नंदिनी दूध ₹8 प्रति लीटर महंगा: CM शिवकुमार बोले — किसान और गोमाता की रक्षा के लिए ज़रूरी फैसला
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए राज्य में नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने के निर्णय का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह कदम सूखे के कारण घटते उत्पादन, किसानों की आर्थिक मुश्किलों और पशुओं की उचित देखभाल सुनिश्चित करने की अनिवार्यता को देखते हुए उठाया गया है।
मूल्य वृद्धि का ब्यौरा
कर्नाटक सरकार और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) ने 1 नवंबर 2026 से नंदिनी दूध के खुदरा मूल्य में ₹8 प्रति लीटर और दही की कीमत में ₹14 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बताया कि दूध उत्पादक संगठनों की ओर से ₹12 प्रति लीटर की वृद्धि की माँग की जा रही थी, जबकि सरकार ने इसे ₹8 प्रति लीटर तक सीमित रखा।
उन्होंने यह भी बताया कि पड़ोसी राज्यों में दूध की कीमतें पहले से कर्नाटक से अधिक हैं, जिसे देखते हुए यह बढ़ोतरी तुलनात्मक रूप से संतुलित कही जा सकती है।
किसानों और पशुपालन की चुनौती
शिवकुमार ने कहा, 'यह फैसला किसानों और गायों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी था। सूखे के कारण दूध उत्पादन भी कम हो रहा है। गायों की रक्षा के लिए उन्हें अच्छा चारा और भोजन देना आवश्यक है। किसानों को अपने पशुओं की सही देखभाल के लिए आर्थिक रूप से सक्षम होना चाहिए।'
उन्होंने आगे जोड़ा कि यदि किसानों की आमदनी पर्याप्त नहीं होगी, तो वे पशुओं के चारे पर खर्च कम करने को मजबूर होंगे — जिसका सीधा असर मवेशियों के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों पर पड़ेगा।
दही और अन्य दुग्ध उत्पादों पर सरकार का रुख
दही की कीमत में ₹14 प्रति लीटर की बढ़ोतरी को लेकर उठे सवालों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार सीधे तौर पर दही के दाम नियंत्रित नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, 'जहाँ तक फैट की मात्रा का सवाल है, अधिक फैट वाले उत्पादों की कीमत उसी के अनुसार तय की जाती है।' उन्होंने कहा कि दूध की कीमतों को सरकार ने नियंत्रण में रखा है और इस पहलू को भी ध्यान में रखना चाहिए।
निर्णय की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि KMF देश की सबसे बड़ी दुग्ध सहकारी संस्थाओं में से एक है और नंदिनी ब्रांड कर्नाटक के लाखों परिवारों की रोज़मर्रा की ज़रूरत है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई ज़िलों में सूखे की स्थिति के कारण चारे की उपलब्धता और पशुपालन की लागत दोनों बढ़ी हैं।
शिवकुमार ने बताया कि सरकार ने कई वर्षों तक विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया है, और इसका उद्देश्य दूध उत्पादक किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है।
आम उपभोक्ता पर असर और आगे की राह
₹8 प्रति लीटर की बढ़ोतरी से शहरी और ग्रामीण दोनों उपभोक्ताओं के मासिक खर्च पर सीधा असर पड़ेगा। 1 नवंबर 2026 से लागू होने वाले इस संशोधित मूल्य के साथ, सरकार और KMF के लिए यह भी सुनिश्चित करना ज़रूरी होगा कि किसानों तक बढ़ी हुई आय का उचित हिस्सा वास्तव में पहुँचे।