नंदिनी दूध ₹8-10 प्रति लीटर महंगा होने की संभावना, कर्नाटक सरकार कर रही गहन समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार राज्य के सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों की उस माँग पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है, जिसमें नंदिनी दूध की खरीद और विक्रय कीमत में ₹8 से ₹10 प्रति लीटर की वृद्धि का अनुरोध किया गया है। 22 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के विधान सौधा में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अधिकारियों को पड़ोसी राज्यों की उत्पादन लागत, खरीद मात्रा और प्रचलित कीमतों का व्यापक तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। यह निर्देश इस बात का संकेत है कि सरकार अंतिम निर्णय से पहले बाजार की समग्र स्थिति की पड़ताल करेगी।
प्रतिनिधिमंडल की माँग और बैठक का घटनाक्रम
सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को विधान सौधा में मुख्यमंत्री शिवकुमार से भेंट की और बढ़ती उत्पादन लागत तथा किसानों को बेहतर प्रतिफल दिलाने की ज़रूरत का हवाला देते हुए मूल्य संशोधन का ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने खरीद और विक्रय — दोनों मूल्यों में एक साथ बढ़ोतरी की माँग रखी।
बेंगलुरु शहरी और ग्रामीण दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (BAMUL) के अध्यक्ष डी.के. सुरेश, जो मुख्यमंत्री शिवकुमार के छोटे भाई भी हैं, ने प्रतिनिधिमंडल की ओर से बात की। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पिछले एक दशक में पशु आहार की कीमतों में हुई वृद्धि, प्रति लीटर दूध उत्पादन की वास्तविक लागत और सहकारी संघों के बाहर किसानों द्वारा बेचे जाने वाले दूध की मात्रा के बारे में विस्तृत आँकड़े माँगे।
पड़ोसी राज्यों से तुलनात्मक स्थिति
सुरेश ने बताया कि कर्नाटक की सहकारी समितियाँ वर्तमान में ₹35 प्रति लीटर की दर से टोंड दूध खरीद रही हैं। इसकी तुलना में आंध्र प्रदेश में यह खरीद मूल्य ₹41.50, केरल में ₹41.80, महाराष्ट्र में ₹41 और तमिलनाडु में ₹42.24 प्रति लीटर है। उनके अनुसार कर्नाटक में दूध का अधिकतम खुदरा मूल्य पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम से कम ₹12 प्रति लीटर कम है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब विभिन्न राज्यों में सहकारी संगठन और निजी डेयरी कंपनियाँ दूध एवं दूध उत्पादों की कीमतें लगातार बढ़ा रही हैं। सुरेश ने कहा, 'उपभोक्ताओं के हित में हमने पिछले डेढ़ साल से दूध की कीमतों में वृद्धि नहीं की है।'
किसानों पर आर्थिक दबाव
सुरेश ने बताया कि पशुओं के चारे, दवाओं और अन्य आवश्यक सामग्रियों पर बढ़ते खर्च के कारण दूध उत्पादन की लागत में पर्याप्त वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति के कारण दुग्ध उत्पादक किसानों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कृषि आय और चारे की उपलब्धता दोनों प्रभावित हुई हैं।
इसके साथ ही निजी डेयरी कंपनियाँ अधिक मात्रा में दूध खरीदने का प्रयास कर रही हैं, जिससे कर्नाटक में सहकारी संघों के समक्ष प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ रहा है। यदि किसान निजी कंपनियों को दूध बेचना शुरू करते हैं तो सहकारी ढाँचे की स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
आम उपभोक्ता पर संभावित असर
यदि ₹8 से ₹10 प्रति लीटर की बढ़ोतरी को मंज़ूरी मिलती है, तो बेंगलुरु और कर्नाटक के अन्य शहरों में नंदिनी दूध के उपभोक्ताओं के मासिक खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। हालाँकि, अंतिम निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है और सरकार तुलनात्मक डेटा की समीक्षा के बाद ही कोई कदम उठाएगी।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री शिवकुमार के निर्देश के अनुसार अधिकारी उत्पादन लागत, खरीद मात्रा, बाजार की स्थिति और पड़ोसी राज्यों की तुलनात्मक कीमतों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार मूल्य वृद्धि पर अंतिम निर्णय करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कर्नाटक सरकार मूल्य वृद्धि को मंज़ूरी देती है, तो यह राज्य के डेयरी क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव का संकेत होगा।