प्रतीक यादव: 38 वर्ष की उम्र में निधन, मुलायम सिंह के बेटे ने राजनीति नहीं बिजनेस और फिटनेस को चुना
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के सिविल अस्पताल में बुधवार, 13 मई को प्रतीक यादव का निधन हो गया। वह मात्र 38 वर्ष के थे। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (SP) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के सौतेले बेटे प्रतीक के जाने से परिवार, मित्र और समर्थक गहरे शोक में हैं। प्रतीक यादव उस यादव परिवार से थे जो दशकों से उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र रहा है — फिर भी उन्होंने सक्रिय राजनीति से हमेशा दूरी बनाए रखी।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र थे। साधना गुप्ता की पहली शादी चंद्रप्रकाश गुप्ता से हुई थी, जिनसे प्रतीक का जन्म हुआ। बाद में मुलायम सिंह ने साधना गुप्ता के साथ अपने संबंध को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया, जिसके बाद प्रतीक भी चर्चा में आए। इस राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार का हिस्सा होने के बावजूद उन्होंने कभी विधानसभा, संसद या पार्टी संगठन में कोई भूमिका नहीं निभाई। वह राजनीतिक बयानबाज़ी और सार्वजनिक विवादों से स्वयं को हमेशा दूर रखते थे।
स्कूल की दोस्ती से शादी तक की प्रेम कहानी
प्रतीक यादव और अपर्णा यादव की पहली मुलाकात एक दोस्त की बर्थडे पार्टी में हुई थी। धीरे-धीरे ई-मेल के ज़रिए दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और रिश्ता गहरा होता गया। स्कूल के दिनों से शुरू हुई यह दोस्ती 8 साल की रिलेशनशिप में बदली और 2011 में दोनों ने विवाह किया। शादी के बाद दोनों की दो बेटियाँ हुईं। अपर्णा यादव राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और सामाजिक मुद्दों पर अपनी अलग पहचान रखती हैं।
शिक्षा, कारोबार और शौक
प्रतीक यादव ने यूनाइटेड किंगडम से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी और रीयल एस्टेट कारोबार से जुड़े हुए थे। उन्हें लग्जरी कारों का गहरा शौक था और उनके पास कई महँगी कारों का संग्रह था। इन सबके बावजूद वह सुर्खियों और लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते थे। लखनऊ में उन्होंने 'द फिटनेस प्लानेट' नाम से एक जिम स्थापित किया था, जो युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय था। फिटनेस के प्रति उनका जुनून सोशल मीडिया पर उनके वर्कआउट और लाइफस्टाइल से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो के ज़रिए स्पष्ट दिखता था।
पशु प्रेम और सामाजिक कार्य
फिटनेस और व्यवसाय के अतिरिक्त प्रतीक यादव पशु प्रेम के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने 'जीव आश्रय' नाम से एक संस्था स्थापित की थी, जो स्ट्रीट डॉग्स के रेस्क्यू, इलाज, भोजन और देखभाल का कार्य करती थी। लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में घायल और बेसहारा जानवरों की सहायता के लिए यह संस्था लगातार सक्रिय रहती थी। यह पहल उनके उस स्वभाव को दर्शाती थी जो राजनीतिक शोर से परे, ज़मीन से जुड़ा था।
शोक और विरासत
प्रतीक यादव की असमय मृत्यु ने यादव परिवार सहित उनके करीबी मित्रों और समर्थकों को गहरे शोक में डुबो दिया है। एक ऐसे परिवार में जहाँ राजनीति सबसे बड़ी पहचान रही, प्रतीक ने फिटनेस, कारोबार और सामाजिक सेवा के ज़रिए अपनी अलग छाप छोड़ी। उनकी विरासत 'जीव आश्रय' और 'द फिटनेस प्लानेट' के रूप में आगे जीवित रहेगी।