वैश्विक तनाव के बीच सोना 50,000 रुपए से नीचे, चांदी 2 लाख रुपए कम; जानें गिरावट के कारण और भविष्य की संभावनाएं

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वैश्विक तनाव के बीच सोना 50,000 रुपए से नीचे, चांदी 2 लाख रुपए कम; जानें गिरावट के कारण और भविष्य की संभावनाएं

सारांश

मिडिल ईस्ट में तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है। जानें इसके पीछे की वजहें और भविष्य में कीमतों की दिशा क्या होगी।

Key Takeaways

  • सोने की कीमतें 50,000 रुपए से नीचे जा चुकी हैं।
  • चांदी की कीमतें भी 2 लाख रुपए से कम हैं।
  • भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का बाजार पर असर।
  • अमेरिकी डॉलर की मजबूती से कीमतों पर दबाव।
  • भविष्य के आंकड़ों पर निवेशकों की नजर।

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के पांचवें सप्ताह में प्रवेश करने के कारण सोने और चांदी की कीमतों में महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है। हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2.2 प्रतिशत और चांदी 3.8 प्रतिशत तक कम हो गई। भारत में सोने की कीमतें अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर से 50,000 रुपए से नीचे हैं, जबकि चांदी अपने उच्चतम मूल्य से 2 लाख रुपए कम है।

हालांकि हाल के दिनों में सोने में थोड़ी वृद्धि देखी गई है, परंतु कुल मिलाकर बाजार में दबाव स्पष्ट है। इसके पीछे मजबूत डॉलर, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताएं शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर सोने की कीमत 2.29 प्रतिशत4,702 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि चांदी 3.82 प्रतिशत घटकर 73.17 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 1.7 प्रतिशत घटकर 4,675.67 डॉलर हो गया। चांदी में और भी गिरावट आई और यह 2.91 प्रतिशत घटकर 72.99 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर जून डिलीवरी वाला सोना हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन (2 अप्रैल) 0.02 प्रतिशत गिरकर 1,49,650 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो अपने ऑल-टाइम हाई 2,02,984 रुपए प्रति 10 ग्राम से लगभग 53,334 रुपए कम है।

चांदी की स्थिति भी ऐसी ही है; एमसीएक्स पर मई डिलीवरी वाली चांदी अंतिम कारोबारी दिन (2 अप्रैल) 4.48 प्रतिशत यानी 10,901 रुपए कम होकर 2,32,600 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई, जो अपने ऑल-टाइम हाई 4,39,337 रुपए प्रति किलोग्राम से 2,06,737 रुपए कम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभ में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने की मांग सुरक्षित निवेश के रूप में बढ़ी थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद संघर्ष के जल्दी समाप्त होने की उम्मीद में कमी आई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की मजबूती से सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए इन धातुओं को खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है और कीमतें नीचे आती हैं।

इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई की चिंता को बढ़ा दिया है। महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती टाल सकते हैं या उन्हें लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों का सीधा असर सोने-चांदी जैसे निवेश पर पड़ता है, क्योंकि ये कोई ब्याज नहीं देते। इस स्थिति में, निवेशक बेहतर रिटर्न वाले विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं।

अब निवेशकों की नजर अमेरिका के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों जैसे नॉन-फार्म पेरोल, एडीपी रोजगार डेटा और बेरोजगारी दर पर है, जो बाजार में तेज उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। तकनीकी दृष्टि से सोने के लिए 1,48,000 रुपए के आसपास समर्थन और 1,55,000 रुपए के आसपास प्रतिरोध देखा जा रहा है।

हालांकि इन सभी दबावों के बावजूद, सोने ने सप्ताह के दौरान करीब 2.20 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक स्थिति और महंगाई के रुख पर निर्भर करेगी।

फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है, और सोने की कीमतों में आगे भी घटनाओं के आधार पर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

चांदी की कीमतों में ज्यादा गिरावट का एक कारण यह भी है कि यह केवल निवेश धातु नहीं बल्कि औद्योगिक धातु भी है। जब वैश्विक आर्थिक विकास को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो उद्योगों में इसकी मांग घटने का डर बढ़ जाता है, जिससे कीमतों पर ज्यादा दबाव आता है।

विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल बाजार पूरी तरह मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतों जैसे महंगाई, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंक की नीतियों पर निर्भर है। आने वाले समय में इन कारकों के आधार पर ही सोने-चांदी की दिशा तय होगी और बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

Point of View

हालिया गिरावट ने निवेशकों के मन में अस्थिरता का माहौल बना दिया है। वैश्विक घटनाक्रमों का असर हमारे घरेलू बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
NationPress
04/04/2026

Frequently Asked Questions

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के मुख्य कारण क्या हैं?
मुख्य कारणों में मजबूत डॉलर, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, और भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं।
क्या सोने की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं?
भविष्य में भू-राजनीतिक स्थिति और महंगाई के रुख पर निर्भर करेगा।
क्या चांदी की कीमतों में गिरावट का उद्योग पर असर पड़ेगा?
हाँ, चांदी औद्योगिक धातु भी है, जिससे इसकी मांग घटने का डर है।
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