पश्चिम एशिया में युद्ध का महाराष्ट्र के कपड़ा उद्योग पर बढ़ता संकट, रईस शेख ने मांगी राहत

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पश्चिम एशिया में युद्ध का महाराष्ट्र के कपड़ा उद्योग पर बढ़ता संकट, रईस शेख ने मांगी राहत

सारांश

महाराष्ट्र के कपड़ा उद्योग पर पश्चिम एशिया के युद्ध का गंभीर प्रभाव बढ़ता जा रहा है। विधायक रईस शेख ने सरकार से राहत पैकेज की मांग की है। क्या सरकार इस संकट को समझेगी?

Key Takeaways

  • पश्चिम एशिया में युद्ध का कपड़ा उद्योग पर गंभीर प्रभाव
  • रईस शेख की सरकार से राहत पैकेज की मांग
  • कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि
  • उद्योग की आर्थिक स्वास्थ्य पर बुरा असर
  • सरकार को तत्काल कदम उठाने की जरूरत

मुंबई, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के चलते महाराष्ट्र के कपड़ा उद्योग पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव को लेकर भिवंडी (पूर्व) से समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने राज्य सरकार से तत्काल विशेष राहत पैकेज की घोषणा करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कपड़ा मंत्री संजय सावकारे को पत्र लिखकर इस गंभीर परिस्थिति की ओर ध्यान देने की अपील की है।

विधायक रईस शेख ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में हो रहे संघर्ष का प्रत्यक्ष प्रभाव भारत के कपड़ा निर्यात पर पड़ा है, जिससे उद्योग लगभग थम सा गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि निर्यात में रुकावट के साथ ही कपास और धागे जैसे कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिसके कारण कई इकाइयों को सप्ताह में दो से तीन दिन उत्पादन बंद करना पड़ रहा है। इस स्थिति ने उद्योग की आर्थिक सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

उन्होंने अपने पत्र में राज्य कपड़ा निगम द्वारा किए गए सर्वेक्षण का संदर्भ देते हुए बताया कि मार्च 2026 में ही महाराष्ट्र के कपड़ा उद्योग को लगभग 4000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। राज्य में लगभग 9.48 लाख पावरलूम और 4000 हैंडलूम संचालित हैं, जो देश के कुल पावरलूम का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा हैं। ऐसे में यह संकट न केवल उद्योग बल्कि लाखों श्रमिकों की आजीविका के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गया है।

रईस शेख ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो बड़ा पैमाने पर श्रमिकों का पलायन शुरू हो सकता है, जैसा कि कोविड-19 महामारी के दौरान देखा गया था।

उन्होंने कहा कि कृषि के बाद कपड़ा उद्योग राज्य में रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। इसके प्रभावित होने से व्यापक सामाजिक-आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भिवंडी, मालेगांव और इचलकरंजी जैसे प्रमुख कपड़ा केंद्र इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला और निर्यात चैनल दोनों में बाधा आने से उत्पादन लागत बढ़ गई है और मांग में भारी गिरावट आई है। इसके साथ ही, पहले से ही ऊंची बिजली दरों से जूझ रहे उद्योग पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है।

विधायक रईस ने सरकार से आग्रह किया है कि उद्योग को राहत देने के लिए बिजली दरों में सब्सिडी, कर्ज में छूट और निर्यात प्रोत्साहन जैसी तत्काल नीतिगत घोषणाएं की जाएं ताकि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को ढहने से बचाया जा सके।

Point of View

यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र का कपड़ा उद्योग एक महत्वपूर्ण आर्थिक धारा है। इस संकट का प्रभाव न केवल उद्योग पर, बल्कि लाखों श्रमिकों की आजीविका पर भी पड़ेगा। सरकार को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।
NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

पश्चिम एशिया में युद्ध का कपड़ा उद्योग पर क्या असर है?
युद्ध के कारण निर्यात में कमी आई है और कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
रईस शेख ने सरकार से क्या मांग की है?
उन्होंने तत्काल विशेष राहत पैकेज की घोषणा करने की मांग की है।
कपड़ा उद्योग में कितने श्रमिक काम कर रहे हैं?
महाराष्ट्र में लाखों श्रमिक कपड़ा उद्योग से जुड़े हुए हैं।
क्या सरकार ने कोई कदम उठाया है?
अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, लेकिन विधायक ने सरकार से आग्रह किया है।
इस संकट का क्या समाधान हो सकता है?
बिजली दरों में सब्सिडी, कर्ज में छूट और निर्यात प्रोत्साहन जैसी नीतियों की आवश्यकता है।
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