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सोनम वांगचुक का अनशन: सरकार से युवा प्रदर्शनकारियों को दंडमुक्ति का लिखित आश्वासन माँगा

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सोनम वांगचुक का अनशन: सरकार से युवा प्रदर्शनकारियों को दंडमुक्ति का लिखित आश्वासन माँगा

सारांश

सोनम वांगचुक का अनशन अब एक निर्णायक मोड़ पर है — दो केंद्रीय मंत्रियों की मुलाकात और 65 सांसदों की अपील के बाद भी वे डटे हैं। उनकी एकमात्र शर्त: युवा प्रदर्शनकारियों को दंडमुक्ति का लिखित वादा। सरकार का अगला कदम तय करेगा कि यह आंदोलन किस दिशा में जाता है।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक ने 22 जुलाई को स्पष्ट किया कि अनशन समाप्त करने के लिए सरकार से लिखित आश्वासन चाहिए कि आंदोलनकारी युवाओं पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.
नड्डा और राज्यमंत्री डॉ.
जितेंद्र सिंह मंगलवार रात अस्पताल में वांगचुक से मिले और अनशन समाप्त करने का आग्रह किया।
विभिन्न दलों के करीब 65 सांसदों ने पत्र लिखकर अनशन खत्म करने की अपील की, लेकिन वांगचुक ने व्यक्तिगत आग्रहों को अपर्याप्त बताया।
20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च को वांगचुक ने शांतिपूर्ण बताया; पुलिस के कथित बल प्रयोग पर चिंता जताई।
माँगों में पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा और संसद में शिक्षा पर सार्थक चर्चा शामिल है।

सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने 22 जुलाई को स्पष्ट किया कि वे अपना अनिश्चितकालीन अनशन तभी समाप्त करेंगे जब केंद्र सरकार लिखित रूप में यह आश्वासन दे कि शिक्षा सुधार आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के विरुद्ध कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। वांगचुक परीक्षा पेपर लीक मामलों में जवाबदेही, पीड़ित छात्र परिवारों को मुआवजे और शिक्षा व्यवस्था में आमूल सुधार की माँग को लेकर अनशन पर हैं।

खुला पत्र और मंत्रियों की मुलाकात

वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक खुला पत्र साझा किया, जो उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के नाम संबोधित किया। उन्होंने बताया कि दोनों मंत्री मंगलवार रात अस्पताल में उनसे मिलने पहुँचे थे और उन्होंने अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था।

पत्र में वांगचुक ने उल्लेख किया कि मुलाकात के दौरान मंत्रियों ने भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी प्रमुख माँगों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी। इनमें पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देना और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संसद में सार्थक चर्चा सुनिश्चित करना शामिल है। चर्चा के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर भी विचार किए जाने की बात सामने आई।

'चलो संसद' मार्च और पुलिस बल प्रयोग

वांगचुक ने 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की कथित सख्ती और बल प्रयोग के बावजूद यह मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। उनके अनुसार, देश और दुनिया ने देखा कि युवाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी और संयम का परिचय दिया। उन्होंने यह भी अपील की कि आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की ओर से आगे किसी प्रकार के बल प्रयोग से बचा जाए।

65 सांसदों की अपील, फिर भी अनशन जारी

वांगचुक ने बताया कि मंत्रियों की मुलाकात के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने की अपील की है। कुछ सांसद व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलने भी पहुँचे हैं। हालाँकि, वांगचुक ने स्पष्ट किया कि वे केवल व्यक्तिगत आग्रहों के आधार पर अनशन समाप्त नहीं कर सकते।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा, 'मैं जीना चाहता हूँ। मैं अपने छात्रों और शिक्षा के क्षेत्र में लौटना चाहता हूँ, लेकिन जिन युवाओं के लिए यह आंदोलन शुरू हुआ, उनके हितों की अनदेखी करके ऐसा नहीं कर सकता।'

सरकार के सामने रखी स्पष्ट शर्त

वांगचुक ने सरकार से माँग की कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के विरुद्ध कोई दंडात्मक या बदले की भावना से प्रेरित कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी — इसका स्पष्ट लिखित आश्वासन दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि यह भरोसा मिलता है तो वे विश्वास के साथ अनशन समाप्त कर देंगे, अन्यथा अनिश्चितकालीन अनशन जारी रहेगा।

अपने पत्र के अंत में वांगचुक ने कहा कि किसी लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती इस बात से तय होती है कि वह अपने असहमत नागरिकों — विशेषकर युवाओं — के साथ कैसा व्यवहार करता है। यह देखना बाकी है कि केंद्र सरकार इस माँग पर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यदि नहीं देती तो अनशन जारी रहने का जोखिम उठाती है। यह ऐसे समय में आया है जब परीक्षा पेपर लीक पर सार्वजनिक आक्रोश पहले से ही सरकार के लिए असहज स्थिति बना चुका है। 65 सांसदों का एकजुट होकर अपील करना दर्शाता है कि यह मुद्दा अब सर्वदलीय दबाव बन चुका है। असली परीक्षण यह है कि सरकार प्रतीकात्मक आश्वासन देती है या ठोस कानूनी प्रतिबद्धता — और इन दोनों के बीच का फर्क ही वांगचुक के अनशन का भविष्य तय करेगा।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक अनशन क्यों कर रहे हैं?
वांगचुक परीक्षा पेपर लीक मामलों में जवाबदेही, पीड़ित छात्र परिवारों को मुआवजे और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की माँग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं। उनका आंदोलन शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग पर केंद्रित है।
वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए क्या शर्त रखी है?
वांगचुक ने केंद्र सरकार से माँग की है कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के विरुद्ध कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी — इसका स्पष्ट लिखित आश्वासन दिया जाए। उन्होंने कहा कि केवल मौखिक आग्रह या व्यक्तिगत अपीलें पर्याप्त नहीं हैं।
केंद्र सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह मंगलवार रात अस्पताल में वांगचुक से मिले और अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। मंत्रियों ने भरोसा दिलाया कि सरकार प्रमुख माँगों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी, लेकिन लिखित आश्वासन अभी तक नहीं दिया गया है।
'चलो संसद' मार्च क्या था?
20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च शिक्षा सुधार आंदोलन का हिस्सा था, जिसमें युवाओं ने संसद की ओर मार्च किया। वांगचुक के अनुसार, पुलिस की कथित सख्ती और बल प्रयोग के बावजूद यह मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
इस आंदोलन में सांसदों की क्या भूमिका है?
विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने वांगचुक को पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने की अपील की है और कुछ व्यक्तिगत रूप से मिलने भी पहुँचे हैं। वांगचुक ने इसे सकारात्मक बताया लेकिन स्पष्ट किया कि सांसदों की अपील अकेले पर्याप्त नहीं — सरकार का लिखित आश्वासन जरूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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