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सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद तोड़ा अनशन, जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से बैठक के बाद बड़ा फैसला

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सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद तोड़ा अनशन, जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से बैठक के बाद बड़ा फैसला

सारांश

26 दिनों की लंबी भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ा — लेकिन यह महज़ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं था। 65 सांसदों की अपील, दिल्ली उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप और पीएम मोदी के पेपर लीक विरोधी विधेयक के संकेत — यह सब एक साथ आया, जो नीट आंदोलन के दबाव की असली ताकत को दर्शाता है।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई की रात 26 दिनों के अनशन के बाद भूख हड़ताल समाप्त की।
अनशन तोड़ने का निर्णय केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और राज्यमंत्री डॉ.
जितेंद्र सिंह से बैठक के बाद लिया गया।
विभिन्न दलों के 65 सांसदों ने वांगचुक से मुलाकात कर या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था।
वांगचुक को पहले सफदरजंग अस्पताल , फिर दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
PM मोदी ने पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रावधान वाले मसौदे को कैबिनेट में पेश करने की घोषणा की।
सरकार ने 22 लाख छात्रों की परीक्षा आयोजित कर 19 जुलाई को परिणाम घोषित किए।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई की देर रात 26 दिनों से जारी अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह निर्णय केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक तथा लेह-लद्दाख की सर्वोच्च समिति के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में लिया गया। वांगचुक ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी पुष्टि की।

अनशन की पृष्ठभूमि

वांगचुक ने 28 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले को लेकर जारी आंदोलन के समर्थन में अनशन शुरू किया था। अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, और बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।

वांगचुक का बयान

एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में वांगचुक ने लिखा, 'अभी-अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह तथा लेह-लद्दाख की सर्वोच्च समिति के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में मैंने 26 दिनों के बाद अपना अनशन तोड़ा।' उन्होंने बताया कि इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की थी या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था।

वांगचुक ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय 'देश में संभावित हिंसा को देखते हुए और विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत के बाद' लिया गया। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही एक अलग वीडियो में उन शर्तों का विस्तार से वर्णन करेंगे और सभी से किसी भी प्रकार की हिंसा रोकने के लिए सतर्क रहने का आग्रह किया।

पीएम मोदी का वीडियो संदेश और कैबिनेट कदम

इसी रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर देश के युवाओं, छात्रों और अभिभावकों को पेपर लीक पर अंकुश लगाने से संबंधित बड़े कदमों की जानकारी दी। उन्होंने घोषणा की कि इससे जुड़ा एक मसौदा शुक्रवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में पेश किया जाएगा।

मोदी ने कहा, 'पेपर लीक मामूली विषय नहीं है — लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए यह बेहद पीड़ादायक है।' उन्होंने बताया कि पिछले ढाई महीनों में कई कदम उठाए गए हैं, दोषियों को गिरफ्तार किया गया है और वे जेल में हैं। सरकार ने 22 लाख छात्रों की परीक्षा का प्रबंध किया और 19 जुलाई को परिणाम भी घोषित किए गए।

प्रस्तावित कानूनी प्रावधान

प्रधानमंत्री ने बताया कि मसौदे में फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रावधान शामिल हैं। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे संसद के अगले सप्ताह — सोमवार से शुरू होने वाले दूसरे सत्र सप्ताह में — जल्द से जल्द पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन तेज हो रहे थे।

आगे क्या होगा

वांगचुक ने संकेत दिया है कि वे अनशन समाप्त करने की शर्तों का विवरण एक अलग वीडियो में देंगे। इस बीच, पेपर लीक विरोधी विधेयक पर कैबिनेट और संसद की कार्रवाई आने वाले दिनों में इस आंदोलन की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जिन 'शर्तों' का उल्लेख उन्होंने किया है, वे कितनी बाध्यकारी हैं और सरकार उन्हें लागू करने के लिए कितनी प्रतिबद्ध है। पेपर लीक विरोधी विधेयक की घोषणा समय की दृष्टि से उल्लेखनीय है — यह ठीक उसी रात आई जब एक著名 कार्यकर्ता के अनशन का दबाव चरम पर था। GDP में मैन्युफैक्चरिंग की तरह, यहाँ भी कानून बनाना और उसे प्रभावी ढंग से लागू करना दो अलग-अलग बातें हैं — नीट जैसी परीक्षा प्रणाली में सुधार के पिछले वादे भी इसी खाई में गुम हुए हैं। 65 सांसदों का एकजुट होना दलगत सीमाओं से परे एक संकेत है कि छात्र आंदोलन की अनदेखी अब राजनीतिक रूप से महंगी पड़ सकती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक ने अनशन क्यों शुरू किया था?
सोनम वांगचुक ने 28 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले के विरोध में जारी आंदोलन के समर्थन में अनशन शुरू किया था। यह अनशन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग को लेकर था।
सोनम वांगचुक ने अनशन कब और किसके साथ बैठक के बाद तोड़ा?
24 जुलाई की देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा , राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख की सर्वोच्च समिति के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में वांगचुक ने 26 दिनों का अनशन समाप्त किया। उन्होंने बताया कि यह निर्णय संभावित हिंसा की आशंका और लंबी बातचीत के बाद लिया गया।
अनशन के दौरान सोनम वांगचुक को किस अस्पताल में भर्ती कराया गया था?
तबीयत बिगड़ने पर वांगचुक को पहले सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर उन्हें मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।
पीएम मोदी ने पेपर लीक पर क्या घोषणा की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी रात सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर बताया कि पेपर लीक रोकने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रावधान वाला मसौदा शुक्रवार की कैबिनेट बैठक में पेश किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे संसद में जल्द से जल्द पारित कराने का प्रयास किया जाएगा।
नीट पुनर्परीक्षा में कितने छात्र शामिल हुए और परिणाम कब आए?
सरकार ने 22 लाख छात्रों की परीक्षा का प्रबंध किया और 19 जुलाई को परिणाम घोषित किए गए। प्रधानमंत्री ने बताया कि देशभर में पास हुए छात्रों की खुशियों की खबरें आ रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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