सोनम वांगचुक से मेदांता में मिले JP नड्डा और जितेंद्र सिंह, 25 दिन से जारी है अनशन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मंगलवार, 22 जुलाई की देर रात गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुँचकर जलवायु कार्यकर्ता और लद्दाख के प्रतिनिधि सोनम वांगचुक का हालचाल जाना। वांगचुक को उसी दिन शाम सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी देकर दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में कड़ी सुरक्षा के बीच एम्बुलेंस से मेदांता स्थानांतरित किया गया था। उनके अनशन को बुधवार को 25 दिन पूरे हो रहे हैं।
मेदांता में भर्ती और उपचार की स्थिति
अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, वांगचुक को आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सुशीला कटारिया की देखरेख में भर्ती कराया गया है। उनका स्थानांतरण आगे के विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता को देखते हुए किया गया। केंद्रीय मंत्रियों की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब उनके समर्थन में छात्रों का अनिश्चितकालीन अनशन जारी है।
वांगचुक की माँगें और अनशन की शर्तें
सोमवार को सफदरजंग अस्पताल से जारी एक हस्तलिखित नोट में वांगचुक ने स्पष्ट किया था कि वह अपना अनशन तब तक नहीं तोड़ेंगे, जब तक प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती, या उन्हें स्वयं अस्पताल में सांसदों से मिलने का अवसर नहीं मिलता।
मंगलवार को उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने यह भी जोड़ा कि वांगचुक ने तब तक अनशन जारी रखने का संकल्प लिया है, जब तक संसद 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाई का संज्ञान नहीं लेती।
पुलिस कार्रवाई पर आंगमो के आरोप
आंगमो ने आरोप लगाया कि 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्रों की पिटाई की गई, उन पर लाठीचार्ज हुआ और आँसू गैस के गोले दागे गए। उन्होंने कहा, 'मैं ट्रक में थी, तभी पुलिस अंदर आई और अभिजीत को भी जबरदस्ती ले जाने की कोशिश की। मेरे चारों ओर मौजूद लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर मेरी रक्षा की। छात्रों के साथ जो कुछ भी हुआ, वह हम सभी ने देखा है। अगर मैं अकेली होती और मेरे साथ कुछ किया जाता, तो मैं भी अपनी रक्षा करती।' गौरतलब है कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मियों पर हमले के भी आरोप लगे हैं, जिन पर आंगमो ने अपनी प्रतिक्रिया दी।
आगे की स्थिति
केंद्रीय मंत्रियों की इस मुलाकात को सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है, हालाँकि अभी तक किसी ठोस समझौते की जानकारी नहीं है। वांगचुक का अनशन और छात्रों का आंदोलन फिलहाल जारी है, और सभी की निगाहें संसद की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।