मध्य प्रदेश: गेहूं खरीदी में देरी से किसानों को हो रहा भारी नुकसान - उमंग सिंघार
सारांश
Key Takeaways
- गेहूं खरीदी में देरी ने किसानों को संकट में डाला है।
- छोटे किसानों को नुकसान हो रहा है।
- सरकारी नीतियों में सुधार की आवश्यकता है।
- यूसीसी में दलित और आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
- कांग्रेस पार्टी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएगी।
भोपाल, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गेहूं खरीदी में हुई देरी पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि सरकार के निर्णय के कारण किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। आज नौ अप्रैल से राज्य में गेहूं की खरीदी का कार्य शुरू हुआ है, जबकि पिछले वर्ष यह प्रक्रिया मार्च में ही आरंभ हो गई थी। अब कांग्रेस इस खरीदी में हुई देरी के लिए सरकार को कठघरे में खड़ा कर रही है।
सिंघार ने गेहूं खरीदी में देरी को मध्य प्रदेश के किसानों के लिए एक गंभीर संकट बताते हुए कहा कि छोटे किसान, जिनके पास भंडारण की सुविधाएं नहीं हैं, एक माह की देरी के चलते मजबूरी में अपने अनाज को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हो गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नीतियों का लाभ सीधे किसानों तक नहीं पहुंच रहा है, बल्कि यह बिचौलियों और एजेंटों के पास जा रहा है। प्रति क्विंटल 400 रुपये का लाभ किसानों के बजाय दलालों की जेब में जा रहा है, जो कि सीधा कमीशनखोरी का मामला है।
नेता प्रतिपक्ष ने यह प्रश्न भी उठाया कि अनावश्यक प्रतिबंधों के कारण खरीदी को सीमित किया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि सरकार की बातों और कार्यों में एक बड़ा अंतर है। राज्य में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया चल रही है, और इस पर उन्होंने कहा कि यदि दलित और आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी कर उन्हें एक समान ढांचे में जबरन समाहित किया गया, तो यह उनके साथ अन्याय होगा, और इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी जाएगी।
उन्होंने कहा कि मैं समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर मध्य प्रदेश सरकार से स्पष्ट जवाब मांगता हूं, क्या इसमें दलित और आदिवासियों को शामिल किया जाएगा या नहीं? क्या उनके अधिकार, परंपराएं और रीति-रिवाजों की रक्षा की जाएगी या नहीं? यदि उनकी पहचान और अधिकारों की अनदेखी होगी, तो यह दलितों और मध्य प्रदेश के आदिवासियों के साथ अन्याय होगा। कांग्रेस पार्टी इस अन्याय के खिलाफ मजबूत आवाज उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।