काशी-दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लॉन्च: PM मोदी बोले — 'आस्था और आधुनिकता का संगम'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2026 को काशी-दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के शुभारंभ से पूर्व देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह ट्रेन वाराणसी से नई दिल्ली तक लाखों श्रद्धालुओं, पर्यटकों, युवाओं और व्यापारियों की यात्रा को सहज बनाएगी। यह उत्तर प्रदेश की पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन है और देश में अपनी श्रेणी की दूसरी सेवा है।
PM मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, 'दिल्ली और काशी के बीच रेल यात्रा करने वालों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। काशी-दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू होने से समय की बचत के साथ ही उनका अनुभव बेहतर होने वाला है। आधुनिक सुविधाओं और अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली से सुसज्जित यह देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन है।' उन्होंने आगे कहा कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन हों या संगम की यात्रा — यह ट्रेन आस्था को अवसर से और परंपरा को आधुनिकता से जोड़ेगी।
शुभारंभ समारोह और रूट विवरण
बनारस रेलवे स्टेशन पर शनिवार को दोपहर लगभग 3:30 बजे उत्तर प्रदेश की पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन और नई मेमू ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संयुक्त रूप से ट्रेन को रवाना किया। रेल मंत्रालय के अनुसार, यह ट्रेन वाराणसी से चलकर प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद होते हुए नई दिल्ली पहुँचेगी।
ट्रेन वाराणसी से रात 8 बजकर 50 मिनट पर रवाना होगी और अगले दिन सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर नई दिल्ली पहुँचेगी। वापसी में नई दिल्ली से रात 9 बजकर 40 मिनट पर रवाना होकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर वाराणसी पहुँचेगी। यह सेवा सप्ताह में छह दिन उपलब्ध रहेगी — वाराणसी से शुक्रवार को और नई दिल्ली से शनिवार को ट्रेन नहीं चलेगी।
यात्रा समय में कितनी बचत
रेल मंत्रालय के बयान के अनुसार, मौजूदा शिव गंगा एक्सप्रेस की तुलना में वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस वाराणसी से नई दिल्ली की यात्रा में 55 मिनट और नई दिल्ली से वाराणसी की यात्रा में 35 मिनट की बचत करेगी। इस प्रकार दोनों दिशाओं के यात्रियों को रात के सफर के लिए एक तेज़ और आधुनिक विकल्प मिलेगा।
वाराणसी की कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
रेल मंत्रालय ने कहा कि वाराणसी भारत के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है, जहाँ पूरे साल श्रद्धालु, देशी-विदेशी पर्यटक, विद्यार्थी और व्यावसायिक यात्री आते हैं। नई रात्रि रेल कनेक्टिविटी से धार्मिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक, प्रशासनिक और पर्यटन संबंधी यात्राएँ अधिक सुलभ होंगी। गौरतलब है कि यह सेवा महाकुंभ 2025 के बाद प्रयागराज और वाराणसी के बढ़ते पर्यटन महत्व के संदर्भ में और अधिक प्रासंगिक है।
आगे क्या
नई मेमू ट्रेनों के एक साथ शुभारंभ से उत्तर प्रदेश के उपनगरीय और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को भी बेहतर रेल संपर्क मिलने की उम्मीद है। रेल मंत्रालय के अनुसार, आधुनिक रेल यात्रा की सुविधाओं को अधिकतम यात्रियों तक पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता है और इस दिशा में आने वाले महीनों में और कदम उठाए जाने की संभावना है।