पीयूष गोयल की जर्मन नेताओं से मुलाकात, भारत-ईयू एफटीए और द्विपक्षीय व्यापार पर अहम चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार, 14 मई 2026 को जर्मनी के वरिष्ठ नेताओं और नीति निर्माताओं के साथ भारत-जर्मनी आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने और भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार साझेदारी को गति देने पर विस्तृत वार्ता की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया सक्रिय रूप से जारी है।
चर्चा के मुख्य बिंदु
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया, 'चर्चाओं का मुख्य जोर कारोबारी माहौल को मजबूत करने, निवेश के प्रवाह को बढ़ाने और टेक्सटाइल, दवा, रिन्यूएबल एनर्जी, मोबिलिटी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे अहम सेक्टरों में सहयोग को गहरा करने पर था।' दोनों पक्षों ने करीबी औद्योगिक जुड़ाव के जरिए व्यापार विस्तार, इनोवेशन संवर्धन और मजबूत सप्लाई चेन निर्माण की संभावनाओं को स्वीकार किया।
एफटीए की पृष्ठभूमि और ताज़ा प्रगति
गौरतलब है कि जनवरी 2026 में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-ईयू एफटीए की दिशा में आगे बढ़ने की घोषणा की थी। इसके बाद मार्च 2026 में कैमरून में आयोजित विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के दौरान गोयल ने यूरोपीय व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविक से मुलाकात कर एफटीए पर हुई प्रगति की समीक्षा की थी।
गोयल ने उस बैठक के बाद एक्स पर लिखा था, 'हमने अपनी द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर भी चर्चा की।'
एफटीए का आर्थिक महत्व
दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच यह समझौता अब तक के सबसे बड़े व्यापारिक समझौतों में से एक माना जा रहा है। इस एफटीए के तहत भारत ने व्यापारिक मूल्य के हिसाब से ईयू को अपने 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात के लिए बाजार तक अभूतपूर्व पहुँच हासिल की है, जिससे 'मेक इन इंडिया' पहल को जबरदस्त बल मिलेगा।
यह समझौता केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं है — यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को भी प्रोत्साहित करता है।
किन क्षेत्रों को होगा सबसे अधिक लाभ
मंत्री गोयल के अनुसार, यह एफटीए टेक्सटाइल, कपड़ा, चमड़ा, जूते-चप्पल, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग सामान और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को निर्णायक बढ़ावा देगा। नियम-आधारित व्यापार और नीतिगत स्थिरता सुनिश्चित होने से भारत घरेलू और विदेशी निवेश के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बनेगा, जिससे छोटे व्यवसायों, स्टार्टअप और कामगारों के लिए नए अवसर सृजित होंगे।
आगे की राह
जर्मनी के साथ यह वार्ता भारत-ईयू एफटीए को अंतिम रूप देने की व्यापक कूटनीतिक कोशिशों का हिस्सा है। आने वाले महीनों में वार्ताओं की गति और अधिक तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि दोनों पक्ष समझौते पर हस्ताक्षर की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।