सोनाली कुलकर्णी का नया पॉडकास्ट 'हाफ टिकट फुल नागरिक', बच्चों को देंगी निर्णय लेने का मंच

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सोनाली कुलकर्णी का नया पॉडकास्ट 'हाफ टिकट फुल नागरिक', बच्चों को देंगी निर्णय लेने का मंच

सारांश

सोनाली कुलकर्णी ने बाल-केंद्रित एक नया पॉडकास्ट शुरू किया है जो भारतीय परिवारों में बच्चों की भूमिका को पुनर्परिभाषित करता है। 'हाफ टिकट फुल नागरिक' में बच्चों को पारिवारिक, आर्थिक और सामाजिक निर्णयों में सक्रिय भागीदार बनाया जाएगा।

मुख्य बातें

सोनाली कुलकर्णी ने 13 मई को 'हाफ टिकट फुल नागरिक' पॉडकास्ट लॉन्च किया।
शो का उद्देश्य बच्चों को पारिवारिक निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना और उनकी आवाज़ को सार्वजनिक मंच देना है।
प्रत्येक एपिसोड वयस्क विशेषज्ञों (माता-पिता, शिक्षक, मनोवैज्ञानिक) की बातचीत से शुरू होता है, फिर बच्चों के साथ संवाद होता है।
कुलकर्णी के अनुसार, बच्चों को निर्णय से बाहर रखना मानसिक और भावनात्मक प्रभाव डाल सकता है।
पॉडकास्ट बाल-केंद्रित विकास और सामाजिक भागीदारी के अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।

मुंबई, 13 मई। मराठी सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी ने 'हाफ टिकट फुल नागरिक' नामक एक नया पॉडकास्ट शृंखला शुरू की है, जिसका उद्देश्य बाल-किशोर पीढ़ी की आवाज़ को सार्वजनिक मंच प्रदान करना और उनके विचारों को समाज के सामने प्रस्तुत करना है। यह पहल भारतीय पारिवारिक संरचना में बच्चों की भूमिका को पुनर्परिभाषित करने का एक सांस्कृतिक प्रयास है।

पॉडकास्ट की अवधारणा और संरचना

कुलकर्णी के अनुसार, इस शो का प्रत्येक एपिसोड एक संतुलित दृष्टिकोण के साथ शुरू होता है — माता-पिता, शिक्षक या मनोवैज्ञानिक जैसे वयस्क विशेषज्ञों की बातचीत से। इसके बाद मुख्य संवाद बच्चों के साथ होता है, जिन्हें शो में 'हाफ टिकट' (आधी नागरिकता) कहा जाता है। यह नामकरण उस क्रमिक यात्रा को दर्शाता है जिसमें बच्चे धीरे-धीरे 'पूर्ण नागरिक' बनने की ओर अग्रसर होते हैं।

कुलकर्णी का दृष्टिकोण और उद्देश्य

कुलकर्णी ने कहा कि बच्चों के पास दुनिया को देखने का एक अलग और मौलिक नज़रिया होता है। उन्होंने बताया, ''बच्चे बेहद रचनात्मक होते हैं और बिना किसी भय के अपनी बात रखते हैं। उनकी सोच में एक मासूमियत और ईमानदारी होती है, जो अक्सर वयस्कों में नहीं पाई जाती।'' उनके अनुसार, यह पॉडकास्ट उस परंपरागत प्रवृत्ति को चुनौती देता है जहाँ पारिवारिक, आर्थिक या यात्रा संबंधी निर्णयों में बच्चों की राय को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

बचपन की उपेक्षा और मानसिक प्रभाव

कुलकर्णी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बच्चों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखना, केवल उनकी उम्र के कारण, दीर्घकालीन मानसिक और भावनात्मक परिणाम दे सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में यह रवैया धीरे-धीरे बच्चों पर दबाव और भावनात्मक अनदेखी का कारण बन सकता है। गौरतलब है कि भारतीय पारिवारिक संरचना में बड़ों का निर्णय अक्सर अपरिवर्तनीय माना जाता है, जिससे बच्चों की आवाज़ दब जाती है।

