MCX पर सोना ₹1,51,100 और चांदी ₹2,50,363 पर कमज़ोर, अमेरिका-ईरान तनाव से बाज़ार दबाव में
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 4 मई 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना और चांदी दोनों लाल निशान में खुले, क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक कमोडिटी बाज़ारों पर दबाव बनाए रखा। सोने का 5 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट ₹382 या 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,51,150 प्रति 10 ग्राम पर खुला, जबकि चांदी भी कमज़ोरी के साथ कारोबार में उतरी।
सोने का कारोबारी हाल
MCX पर सोने का 5 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग ₹1,51,532 के मुकाबले ₹382 या 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,51,150 पर खुला। सुबह 10 बजे तक सोना ₹252 या 0.17 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹1,51,100 पर था। इंट्राडे कारोबार में सोने ने ₹1,50,860 का न्यूनतम और ₹1,51,347 का उच्चतम स्तर दर्ज किया।
चांदी का कारोबारी हाल
चांदी का 3 जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग ₹2,50,937 के मुकाबले ₹238 या 0.094 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹2,50,699 पर खुला। बाद में चांदी ₹574 या 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹2,50,363 पर आ गई। इंट्राडे में चांदी ने ₹2,49,760 का न्यूनतम और ₹2,51,231 का उच्चतम स्तर छुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी दबाव
वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं में कमज़ोरी बनी रही। कॉमेक्स पर सोना 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ $4,619 प्रति औंस और चांदी 0.48 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ $76.065 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। गौरतलब है कि वैश्विक बाज़ारों में कीमती धातुओं की कीमतें भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौरान आमतौर पर चढ़ती हैं, लेकिन इस बार बिकवाली का दबाव हावी रहा।
अमेरिका-ईरान तनाव और 'प्रोजेक्ट फ्रीडम'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की घोषणा की है, जिसके तहत हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाज़ों को निकालने की योजना है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि फंसे जहाज़ और उनके कर्मचारी निर्दोष हैं और केवल परिस्थितियों के कारण कठिनाइयों में हैं। उन्होंने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी खतरे का कड़ा जवाब दिया जाएगा। इस ऐलान के बाद अमेरिका ने कई देशों से सहयोग भी माँगा है। ईरान ने भी अपने सख्त तेवर बनाए रखे हैं।
शेयर बाज़ार पर असर
दिलचस्प बात यह है कि 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के ऐलान के बाद वैश्विक बाज़ारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाज़ार में भी तेज़ी देखी गई। विश्लेषकों के अनुसार, सैन्य टकराव की बजाय कूटनीतिक पहल की उम्मीद ने जोखिम भावना को कुछ हद तक सुधारा, जिससे कमोडिटी से पूँजी इक्विटी की ओर खिसकी। आगे के कारोबार में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान वार्ता के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।