सेंसेक्स 49.74 अंक उछला, 74,608 पर बंद; चार दिनों की गिरावट का सिलसिला टूटा
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स बुधवार, 13 मई को 49.74 अंक यानी 0.07 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,608.98 पर बंद हुआ, जिससे लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का दौर थम गया। वैश्विक बाज़ारों से मिले-जुले संकेतों के बावजूद भारतीय बाज़ार हरे निशान में बंद होने में सफल रहे।
मुख्य सूचकांकों का प्रदर्शन
निफ्टी 50 भी 33.05 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की तेज़ी के साथ 23,412.60 पर बंद हुआ। दिन के दौरान सेंसेक्स ने 74,439.34 पर कारोबार शुरू किया और 75,191.57 का इंट्रा-डे हाई तथा 74,134.48 का लो बनाया। वहीं निफ्टी 50 ने 23,362.45 पर खुलकर 23,582.95 का दिन का उच्चतम स्तर और 23,262.55 का न्यूनतम स्तर छुआ।
व्यापक बाज़ारों में बेहतर तेज़ी
प्रमुख बेंचमार्कों की तुलना में व्यापक बाज़ारों ने अधिक मज़बूती दिखाई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.77 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.31 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि निवेशकों की रुचि छोटे और मझोले शेयरों में बनी रही।
सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी मेटल सबसे आगे रहा और इसमें 3.18 प्रतिशत की तेज़ी आई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल में 1.67 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1.28 प्रतिशत की बढ़त रही। इसके अलावा निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी फार्मा में भी सकारात्मक रुझान देखा गया।
दूसरी तरफ, निफ्टी आईटी में 1.13 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.97 प्रतिशत की गिरावट रही। निफ्टी बैंक, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मीडिया में भी दबाव बना रहा।
टॉप गेनर्स और लूज़र्स
निफ्टी 50 में एशियन पेंट्स, अदाणी एंटरप्राइजेज, टाटा स्टील, हिंडाल्को, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स और सिप्ला के शेयर सबसे अधिक चढ़े। वहीं आयशर मोटर, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), इंफोसिस, टेक महिंद्रा, सन फार्मा, पावरग्रिड और टीसीएस के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों की संपत्ति में उछाल
BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाज़ार पूंजीकरण पिछले सत्र के ₹456.3 लाख करोड़ से बढ़कर लगभग ₹458.6 लाख करोड़ हो गया। इस प्रकार निवेशकों को एक ही कारोबारी सत्र में ₹2 लाख करोड़ से अधिक का लाभ हुआ। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितता के बीच घरेलू बाज़ार में स्थिरता की तलाश बनी हुई है। आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख बाज़ार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।