सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी 15% होने से ज्वेलरी शेयरों में 7% तक की गिरावट, MCX पर सोना ₹1.62 लाख पार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार द्वारा सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी (आयात शुल्क) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के बाद 13 मई 2026 को घरेलू ज्वेलरी शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, जिसमें कुछ शेयर 7 प्रतिशत तक लुढ़क गए। इस फैसले का असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी दिखा, जहाँ सोने का भाव 5.71 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹1,62,198 प्रति 10 ग्राम पर पहुँच गया।
किन शेयरों पर पड़ा सबसे ज़्यादा असर
स्काई गोल्ड एंड डायमंड का शेयर सुबह 11 बजे सबसे अधिक 7 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹442 पर कारोबार कर रहा था। कल्याण ज्वेलर्स का शेयर 5.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ ₹342 पर था, जबकि दक्षिण भारत के प्रमुख ज्वेलर थंगामयिल ज्वेलरी का शेयर 5.97 प्रतिशत टूटकर ₹3,451 पर आ गया।
पी एन गाडगिल ज्वैलर्स का शेयर 1.53 प्रतिशत की कमजोरी के साथ ₹618 पर था। टाइटन कंपनी का शेयर अपेक्षाकृत कम प्रभावित रहा और 0.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹4,034 पर कारोबार कर रहा था।
कितनी बढ़ी कस्टम ड्यूटी
केंद्र सरकार के इस फैसले के तहत सोने और चांदी पर आयात शुल्क (उपकर सहित) 6 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है। वहीं, प्लेटिनम पर आयात शुल्क 6.4 प्रतिशत से बढ़कर 15.4 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी एक बड़ा नीतिगत बदलाव है, जो सीधे तौर पर आयात की लागत को प्रभावित करती है।
सरकार का उद्देश्य क्या है
सरकारी सूत्रों ने बुधवार को बताया कि कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में यह वृद्धि विदेशी मुद्रा की बचत, चालू खाते के घाटे को कम करने और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती को बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सूत्रों के अनुसार इस कदम में व्यापक आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक आर्थिक सुदृढ़ता का भी पूरा ध्यान रखा गया है।
MCX पर सोना-चांदी में उछाल
कस्टम ड्यूटी बढ़ने के तुरंत बाद घरेलू कमोडिटी बाज़ार में कीमती धातुओं के भाव तेजी से चढ़े। MCX पर सोने का 5 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 5.71 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹1,62,198 पर था। चांदी का 3 जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 5.75 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹2,95,111 पर कारोबार कर रहा था। गौरतलब है कि सोने की कीमतों में यह उछाल उन उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डालेगा जो शादी-ब्याह के सीजन में आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ी हुई ड्यूटी के कारण सोने की माँग अल्पकाल में कमज़ोर पड़ सकती है, जिसका असर ज्वेलरी कंपनियों के मार्जिन और बिक्री पर दिखेगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता पहले से ही बनी हुई है और भारत का चालू खाता घाटा दबाव में है। आने वाले हफ्तों में इन कंपनियों की प्रबंधन टिप्पणियाँ और तिमाही अनुमानों में बदलाव बाज़ार की दिशा तय करेंगे।