जर्मनी में 'जेन जेड रेगेल्ट' का उभार: 34 शहरों में 1,60,000 युवा सड़कों पर, शिक्षा और महंगाई पर गुस्सा
सारांश
मुख्य बातें
जर्मनी में 31 अक्टूबर 2026 को 'जेन जेड रेगेल्ट' (Gen Z Regelt — जेन जेड ने कमान संभाली) अभियान के बैनर तले 1,60,000 से अधिक युवाओं के सड़कों पर उतरने की उम्मीद है। बर्लिन, फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख सहित 34 शहरों में एक साथ होने वाले इन प्रदर्शनों में युवा पीढ़ी बेहतर शिक्षा व्यवस्था, अनिवार्य सैन्य सेवा के विरोध और बढ़ती जीवन लागत से राहत की माँग लेकर निकल रही है। स्थानीय मीडिया आउटलेट द लोकल डीई के अनुसार, यह यूरोप में इस वर्ष उभरे जेन जेड नेतृत्व वाले आंदोलनों की सबसे बड़ी जर्मन कड़ी है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और माँगें
'जेन जेड रेगेल्ट' समूह ने स्पष्ट किया है कि उनकी तीन मुख्य माँगें हैं — शिक्षा क्षेत्र में सरकारी निवेश में बढ़ोतरी, अनिवार्य सैन्य सेवा का विरोध, और युवाओं पर बढ़ते आर्थिक दबाव में कमी। म्यूनिख की एक रैली में 18 वर्षीय स्टीव ने चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को सीधे संबोधित करते हुए कहा, "सरकार ने हमारी चिंताओं का कोई जवाब नहीं दिया है, बल्कि वे लगातार बजट में कटौती कर रहे हैं और हम पर बोझ बढ़ाते जा रहे हैं।" यह बयान उस व्यापक निराशा की अभिव्यक्ति है जो यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में युवा महसूस कर रहे हैं।
यूरोपीय संदर्भ: सर्बिया से फ्रांस तक की लहर
ये प्रदर्शन एक व्यापक यूरोपीय परिघटना का हिस्सा हैं। सर्बिया में छात्र नेतृत्व वाले आंदोलन ने चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से वहाँ के दीर्घकालीन सत्तारूढ़ नेता को सत्ता से बाहर करने में भूमिका निभाई। दूसरी ओर, फ्रांस में इसी तरह के विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुके हैं — दंगे, लूटपाट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की घटनाएँ सामने आई हैं। हेस्से राज्य के आंतरिक मंत्री रोमन पोसेक ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "हम सभी के दिमाग में फ्रांस की वे तस्वीरें हैं — लूटपाट, घरों को जलाना, पुलिस की गाड़ियों को आग लगाना और पुलिस अधिकारियों पर हमले।" उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्रांस को इस मामले में आदर्श नहीं माना जाना चाहिए।
सरकारी सतर्कता और चरमपंथी खतरे की चेतावनी
जर्मन अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहने की उम्मीद है, क्योंकि यह हैलोवीन के दिन हो रहे हैं। हालाँकि, संघीय आंतरिक मंत्रालय ने सतर्क किया है कि कुछ अति वामपंथी चरमपंथी गुटों और विदेशी चरमपंथी आंदोलनों से जुड़े समूहों ने इस आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशें की हैं। बर्लिन के प्रमुख शॉपिंग बुलेवार्ड 'कुरफुर्स्टेनडैम' पर कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों ने संभावित अशांति की आशंका में अपनी दुकानों की खिड़कियाँ लकड़ी के तख्तों से ढक दी हैं और जल्दी बंद करने की योजना बनाई है।
छात्र संगठनों में मतभेद
उल्लेखनीय है कि जर्मनी के स्कूली छात्रों के प्रमुख संगठन बीएसके ने खुद को 'जेन जेड रेगेल्ट' की पहल से अलग कर लिया है, हालाँकि वह छात्रों की माँगों से सहमत है। बीएसके की महासचिव एमी किर्चहॉफ ने कहा, "हम खुद को 'जेन जेड रेगेल्ट' से अलग कर रहे हैं, लेकिन उन छात्रों से नहीं, जिनकी चिंताएँ बिल्कुल जायज हैं।" संगठन ने 20 नवंबर को एक अलग विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाई है। यह विभाजन दर्शाता है कि युवा आंदोलन एकजुट होते हुए भी आंतरिक रूप से विविध है।
विश्वविद्यालयों की दयनीय स्थिति: ज़मीनी आवाज़
बर्लिन टेक्निकल यूनिवर्सिटी के छात्र शॉन बेकर ने कहा कि वह परिसर की खस्ता इमारतों की दशा की ओर ध्यान दिलाने के लिए प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, "जब आप अंदर जाकर कमरों में जाते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे कोई वीरान इमारत हो। फिर भी, हमसे उम्मीद की जाती है कि हम यहीं नियमित रूप से पढ़ाई करें।" यह कथन यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक शिक्षा निवेश की बड़ी विडंबना को रेखांकित करता है। आने वाले हफ्तों में इन प्रदर्शनों का असर जर्मन संसद में शिक्षा और रक्षा बजट पर बहस को नई दिशा दे सकता है।