31 अक्टूबर 2026
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काशी स्टेशन बनेगा मेगा ट्रांसपोर्ट हब: 50,000 यात्रियों की क्षमता, 6 प्लेटफॉर्म — वैष्णव

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काशी स्टेशन बनेगा मेगा ट्रांसपोर्ट हब: 50,000 यात्रियों की क्षमता, 6 प्लेटफॉर्म — वैष्णव

सारांश

काशी रेलवे स्टेशन अब सिर्फ एक ट्रेन स्टॉप नहीं रहेगा — रेल मंत्री वैष्णव के मुताबिक यह फुटबॉल मैदान के बराबर कॉनकोर्स, 50,000 यात्री क्षमता और 6 प्लेटफॉर्म के साथ वाराणसी का मेगा ट्रांसपोर्ट हब बनेगा। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन इसी बदलाव की पहली कड़ी है।

मुख्य बातें

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 31 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में काशी स्टेशन के विकास कार्यों का निरीक्षण किया।
स्टेशन पर फुटबॉल मैदान के बराबर विशाल कॉनकोर्स बनाया जाएगा, जिसमें एक साथ 50,000 यात्री प्रतीक्षा कर सकेंगे।
स्टेशन के उत्तरी और दक्षिणी दोनों सिरों पर विकास होगा; कुल 6 प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं।
दक्षिणी छोर काशी विश्वनाथ मंदिर से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर है।
वाराणसी-दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन रात्रिकालीन यात्रा के लिए डिज़ाइन की गई है; मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए नई सुविधा।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 31 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में वाराणसी-दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का निरीक्षण किया और घोषणा की कि काशी रेलवे स्टेशन को एक विश्वस्तरीय मेगा ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें एक साथ 50,000 यात्री प्रतीक्षा कर सकेंगे। पहली वंदे भारत स्लीपर सेवा शुरू होने से ठीक पहले की गई यह घोषणा काशी के रेलवे अवसंरचना में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

स्टेशन के विकास की रूपरेखा

रेल मंत्री वैष्णव ने बताया कि काशी स्टेशन का उत्तरी और दक्षिणी — दोनों सिरों को शहर के दोनों तरफ से विकसित किया जा रहा है। इन दोनों हिस्सों को जोड़ने के लिए रेलवे ट्रैक और प्लेटफॉर्म के ऊपर एक फुटबॉल मैदान के बराबर विशाल कॉनकोर्स का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने मौके पर खड़े पिलर्स की ओर इशारा करते हुए बताया कि इन्हीं पर पूरा कॉनकोर्स टिकेगा।

स्टेशन पर कुल छह प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं। विशाल कॉनकोर्स में एक समय में लगभग 50,000 यात्रियों के ठहरने और ट्रेन की प्रतीक्षा करने की सुव्यवस्था होगी। वैष्णव ने कहा कि यह सुविधा देश और विदेश से काशी आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

काशी विश्वनाथ मंदिर से निकटता का महत्व

स्टेशन का दक्षिणी छोर काशी विश्वनाथ मंदिर से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह भौगोलिक स्थिति इसे धार्मिक पर्यटन के लिहाज से अत्यंत रणनीतिक बनाती है। गौरतलब है कि वाराणसी प्रतिवर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, और बेहतर रेलवे अवसंरचना इस यात्री-दबाव को संभालने के लिए दीर्घकाल से अपेक्षित थी।

रेल मंत्री ने यह भी बताया कि काशी शहर में कई रेलवे स्टेशन हैं, जिनका विकास चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। काशी स्टेशन इसी व्यापक नगरीय रेल पुनर्निर्माण योजना का हिस्सा है।

वंदे भारत स्लीपर: रात की यात्रा का नया अनुभव

वाराणसी-दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को विशेष रूप से रात्रिकालीन यात्रा को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। वैष्णव ने बताया कि यात्री बनारस से रात में सवार होकर सुबह-सवेरे दिल्ली पहुँच सकेंगे और इसी प्रकार दिल्ली से रात को चलकर सुबह काशी। उन्होंने इसे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए परिवहन की एक सुलभ और आरामदायक सुविधा बताया।

