोगों की निगाहें उन दोनों बच्चियों पर टिकी रहीं। उस क्षण किसी ने राजनीति नहीं देखी, किसी ने सत्ता नहीं देखी — सबके सामने बस दो बेटियां थीं, जो शायद पहली बार जीवन के सबसे बड़े विछोह से साक्षात्कार कर रही थीं। अनेक लोगों की आंखें अनायास ही भर आईं।

एक राजनेता की टिप्पणी

घाट पर उपस्थित एक राजनेता ने कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन बड़ा दिल रखना सबके बस की बात नहीं। उन्होंने कहा कि यह गुण दिवंगत मुलायम सिंह यादव से उनके पुत्र अखिलेश यादव में आया है, यही कारण है कि वे इस दुखद क्षण में सब कुछ भूलकर परिवार को एक मुखिया की तरह संभाल रहे थे।

आगे का दृश्य

चिता की आग धीरे-धीरे शांत हुई, लेकिन उन दो मासूम आंखों का दर्द वहां उपस्थित हर व्यक्ति के मन में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। यह अंतिम संस्कार केवल एक परिवार का निजी दुख नहीं रहा — यह उस मानवीय संवेदना की याद बन गया जो राजनीति की परिधि से परे होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतिम संस्कार में कौन-सा भावुक दृश्य सामने आया?
प्रतीक यादव की दोनों बेटियां चिता के सामने खड़ी थीं। छोटी बच्ची बार-बार परिजनों की ओर देख रही थी, जैसे उसे यकीन न हो कि उसके पिता अब नहीं रहे। यह दृश्य घाट पर मौजूद सभी लोगों को भावुक कर गया।
अखिलेश यादव ने उस मौके पर क्या किया?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बच्चियों के पास बैठे, छोटी बच्ची को चॉकलेट दी और उससे प्यार से बातें कीं। वे उस पल एक राजनेता नहीं, बल्कि परिवार के बड़े सदस्य की भूमिका में नजर आए।
अंतिम संस्कार कहां और कब हुआ?
प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार 14 मई को लखनऊ के भैंसाकुंड घाट पर हुआ। घाट पर परिजनों के अलावा अनेक राजनेता और समर्थक उपस्थित थे।
घाट पर उपस्थित लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?
घाट पर मौजूद लोग उन दोनों बच्चियों को देखकर खुद को संभाल नहीं पाए और अनेक की आंखों से अनायास आंसू बह निकले। एक राजनेता ने कहा कि अखिलेश यादव में यह बड़े दिल का गुण उनके पिता मुलायम सिंह यादव से आया है।
राष्ट्र प्रेस
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