कपास आयात शुल्क हटाने की माँग: CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, तमिलनाडु के कपड़ा उद्योग पर संकट
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 14 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कपास पर लागू 11 प्रतिशत आयात शुल्क को तत्काल समाप्त करने का आग्रह किया है। विजय ने आगाह किया कि कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल के चलते राज्य का कपड़ा और परिधान उद्योग गहरे संकट में फँसता जा रहा है, जिससे लाखों श्रमिकों की आजीविका पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में बताया कि पिछले दो महीनों में कपास की कीमत ₹54,700 प्रति कैंडी से बढ़कर ₹67,700 प्रति कैंडी हो गई है — यानी लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी। इसी अवधि में धागे की कीमत भी ₹301 प्रति किलोग्राम से बढ़कर ₹330 प्रति किलोग्राम पहुँच गई है।
उनके अनुसार यह मूल्य वृद्धि मुख्यतः घरेलू कपास उत्पादन में आई कमी और देशभर में बढ़ी हुई व्यापारिक गतिविधियों के कारण हुई है, जिसने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है।
उद्योग पर असर
तमिलनाडु को भारत का सबसे बड़ा कपड़ा और परिधान निर्यातक राज्य बताते हुए मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि यह उद्योग लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार देता है। कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति अब केवल आयात के ज़रिये ही संभव है, लेकिन 11 प्रतिशत आयात शुल्क इसे महँगा और अव्यावहारिक बना रहा है।
गौरतलब है कि भारत के कुल परिधान निर्यात में तमिलनाडु की हिस्सेदारी उल्लेखनीय है, और इस क्षेत्र में आई किसी भी रुकावट का असर न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था पर बल्कि राष्ट्रीय निर्यात आँकड़ों पर भी पड़ता है।
सरकार से आग्रह
मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया कि कपड़ा निर्माताओं को राहत देने के लिए कपास पर लगने वाले आयात शुल्क को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। उनका तर्क है कि यह कदम न उठाया गया तो उद्योग में उत्पादन लागत इतनी बढ़ जाएगी कि निर्यात आदेश प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाएँगे।
आम जनता पर असर
इस संकट का सबसे अधिक बोझ उन कामगारों पर पड़ रहा है जो बुनाई, कताई और परिधान निर्माण इकाइयों में कार्यरत हैं। कच्चे माल की ऊँची कीमतों के कारण कई छोटी इकाइयाँ उत्पादन घटाने या बंद करने पर विचार कर रही हैं, जिससे रोज़गार का सीधा नुकसान हो सकता है।
क्या होगा आगे
केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उद्योग जगत की नज़रें अब केंद्रीय वाणिज्य एवं कपड़ा मंत्रालय पर टिकी हैं कि वे इस माँग पर क्या रुख अपनाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में भारतीय परिधान निर्यात को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।