हाटीघीसा की मांग: शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार देने वाली सरकार की जरूरत
सारांश
Key Takeaways
- हाटीघीसा गांव के निवासी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
- गांव में रोजगार की भारी कमी है।
- स्थानीय लोग मुख्यमंत्री से निराश हैं।
- बुनियादी सुविधाओं की कमी से ग्रामीण परेशान हैं।
- निर्वाचन में उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने का आश्वासन दिया गया है।
दार्जिलिंग, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच, सभी राजनीतिक दल अपने-अपने प्रचार में जुटे हैं। नेता हर गांव में जाकर मतदाताओं को आश्वासन दे रहे हैं कि उनकी जीत पर सभी वादे पूरे किए जाएंगे। लेकिन दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी उपमंडल में स्थित नक्सलबाड़ी के पास के एक छोटे से गांव हाटीघीसा के लोग कहते हैं कि उन्हें ऐसी सरकार नहीं चाहिए, जहां रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, और पीने का साफ पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी न हों। वे ऐसी शासन व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जो उनके गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार की ठोस व्यवस्था करे और दैनिक जीवन की समस्याओं का समाधान करे।
गांव के निवासियों के साथ हुई बातचीत में यह सामने आया कि यहां कई बुनियादी समस्याएं अब भी बरकरार हैं। पहले यहां पीने के पानी की बेहद कमी थी; लोग नदियों से पानी लाने पर मजबूर थे। अब थोड़ी बहुत पानी की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियाँ हैं। पहले सड़कें भी नहीं थीं; अब मार्ग कुछ ठीक हो गए हैं, फिर भी विकास की कमी स्पष्ट है।
गांव के लोगों ने बताया कि यहां कोई बड़ा कार्य नहीं हुआ है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए कोई विशेष प्रबंध नहीं हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कभी भी इस क्षेत्र में नहीं आतीं।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, "हम रोज कमाकर खाने वाले लोग हैं। हमें आवास की जरूरत है, लेकिन घर नहीं मिलते। गांव में प्राइमरी स्कूल तो है, लेकिन अस्पताल की जगह केवल आशा वर्कर काम करती हैं। हमें ऐसी सरकार चाहिए जो सुविधाएं उपलब्ध कराए और हमारे दुखों का समाधान करे। बंगाल में ऐसी एक सरकार होनी चाहिए जिससे हमारे परिवार को कोई दिक्कत न हो। मेरे पास पांच वोट हैं।"
एक अन्य व्यक्ति, जो ड्राइवर का काम करता है, ने कहा कि बंगाल में काम की कमी है। समस्याएं बहुत हैं। अच्छा स्कूल नहीं है। प्राइमरी स्कूल केवल खिचड़ी खाने के लिए है। अस्पताल की कोई सुविधा नहीं है। हमें एक ऐसी सरकार चाहिए जो रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करे। आयुष्मान कार्ड नहीं है, यदि होता तो हम भी इलाज करा सकते थे।
विष्णु मंडल ने कहा कि गांव में पीने का पानी कभी-कभी ही आता है। एक अच्छी सरकार की जरूरत है, ताकि विकास हो और लोगों को शिक्षा-स्वास्थ्य की सुविधाएं मिलें।
विक्रम ने कहा, "हमारी कोई परेशानी नहीं है, लेकिन सरकार की ओर से घर नहीं मिला है। पीने के लिए साफ जल नहीं है। हम रोज कमाकर खाने वाले हैं। मेरा बच्चा पढ़ा-लिखा है, लेकिन उसके पास नौकरी नहीं है। उसके लिए नौकरी होनी चाहिए। ऐसी सरकार होनी चाहिए जो धरातल पर काम कर सके।"
लेफ्ट नेता दीपू हलदर ने कहा कि 1952 से चुनाव होते आ रहे हैं, और 2026 में बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। लेकिन, इतने सालों बाद भी यदि गांव-देहात की स्थिति नहीं बदली, तो यह चिंता का विषय है।
इस दौरान कुछ ऐसे लोग भी मिले जिन्होंने वोटर लिस्ट से नाम कटने की शिकायत की। एक व्यक्ति ने कहा कि एसआईआर के दौरान उनका नाम काट दिया गया। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि उनके वोट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं।