भारत-ईयू एफटीए को सभी 27 सदस्य देशों का समर्थन, पीयूष गोयल बोले — 'दोनों पक्षों के हितों की रक्षा'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 4 सितंबर 2026 को मुंबई में आयोजित भारत-बेल्जियम उच्चस्तरीय संवाद में घोषणा की कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को ईयू के सभी 27 सदस्य देशों की एकमत सहमति प्राप्त है और सभी पक्ष इसे शीघ्रातिशीघ्र लागू करने के इच्छुक हैं। उन्होंने इसे ईयू के इतिहास में एक दुर्लभ उपलब्धि बताया, क्योंकि किसी भी व्यापार समझौते पर सभी सदस्य देशों की एकमत सहमति मिलना असाधारण है।
समझौते की प्रमुख विशेषताएँ
गोयल ने कहा, 'मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ कि इस एफटीए पर बेहद संतुलित तरीके से बातचीत हुई है। दोनों पक्षों के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। यही वजह है कि भारत-ईयू एफटीए के खिलाफ कहीं से भी असहमति की आवाज नहीं उठी है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत में भी इस समझौते को व्यापक समर्थन मिला है।
समझौते से भारत के मत्स्य पालन, वस्त्र और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही रसायन और फार्मास्युटिकल उत्पादों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान जताया गया है।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री का मुंबई दौरा
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर 4 सितंबर को नई दिल्ली से मुंबई पहुँचे, जहाँ महाराष्ट्र सरकार के प्रोटोकॉल एवं विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। मुंबई दौरे के दौरान डी वेवर हीरा कारोबार, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे, जिससे भारत-बेल्जियम आर्थिक संबंध और मजबूत होने की संभावना है।
डी वेवर ने इस समझौते को 'रणनीतिक खुलेपन की अभिव्यक्ति' बताते हुए कहा कि यह दोनों पक्षों के बीच विश्वास और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा, 'दुनिया कठिन दौर से गुजर रही है, लेकिन भारत और यूरोप ने साझेदारी का रास्ता चुना है, जबकि कई देश बाज़ार बंद करने और शुल्क बढ़ाने की राह पर चल रहे हैं।' यह टिप्पणी वैश्विक संरक्षणवाद के बढ़ते माहौल में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बार्ट डी वेवर के बीच हुई वार्ता में दोनों देशों ने अगले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 13 अरब डॉलर से बढ़ाकर 26 अरब डॉलर — यानी दोगुना — करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार संरक्षणवाद और अनिश्चितता अपने चरम पर है।
संस्थागत ढाँचा और निवेश तंत्र
दोनों देशों ने इन्वेस्टमेंट फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म स्थापित करने और नियमित भारत-बेल्जियम बिजनेस फोरम को संस्थागत रूप देने पर सहमति जताई। इसके अलावा बेल्जियम के संप्रभु संपत्ति कोष और भारत के नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) के बीच सहयोग तथा फिनटेक क्षेत्र में साझेदारी पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह एफटीए समयबद्ध तरीके से लागू होता है, तो यह भारत के निर्यात मानचित्र को नई दिशा दे सकता है — विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो अब तक यूरोपीय बाज़ार में शुल्क बाधाओं के कारण पिछड़ रहे थे।