यह ट्रेन वंदे भारत श्रृंखला का स्लीपर संस्करण है, जो भारतीय रेल के लिए एक नई श्रेणी है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेलवे पारंपरिक राजधानी और शताब्दी सेवाओं को अत्याधुनिक तकनीक से प्रतिस्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है।

आम यात्रियों पर असर

काशी स्टेशन के मेगा हब बनने से वाराणसी आने-जाने वाले यात्रियों को एक ही स्थान पर बेहतर, व्यवस्थित और भीड़-रहित सुविधाएं मिलेंगी। 50,000 यात्रियों की एकसाथ प्रतीक्षा-क्षमता वाले कॉनकोर्स से त्योहारों और पर्व के मौसम में भारी यात्री भार को संभालना आसान होगा।

वैष्णव ने भरोसा जताया कि स्टेशन के पूरी तरह तैयार होने के बाद यह वाराणसी के समग्र परिवहन ढाँचे की रीढ़ बन जाएगा। विशाल कॉनकोर्स, छह प्लेटफॉर्म, और व्यापक वेटिंग एरिया इसकी प्रमुख विशेषताएँ होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह शहर धार्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र होने के बावजूद दशकों पुराने रेलवे बुनियादी ढाँचे पर निर्भर रहा है। 50,000 यात्री क्षमता का दावा प्रभावशाली है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि पूर्णता की समय-सीमा और लागत-अनुमान कितने यथार्थवादी हैं — क्योंकि भारत के कई 'अमृत स्टेशन' पुनर्विकास परियोजनाएँ समय-सीमा से पीछे चल रही हैं। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मध्यमवर्गीय यात्रियों के लिए एक स्वागतयोग्य कदम है, पर स्टेशन का असली मूल्य तब सिद्ध होगा जब कॉनकोर्स, पार्किंग, अंतिम मील कनेक्टिविटी और दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएँ ज़मीन पर दिखें।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काशी स्टेशन ट्रांसपोर्ट हब में क्या-क्या सुविधाएँ होंगी?
काशी स्टेशन पर फुटबॉल मैदान के बराबर विशाल कॉनकोर्स बनाया जाएगा, जिसमें एक साथ 50,000 यात्री प्रतीक्षा कर सकेंगे। इसके अलावा 6 प्लेटफॉर्म, उत्तरी और दक्षिणी दोनों प्रवेश द्वार, तथा विश्वस्तरीय सुविधाएँ विकसित की जाएंगी।
वाराणसी-दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन कैसे काम करेगी?
यह ट्रेन रात्रिकालीन यात्रा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई है। यात्री बनारस से रात को सवार होकर सुबह दिल्ली पहुँच सकेंगे और दिल्ली से रात को चलकर सुबह काशी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सुलभ परिवहन विकल्प बताया है।
काशी स्टेशन का दक्षिणी छोर काशी विश्वनाथ मंदिर से कितनी दूर है?
काशी स्टेशन का दक्षिणी छोर काशी विश्वनाथ मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर है। इससे मंदिर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सीधी सुविधा मिलेगी।
काशी स्टेशन के कॉनकोर्स की विशेषता क्या होगी?
कॉनकोर्स रेलवे ट्रैक और प्लेटफॉर्म के ऊपर बनाया जाएगा और यह फुटबॉल मैदान के बराबर विशाल होगा। यह स्टेशन के उत्तरी और दक्षिणी दोनों सिरों को जोड़ेगा और एक साथ 50,000 यात्रियों की प्रतीक्षा-व्यवस्था इसमें होगी।
काशी स्टेशन के विकास की घोषणा कब और किसने की?
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 31 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के निरीक्षण के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने स्टेशन के निर्माणाधीन पिलर्स का जायजा लिया और विकास योजना का विवरण साझा किया।
राष्ट्र प्रेस
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