बच्चों की वर्तमान भूमिका पर पुनर्विचार

कुलकर्णी का तर्क है कि बच्चे केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान का भी महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्होंने कहा, ''वे समाज में खुशी, संतुलन और नई ऊर्जा लेकर आते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि उनकी मासूमियत को सुरक्षित रखा जाए, साथ ही उन्हें निर्णय लेने और अपनी बात रखने का अधिकार भी दिया जाए।'' यह दृष्टिकोण बाल-केंद्रित विकास के अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है, जहाँ बच्चों की भागीदारी उनके विकास का एक अभिन्न अंग माना जाता है।

पॉडकास्ट का सामाजिक संदर्भ

यह पहल उस समय आई है जब भारत में बाल मनोविज्ञान और पारिवारिक गतिशीलता पर बढ़ती बातचीत हो रही है। शिक्षा और पालन-पोषण के क्षेत्र में विशेषज्ञ यह मानते हैं कि बच्चों की आवाज़ सुनना उनके आत्मविश्वास, महत्वपूर्ण सोच और सामाजिक कौशल को विकसित करता है। कुलकर्णी का यह पॉडकास्ट उसी सिद्धांत पर आधारित है।

आगे की दिशा

शो के माध्यम से, कुलकर्णी का लक्ष्य माता-पिता, शिक्षकों और समाज के अन्य सदस्यों को बच्चों की भागीदारी के महत्व के बारे में जागरूक करना है। यह पहल एक सांस्कृतिक संवाद की शुरुआत करती है जहाँ बच्चों की दृष्टि को गंभीरता से लिया जाता है और उन्हें सक्रिय नागरिक के रूप में देखा जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या वर्तमान के भी सक्रिय भागीदार? परंपरागत भारतीय परिवारों में, बड़ों का निर्णय अक्सर अपरिवर्तनीय माना जाता है, जिससे बच्चों की रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच दबी रह जाती है। कुलकर्णी की पहल इस मानसिकता को चुनौती देती है। हालांकि, असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह पॉडकास्ट वास्तविक पारिवारिक परिवर्तन लाता है, या यह केवल एक अच्छे विचार की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति बनकर रह जाता है। भारत में बाल मनोविज्ञान पर शोध दर्शाता है कि सुने जाने वाले बच्चों में आत्मविश्वास और सामाजिक कौशल अधिक विकसित होता है — यह पॉडकास्ट उसी विचार को जनता तक पहुँचाने का एक माध्यम है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'हाफ टिकट फुल नागरिक' पॉडकास्ट क्या है?
यह सोनाली कुलकर्णी द्वारा शुरू किया गया एक पॉडकास्ट शो है जिसका उद्देश्य बच्चों और किशोरों को अपने विचार साझा करने का मंच देना है। शो में हर एपिसोड वयस्क विशेषज्ञों (माता-पिता, शिक्षक, मनोवैज्ञानिक) की बातचीत से शुरू होता है, फिर बच्चों के साथ संवाद होता है।
पॉडकास्ट का नाम 'हाफ टिकट फुल नागरिक' क्यों रखा गया?
'हाफ टिकट' उस क्रमिक यात्रा को दर्शाता है जिसमें बच्चे धीरे-धीरे 'पूर्ण नागरिक' बनने की ओर अग्रसर होते हैं। यह नाम इस विचार को प्रतिबिंबित करता है कि बच्चों को वर्तमान में ही सक्रिय भागीदार माना जाना चाहिए, न कि केवल भविष्य के नागरिक।
सोनाली कुलकर्णी इस पॉडकास्ट को क्यों शुरू करना चाहती थीं?
कुलकर्णी का मानना है कि बच्चों की राय को अक्सर परिवार के निर्णयों में नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, जिससे उनमें मानसिक और भावनात्मक दबाव बढ़ता है। वह बच्चों की रचनात्मकता और ईमानदारी को सार्वजनिक मंच देना चाहती हैं।
क्या यह पॉडकास्ट केवल माता-पिता के लिए है?
नहीं, यह पॉडकास्ट व्यापक दर्शकों के लिए है — शिक्षकों, माता-पिता, मनोवैज्ञानिकों और समाज के अन्य सदस्यों के लिए जो बच्चों की भागीदारी और विकास में रुचि रखते हैं।
पॉडकास्ट बाल मनोविज्ञान से कैसे जुड़ा है?
शोध दर्शाता है कि जब बच्चों की सुना जाता है और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, तो उनका आत्मविश्वास, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक कौशल विकसित होता है। कुलकर्णी का पॉडकास्ट इसी सिद्धांत पर आधारित है।
राष्ट्र प्रेस
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