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भारत-ईयू एफटीए को सभी 27 सदस्य देशों का समर्थन, पीयूष गोयल बोले — 'दोनों पक्षों के हितों की रक्षा'

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भारत-ईयू एफटीए को सभी 27 सदस्य देशों का समर्थन, पीयूष गोयल बोले — 'दोनों पक्षों के हितों की रक्षा'

सारांश

वैश्विक संरक्षणवाद के दौर में भारत और यूरोपीय संघ ने साझेदारी का रास्ता चुना। सभी 27 ईयू सदस्य देशों की दुर्लभ एकमत सहमति के साथ एफटीए आगे बढ़ रहा है — और द्विपक्षीय व्यापार को 13 से 26 अरब डॉलर तक दोगुना करने का लक्ष्य तय हो चुका है।

मुख्य बातें

भारत-ईयू एफटीए को यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देशों की एकमत सहमति प्राप्त है — जिसे वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने ऐतिहासिक रूप से दुर्लभ बताया।
समझौते से मत्स्य पालन, वस्त्र, फुटवियर, रसायन और फार्मास्युटिकल क्षेत्रों को प्रमुख लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारत और बेल्जियम ने अगले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार 13 अरब डॉलर से बढ़ाकर 26 अरब डॉलर करने का लक्ष्य तय किया।
इन्वेस्टमेंट फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म और नियमित भारत-बेल्जियम बिजनेस फोरम को संस्थागत रूप दिया जाएगा।
बेल्जियम के संप्रभु संपत्ति कोष और भारत के एनआईआईएफ के बीच सहयोग तथा फिनटेक साझेदारी पर भी सहमति बनी।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 4 सितंबर 2026 को मुंबई में आयोजित भारत-बेल्जियम उच्चस्तरीय संवाद में घोषणा की कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को ईयू के सभी 27 सदस्य देशों की एकमत सहमति प्राप्त है और सभी पक्ष इसे शीघ्रातिशीघ्र लागू करने के इच्छुक हैं। उन्होंने इसे ईयू के इतिहास में एक दुर्लभ उपलब्धि बताया, क्योंकि किसी भी व्यापार समझौते पर सभी सदस्य देशों की एकमत सहमति मिलना असाधारण है।

समझौते की प्रमुख विशेषताएँ

गोयल ने कहा, 'मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ कि इस एफटीए पर बेहद संतुलित तरीके से बातचीत हुई है। दोनों पक्षों के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। यही वजह है कि भारत-ईयू एफटीए के खिलाफ कहीं से भी असहमति की आवाज नहीं उठी है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत में भी इस समझौते को व्यापक समर्थन मिला है।

समझौते से भारत के मत्स्य पालन, वस्त्र और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही रसायन और फार्मास्युटिकल उत्पादों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान जताया गया है।

बेल्जियम के प्रधानमंत्री का मुंबई दौरा

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर 4 सितंबर को नई दिल्ली से मुंबई पहुँचे, जहाँ महाराष्ट्र सरकार के प्रोटोकॉल एवं विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। मुंबई दौरे के दौरान डी वेवर हीरा कारोबार, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे, जिससे भारत-बेल्जियम आर्थिक संबंध और मजबूत होने की संभावना है।

डी वेवर ने इस समझौते को 'रणनीतिक खुलेपन की अभिव्यक्ति' बताते हुए कहा कि यह दोनों पक्षों के बीच विश्वास और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा, 'दुनिया कठिन दौर से गुजर रही है, लेकिन भारत और यूरोप ने साझेदारी का रास्ता चुना है, जबकि कई देश बाज़ार बंद करने और शुल्क बढ़ाने की राह पर चल रहे हैं।' यह टिप्पणी वैश्विक संरक्षणवाद के बढ़ते माहौल में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।

द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बार्ट डी वेवर के बीच हुई वार्ता में दोनों देशों ने अगले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 13 अरब डॉलर से बढ़ाकर 26 अरब डॉलर — यानी दोगुना — करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार संरक्षणवाद और अनिश्चितता अपने चरम पर है।

