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सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि बोलीं — शिक्षा सुधार की लड़ाई जारी रहेगी, 'चलो संसद' मार्च में उठीं कई मांगें

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सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि बोलीं — शिक्षा सुधार की लड़ाई जारी रहेगी, 'चलो संसद' मार्च में उठीं कई मांगें

सारांश

'चलो संसद' मार्च में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने साफ कहा — यह लड़ाई खत्म नहीं हुई। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, ₹1 करोड़ मुआवजे और वांगचुक की रिहाई की मांग के साथ विपक्ष एकजुट हुआ।

मुख्य बातें

गीतांजलि (सोनम वांगचुक की पत्नी) ने 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च में कहा कि शिक्षा सुधार का संघर्ष जारी रहेगा।
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजे और सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई की मांग रखी गई।
सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण और CPI(M) नेता बृंदा करात ने प्रदर्शन को समर्थन दिया।
आलोचकों का कहना है कि पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने 20 जुलाई को नई दिल्ली में 'चलो संसद' मार्च के दौरान स्पष्ट किया कि शिक्षा सुधार का यह आंदोलन किसी एक प्रदर्शन या अनशन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ी एक दीर्घकालिक मुहिम है। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में बदलाव नहीं आता, यह संघर्ष थमेगा नहीं।

गीतांजलि का बयान: 'यह अंत नहीं'

गीतांजलि ने मार्च के दौरान कहा, "आज का दिन बहुत अहम है लेकिन यह अंत नहीं है। यह सिलसिला जारी रहेगा। जरूरी नहीं कि विरोध, प्रदर्शन और अनशन के जरिए ही, लेकिन यह मांग बनी रहेगी कि शिक्षा और शिक्षा में सुधार का मुद्दा भारत का सबसे अहम मुद्दा बने।" उन्होंने जोड़ा कि जब भारत के युवा अपनी पूरी क्षमता को साकार कर पाएंगे, तभी भारत दुनिया का नेतृत्वकर्ता बन सकेगा।

मुख्य मांगें और प्रदर्शनकारियों का रुख

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन के दौरान तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा। दूसरी, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा। तीसरी, सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई। दिपके ने कहा कि जब तक ये मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।

विपक्षी नेताओं का समर्थन

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नेता और सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण ने प्रदर्शन को खुला समर्थन दिया। उन्होंने कहा, "देश का नौजवान अपना काम कर रहा है और पुलिस अपना कर्तव्य निभा रही है। लेकिन सच यह है कि युवाओं के अंदर जो डर था, वह अब खत्म हो चुका है। जब किसी व्यक्ति के अंदर से डर निकल जाता है तो वह अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ा होता है।" उन्होंने सरकार से अपील की कि पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाए।

चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि उनकी पार्टी इस आंदोलन की शुरुआत से ही हिस्सेदार रही है और उन्होंने कार्यकर्ताओं से पार्टी के झंडे से ऊपर उठकर युवाओं के मुद्दे के समर्थन में आने की अपील की थी।

वामपंथी दलों की आवाज़

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की नेता बृंदा करात ने भी प्रदर्शन को समर्थन देते हुए केंद्र सरकार पर जवाबदेही का सवाल उठाया। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी जनता के प्रति जवाबदेह रहने की होती है और छात्रों के मुद्दों पर संवेदनशीलता अनिवार्य है।

आगे क्या होगा

गीतांजलि के बयान और विभिन्न दलों के समर्थन से स्पष्ट है कि शिक्षा सुधार की यह मुहिम संसद के गलियारों तक पहुँचने की कोशिश करेगी। आलोचकों का कहना है कि सरकार यदि युवाओं की नाराजगी को नजरअंदाज करती रही, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दलित राजनीति और सामाजिक कार्यकर्ता एक मंच पर आए, जो सामान्यतः एक साथ नहीं दिखते। लेकिन सवाल यह है कि क्या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग एक ठोस नीतिगत एजेंडे में तब्दील हो पाएगी, या यह केवल प्रतीकात्मक दबाव बनकर रह जाएगी। पेपर लीक और छात्र आत्महत्याओं की समस्या संरचनात्मक है — किसी एक मंत्री के जाने से हल नहीं होगी। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग और शिक्षा सुधार की मांग — ये दो अलग मुद्दे एक ही आंदोलन में जोड़े गए हैं, जो इसकी राजनीतिक पहचान को जटिल बनाता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने 'चलो संसद' मार्च में क्या कहा?
गीतांजलि ने 20 जुलाई को नई दिल्ली में कहा कि शिक्षा सुधार का यह आंदोलन केवल प्रदर्शन या अनशन तक सीमित नहीं है और यह जारी रहेगा। उनके अनुसार, जब तक शिक्षा भारत का सर्वोच्च प्राथमिकता वाला मुद्दा नहीं बनती, यह संघर्ष थमेगा नहीं।
'चलो संसद' मार्च की प्रमुख मांगें क्या हैं?
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने तीन मांगें रखीं — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा, और सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई।
सोनम वांगचुक कौन हैं और उन्हें क्यों हिरासत में लिया गया?
सोनम वांगचुक एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और इनोवेटर हैं जो लद्दाख के अधिकारों और शिक्षा सुधार के मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। उनकी हिरासत के विरोध में ही 'चलो संसद' मार्च में उनकी रिहाई की मांग उठाई गई।
किन विपक्षी नेताओं ने इस प्रदर्शन को समर्थन दिया?
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण और CPI(M) नेता बृंदा करात ने प्रदर्शन को समर्थन दिया। दोनों ने सरकार से युवाओं की मांगों को गंभीरता से लेने की अपील की।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग क्यों उठ रही है?
आलोचकों का कहना है कि पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। बृंदा करात के अनुसार, यह आंदोलन सरकार की जवाबदेही और नागरिकों के प्रति उसकी जिम्मेदारी से सीधे जुड़ा हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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