भारतीय नौसेना और रॉयल थाई नेवी की 14वीं स्टाफ वार्ता नई दिल्ली में संपन्न, रक्षा व समुद्री सहयोग पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना और रॉयल थाई नेवी के बीच 14वीं स्टाफ वार्ता 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में सफलतापूर्वक आयोजित हुई, जिसमें दोनों देशों ने क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण सहयोग और द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस उच्चस्तरीय बैठक में भविष्य की साझेदारी के नए अवसरों की पहचान पर भी विचार-विमर्श किया गया।
वार्ता का नेतृत्व और स्वरूप
बैठक की संयुक्त अध्यक्षता भारतीय नौसेना के रियर एडमिरल सचिन आर. सिकेरा, एसीएनएस (एफसीआई) और रॉयल थाई नेवी के रियर एडमिरल चकसावत साइवोंग, निदेशक, नीति एवं योजना कार्यालय, नौसेना संचालन विभाग ने की। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति इस वार्ता के सामरिक महत्व को रेखांकित करती है।
भारतीय नौसेना ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच रक्षा एवं समुद्री सहयोग की नींव को और मज़बूत करना था।
हालिया संयुक्त अभ्यास और सत्ताहिप यात्रा
स्टाफ वार्ता से पूर्व, जुलाई 2026 में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस शक्ति और आईएनएस कवरत्ती ने रॉयल थाई नेवी के युद्धपोत एचटीएमएस चाओ फ्राया के साथ एक संयुक्त पैसेज एक्सरसाइज में भाग लिया था। यह अभ्यास थाईलैंड के सत्ताहिप बंदरगाह की यात्रा के बाद आयोजित किया गया।
इस संयुक्त अभ्यास ने दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन समन्वय और आपसी तालमेल को प्रगाढ़ करने का अवसर दिया। साथ ही समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।
पेशेवर और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
सत्ताहिप यात्रा के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच कई पेशेवर आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित किए गए। संयुक्त योग सत्र, खेलकूद गतिविधियाँ और युद्धपोतों के दौरे भी इसका हिस्सा रहे।
30 जून 2026 को आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस शक्ति और आईएनएस कवरत्ती की सत्ताहिप यात्रा के दौरान दोनों नौसेनाओं के जवानों के बीच एक मैत्रीपूर्ण वॉलीबॉल मैच भी खेला गया, जो दोनों देशों के बीच सौहार्द और मित्रता का प्रतीक बना। यात्रा के समापन पर रॉयल थाई नेवी ने भारतीय जहाजों को गर्मजोशी से विदाई दी।
व्यापक सामरिक संदर्भ
यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ समुद्री संबंधों को नई गहराई दे रहा है। गौरतलब है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत और थाईलैंड के बीच नौसैनिक सहयोग का यह क्रम नियमित और संस्थागत रूप ले चुका है।
आगामी समय में दोनों नौसेनाओं के बीच पहचाने गए नए सहयोग क्षेत्रों पर ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है, जो द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और व्यापक आधार देंगे।