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हुब्बल्ली में चना खरीद के लिए बोरी की कमी, किसान संकट में

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हुब्बल्ली में चना खरीद के लिए बोरी की कमी, किसान संकट में

सारांश

कर्नाटक के हुब्बल्ली में चना खरीद के लिए बोरियों की कमी से किसानों का जीवन संकट में है। प्रशासनिक लापरवाही के चलते खरीद प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिससे फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है। जानें किसानों की समस्याएं और उनकी मांगें।

मुख्य बातें

बोरियों की कमी से किसानों को खरीद में समस्या हो रही है।
किसान प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
खरीद केंद्रों पर चना खुले में पड़ा है।
बेमौसम बारिश का खतरा किसानों के लिए चिंता का विषय है।
सरकार से तत्काल सहायता की मांग की जा रही है।

हुब्बल्ली, १७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के हुब्बल्ली में समर्थन मूल्य केंद्रों पर चना खरीद के लिए गन्नी बैग की गंभीर कमी के कारण किसानों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। किसान निरंतर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उनका कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण खरीद प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिससे उनकी फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।

किसानों के लगातार विरोध के बाद हाल ही में जिले में मूंगफली की खरीद समर्थन मूल्य पर शुरू हुई थी, लेकिन चना खरीद की प्रक्रिया लॉजिस्टिक समस्याओं में फंस गई है। खरीद केंद्रों पर खाली बोरियों की कमी के कारण फसल को सुरक्षित रखने में कठिनाई हो रही है।

स्थिति यह है कि खरीद केंद्रों के बाहर चने के ढेर खुले में पड़े हुए हैं। कई किसानों को अपने घरों से पुरानी बोरियां लाकर खुद ही फसल भरकर केंद्रों पर भेजनी पड़ रही है, जो कि इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चना खरीद के लिए ३६ प्राथमिक कृषि सहकारी समिति केंद्रों पर कुल २३,३९३ किसानों ने पंजीकरण कराया है। लेकिन अब तक केवल ६,४०० किसान ही अपनी उपज बेच पाए हैं और २४ मार्च तक लगभग १,१४,०७८ क्विंटल चना खरीदा गया है। किसानों का आरोप है कि लगभग ६० प्रतिशत फसल अभी भी खरीद केंद्रों के बाहर पड़ी हुई है।

किसान नेता हेमन गौड़ा ने अधिकारियों के “गैर-जिम्मेदाराना रवैये” की आलोचना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में फसल उगाने वाले किसानों को अब खरीद के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। एक अन्य किसान शिवानंद ने कहा कि बोरियों की कमी के कारण पूरी प्रक्रिया ठप हो गई है और किसान बेहद परेशान हैं।

किसानों ने यह भी बताया कि बेमौसम बारिश का खतरा मंडरा रहा है, जिससे खुले में रखी फसल को भारी नुकसान हो सकता है। किसान चेनप्पा गौड़ा ने कहा, “अगर बारिश हो गई, तो हमारी पूरी फसल खराब हो जाएगी। हम कई दिनों से खरीद केंद्रों के बाहर बैठे हैं।”

धारवाड़ जिले में भी खरीद के आंकड़ों में असमानता देखने को मिली है। जहां नवलगुंड में सबसे ज्यादा खरीद हुई, वहीं हुब्बली तालुक में खरीद बेहद कम रही। उदाहरण के लिए, हुब्बली तालुक के कोलिवाड़ा नंबर-२ केंद्र पर केवल ७२ क्विंटल की खरीद हुई, जबकि धारवाड़ तालुक के हेब्बल्ली केंद्र पर २६२ क्विंटल चना खरीदा गया।

किसानों का कहना है कि पंजीकरण के एक महीने बाद भी कई लोगों को उपज लाने के लिए बुलावा नहीं आया है। कुछ मामलों में सहकारी समितियां किसानों द्वारा जमा कराई गई भरी बोरियां भी नहीं उठा रही हैं।

अधिकांश किसान कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं, ऐसे में खरीद में देरी से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और कई किसान मजबूरी में खुले बाजार में कम दाम पर फसल बेचने पर विचार कर रहे हैं।

किसानों ने सरकार से तुरंत पर्याप्त बोरियां उपलब्ध कराने और खरीद प्रक्रिया को सुचारू करने की मांग की है, ताकि उन्हें और नुकसान से बचाया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुब्बल्ली में चना खरीद की स्थिति क्या है?
हुब्बल्ली में चना खरीद के लिए बोरियों की कमी के कारण किसानों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
किसान इस स्थिति में क्या कर रहे हैं?
किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और प्रशासन से बोरियों की उपलब्धता की मांग कर रहे हैं।
क्या खरीद केंद्रों पर बोरियों की कमी है?
हां, खरीद केंद्रों पर बोरियों की कमी के कारण किसानों को अपनी फसल सुरक्षित रखने में कठिनाई हो रही है।
किसानों को अब तक कितनी फसल बेची गई है?
अब तक केवल ६,४०० किसानों ने अपनी उपज बेची है, जबकि ६० प्रतिशत चना खरीद केंद्रों के बाहर पड़ा है।
किसान सरकार से क्या मांग कर रहे हैं?
किसान सरकार से तत्काल बोरियों की उपलब्धता और खरीद प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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