कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से सोना ₹1,50,113 और चांदी ₹2,46,074 पर फिसली
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार, 4 मई को सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं को हवा दी और सुरक्षित निवेश विकल्पों की चमक फीकी पड़ गई। अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और संभावित शांति वार्ता के संकेतों के बीच निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा।
MCX पर सोने-चांदी की गिरावट का ब्यौरा
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन जून डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव MCX पर 1,239 रुपए (0.82 प्रतिशत) की गिरावट के साथ ₹1,50,113 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 4,863 रुपए (1.94 प्रतिशत) टूटकर ₹2,46,074 प्रति किलोग्राम पर पहुँच गई।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आँकड़ों के अनुसार, 999 प्यूरिटी वाले सोने का हाजिर भाव सोमवार को ₹1,48,100 प्रति 10 ग्राम रहा — 30 अप्रैल (गुरुवार) के ₹1,50,263 की तुलना में ₹2,163 की गिरावट। 999 प्यूरिटी वाली चांदी ₹2,40,120 प्रति किलोग्राम पर रही, जो पिछले गुरुवार के ₹2,40,331 से ₹211 कम है।
वैश्विक बाज़ारों में भी दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव बना रहा। भारतीय समयानुसार शाम 7:47 बजे तक कॉमेक्स पर सोना लगभग 1.62 प्रतिशत गिरकर करीब $4,569 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था। कॉमेक्स चांदी में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट आई और यह लगभग $74.28 प्रति औंस पर पहुँच गई।
कच्चे तेल और ब्याज दरों का कनेक्शन
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई पर दबाव बढ़ाती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची बनाए रखने की संभावना प्रबल हो जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब बाज़ार होर्मुज जलडमरूमध्य से विदेशी जहाज़ों को सुरक्षित निकालने की अमेरिकी योजनाओं और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में हो रही प्रगति के संकेतों पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। गौरतलब है कि सोना कोई प्रतिफल नहीं देता, इसलिए ऊँची ब्याज दरों के माहौल में इसकी अपील आमतौर पर घट जाती है।
युद्ध शुरू होने के बाद से सोने में 12% की गिरावट
आँकड़ों के अनुसार, अमेरिका-ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से सोने की कीमतों में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है — जो इस बात का संकेत है कि भू-राजनीतिक तनाव और संभावित कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों ने मिलकर सुरक्षित निवेश की माँग को कमज़ोर किया है। आगे चलकर अमेरिकी मौद्रिक नीति की दिशा और ईरान के साथ वार्ता का नतीजा इन कीमती धातुओं की चाल तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।