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आंध्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का अनोखा विरोध प्रदर्शन: किसानों की समस्याओं को उजागर करते हुए ज्ञापन सौंपा

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आंध्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का अनोखा विरोध प्रदर्शन: किसानों की समस्याओं को उजागर करते हुए ज्ञापन सौंपा

सारांश

आंध्र प्रदेश की कांग्रेस अध्यक्ष वाईएस शर्मिला रेड्डी ने कडप्पा जिले में केला उत्पादक किसानों की समस्याओं के खिलाफ अद्वितीय विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें किसानों के संकट और गिरती कीमतों की गंभीरता को उजागर किया।

मुख्य बातें

किसानों की समस्याएँ गंभीर हैं, गिरती कीमतें एक बड़ा मुद्दा हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने ज्ञापन सौंपा, सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की कमी के कारण किसान मजबूर हैं।
किसानों के लिए लाभकारी मूल्य निर्धारण की आवश्यकता है।
कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ खड़ी है।

अमरावती, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश में केला उत्पादन कर रहे किसानों की कठिनाइयों के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वाईएस शर्मिला रेड्डी ने बुधवार को एक विशेष विरोध प्रदर्शन किया। वह कडप्पा जिले के कलेक्टर कार्यालय में केले से भरा एक ट्रक लेकर पहुँचीं।

उन्होंने गिरती कीमतों से प्रभावित किसानों के साथ एकजुटता दर्शाते हुए यह ट्रक कलेक्ट्रेट तक पहुँचाया।

किसानों के सामने उपस्थित संकट को उजागर करते हुए और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील करते हुए उन्होंने संयुक्त कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा।

वाईएस शर्मिला ने किसानों की स्थिति को गंभीर बताते हुए कीमतों में भारी गिरावट का उल्लेख किया, जो 26,000 रुपए प्रति टन से घटकर 4,000 रुपए प्रति टन तक पहुँच गई है। उन्होंने व्यापारियों पर आरोप लगाया कि वे बाजार में हेरफेर कर रहे हैं, जिससे किसानों को कई वर्षों से लगातार नुकसान हो रहा है।

आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के अध्यक्ष ने बताया कि केले की खेती में प्रति एकड़ 2-3 लाख रुपए का भारी निवेश करना पड़ता है, जिससे औसतन 30 टन केले की पैदावार होती है। मौजूदा कीमतों पर किसान अपनी बुनियादी लागत भी नहीं वसूल कर पा रहे हैं।

शर्मिला ने कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की कमी पर भी जोर दिया, जो किसानों को मजबूरन अपनी फसल बेचने के लिए विवश करता है। उन्होंने फसल बीमा सहायता की कमी पर चिंता व्यक्त की और कहा कि किसानों से किए गए वादे पूरे नहीं किए गए हैं, जिनमें कथित तौर पर 170 करोड़ रुपए के लंबित बीमा बकाया भी शामिल हैं।

उन्होंने प्रभावी मूल्य स्थिरीकरण उपायों को लागू करने में विफल रहने के लिए सरकार की लगातार आलोचना की।

पिछली सरकार ने 3,000 करोड़ रुपए के स्थिरीकरण कोष की घोषणा की थी, जबकि वर्तमान गठबंधन सरकार ने 500 करोड़ रुपए आवंटित किए थे, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को कोई ठोस वित्तीय सहायता नहीं मिली है।

उन्होंने लाभकारी मूल्य निर्धारण, व्यापारी गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, असली पौधों की उपलब्धता और किसानों को मुआवजा देने के लिए मूल्य स्थिरीकरण तंत्र के माध्यम से धन के वितरण की मांग की।

अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए शर्मिला ने कहा कि जब तक किसानों को न्याय नहीं मिल जाता, कांग्रेस पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे न केवल स्थानीय किसानों के लिए, बल्कि पूरे देश के कृषि क्षेत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। सरकार को किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए तत्पर रहना चाहिए।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किसानों की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
व्यापारी गिरोहों द्वारा बाजार में हेरफेर और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की कमी मुख्य कारण हैं।
खेती में निवेश की औसत लागत क्या है?
एकड़ पर 2-3 लाख रुपए का निवेश आवश्यक होता है।
राष्ट्र प्रेस
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