सोनम वांगचुक का अनशन: सरकार से युवा प्रदर्शनकारियों को दंडमुक्ति का लिखित आश्वासन माँगा
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने 22 जुलाई को स्पष्ट किया कि वे अपना अनिश्चितकालीन अनशन तभी समाप्त करेंगे जब केंद्र सरकार लिखित रूप में यह आश्वासन दे कि शिक्षा सुधार आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के विरुद्ध कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। वांगचुक परीक्षा पेपर लीक मामलों में जवाबदेही, पीड़ित छात्र परिवारों को मुआवजे और शिक्षा व्यवस्था में आमूल सुधार की माँग को लेकर अनशन पर हैं।
खुला पत्र और मंत्रियों की मुलाकात
वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक खुला पत्र साझा किया, जो उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के नाम संबोधित किया। उन्होंने बताया कि दोनों मंत्री मंगलवार रात अस्पताल में उनसे मिलने पहुँचे थे और उन्होंने अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था।
पत्र में वांगचुक ने उल्लेख किया कि मुलाकात के दौरान मंत्रियों ने भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी प्रमुख माँगों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी। इनमें पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देना और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संसद में सार्थक चर्चा सुनिश्चित करना शामिल है। चर्चा के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर भी विचार किए जाने की बात सामने आई।
'चलो संसद' मार्च और पुलिस बल प्रयोग
वांगचुक ने 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की कथित सख्ती और बल प्रयोग के बावजूद यह मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। उनके अनुसार, देश और दुनिया ने देखा कि युवाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी और संयम का परिचय दिया। उन्होंने यह भी अपील की कि आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की ओर से आगे किसी प्रकार के बल प्रयोग से बचा जाए।
65 सांसदों की अपील, फिर भी अनशन जारी
वांगचुक ने बताया कि मंत्रियों की मुलाकात के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने की अपील की है। कुछ सांसद व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलने भी पहुँचे हैं। हालाँकि, वांगचुक ने स्पष्ट किया कि वे केवल व्यक्तिगत आग्रहों के आधार पर अनशन समाप्त नहीं कर सकते।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा, 'मैं जीना चाहता हूँ। मैं अपने छात्रों और शिक्षा के क्षेत्र में लौटना चाहता हूँ, लेकिन जिन युवाओं के लिए यह आंदोलन शुरू हुआ, उनके हितों की अनदेखी करके ऐसा नहीं कर सकता।'
सरकार के सामने रखी स्पष्ट शर्त
वांगचुक ने सरकार से माँग की कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के विरुद्ध कोई दंडात्मक या बदले की भावना से प्रेरित कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी — इसका स्पष्ट लिखित आश्वासन दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि यह भरोसा मिलता है तो वे विश्वास के साथ अनशन समाप्त कर देंगे, अन्यथा अनिश्चितकालीन अनशन जारी रहेगा।
अपने पत्र के अंत में वांगचुक ने कहा कि किसी लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती इस बात से तय होती है कि वह अपने असहमत नागरिकों — विशेषकर युवाओं — के साथ कैसा व्यवहार करता है। यह देखना बाकी है कि केंद्र सरकार इस माँग पर क्या रुख अपनाती है।