सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त, केंद्रीय मंत्रियों ने कहा — PM मोदी छात्रों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई 2026 को अपना अनशन समाप्त कर दिया, जिसके बाद केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने इस निर्णय को परीक्षा सुधार और छात्र हितों के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता में वांगचुक के भरोसे का प्रमाण बताया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में वांगचुक से मुलाकात कर सरकार की ओर से सार्थक पहल का भरोसा दिलाया, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।
मुलाकात और अनशन समाप्ति का घटनाक्रम
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि उन्होंने जे.पी. नड्डा के साथ मेदांता अस्पताल में वांगचुक से मुलाकात की और छात्रों की चिंताओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा, 'सरकार की ओर से सार्थक बातचीत और सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया, जिसके बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।'
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी एक्स पर लिखा कि वांगचुक का यह निर्णय मोदी सरकार की 'सच्ची प्रतिबद्धता' में उनके विश्वास को दर्शाता है और सरकार परीक्षा सुधारों को मजबूत करने के लिए दृढ़संकल्प है।
प्रश्नपत्र लीक पर सख्त कार्रवाई का वादा
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के हवाले से कहा कि 'भारत का युवा राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है, और देश के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले प्रत्येक दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।'
दिल्ली सरकार की प्रतिक्रिया
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी एक्स पर लिखा कि नड्डा और जितेंद्र सिंह ने वांगचुक से मिलकर विद्यार्थियों से जुड़े विषयों पर सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए सुधार किए जाएंगे और संसद में विस्तृत चर्चा के ज़रिये सार्थक समाधान सुनिश्चित किए जाएंगे।
आगे क्या होगा
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों में गहरा आक्रोश है। गौरतलब है कि सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन पर सभी की नज़रें टिकी हैं — विशेषकर परीक्षा सुधार के ठोस कदमों और दोषियों पर की जाने वाली कार्रवाई के संदर्भ में। आलोचकों का कहना है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि एक स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच तंत्र की आवश्यकता है।