संस्थागत ढाँचा और निवेश तंत्र

दोनों देशों ने इन्वेस्टमेंट फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म स्थापित करने और नियमित भारत-बेल्जियम बिजनेस फोरम को संस्थागत रूप देने पर सहमति जताई। इसके अलावा बेल्जियम के संप्रभु संपत्ति कोष और भारत के नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) के बीच सहयोग तथा फिनटेक क्षेत्र में साझेदारी पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह एफटीए समयबद्ध तरीके से लागू होता है, तो यह भारत के निर्यात मानचित्र को नई दिशा दे सकता है — विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो अब तक यूरोपीय बाज़ार में शुल्क बाधाओं के कारण पिछड़ रहे थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है — क्योंकि ईयू के भीतर 'सहमति' और 'अनुसमर्थन' के बीच की राह अक्सर लंबी और अप्रत्याशित होती है। भारत-ईयू एफटीए की बातचीत वर्ष 2007 में शुरू हुई थी और डेढ़ दशक से अधिक समय तक अटकी रही — इसलिए 'जल्द लागू करने' के आश्वासन को ऐतिहासिक संदर्भ में परखना ज़रूरी है। वस्त्र और फार्मा क्षेत्र को लाभ का दावा सराहनीय है, परंतु यूरोपीय बाज़ार में पर्यावरण और श्रम मानकों की बाधाएँ किस हद तक दूर होंगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य महत्त्वाकांक्षी है, लेकिन इसे हासिल करने के लिए ठोस क्रियान्वयन तंत्र और समयसीमा की पारदर्शिता अनिवार्य होगी।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ईयू एफटीए क्या है और इसे सभी 27 देशों का समर्थन क्यों अहम है?
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश को बाधा-मुक्त बनाने की दिशा में एक व्यापक द्विपक्षीय संधि है। ईयू के सभी 27 सदस्य देशों की एकमत सहमति इसलिए दुर्लभ और महत्त्वपूर्ण है क्योंकि ऐसे बहुपक्षीय ढाँचे में किसी एक देश की आपत्ति भी समझौते को अटका सकती है।
इस एफटीए से भारत के किन क्षेत्रों को सबसे अधिक फायदा होगा?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, मत्स्य पालन, वस्त्र और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के साथ-साथ रसायन और फार्मास्युटिकल उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। ये वे क्षेत्र हैं जो अभी तक यूरोपीय बाज़ार में उच्च शुल्क बाधाओं का सामना करते रहे हैं।
भारत और बेल्जियम के बीच व्यापार का नया लक्ष्य क्या है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की वार्ता में दोनों देशों ने अगले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 13 अरब डॉलर से बढ़ाकर 26 अरब डॉलर — यानी दोगुना — करने का लक्ष्य तय किया है।
इन्वेस्टमेंट फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म क्या होगा और इसका क्या उद्देश्य है?
भारत और बेल्जियम ने बेल्जियम के निवेश को भारत में तेज़ी से स्वीकृति दिलाने के लिए इन्वेस्टमेंट फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म स्थापित करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही नियमित भारत-बेल्जियम बिजनेस फोरम को भी संस्थागत रूप दिया जाएगा, जिससे दोनों देशों के कारोबारी समुदायों के बीच निरंतर संवाद बना रहे।
भारत-ईयू एफटीए पर बातचीत कब से चल रही है और अब यह कहाँ तक पहुँची है?
भारत-ईयू एफटीए पर औपचारिक वार्ता वर्ष 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन विभिन्न मतभेदों के कारण यह डेढ़ दशक से अधिक समय तक अटकी रही। अब सभी 27 ईयू सदस्य देशों की एकमत सहमति और दोनों पक्षों की 'जल्द लागू करने' की इच्छाशक्ति के साथ यह समझौता अपने अंतिम चरण में माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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