जेन-Z देशविरोधी नहीं, शिकायतें वास्तविक: छात्र आंदोलनों पर RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 6 अगस्त 2026 को मुंबई में एक छात्र संवाद कार्यक्रम में कहा कि विरोध-प्रदर्शन करने वाली जेन-Z पीढ़ी को 'देशविरोधी' नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं की शिकायतें वास्तविक हैं और उनके मुद्दों का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।
जेन-Z पर भागवत का स्पष्ट रुख
भागवत ने कहा, 'अगर जेन-Z प्रदर्शन कर रही है तो इसका मतलब यह नहीं कि वे एंटी-नेशनल हैं। वे हमारे अपने लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि उनके अनुसार जेन-Z और जेन-अल्फा मौजूदा पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार हैं और उनके साथ देशभक्ति तथा सेवा की ईमानदार अपील प्रभावी होती है।
उन्होंने आज की युवा पीढ़ी की तार्किकता को रेखांकित करते हुए कहा, 'जब हम उनकी उम्र के थे, तब बड़ों की हर बात बिना सवाल किए मान लेते थे। लेकिन आज की जेन-Z और जेन-अल्फा सवाल पूछती है, तार्किक जवाब चाहती है और अपनापन भी चाहती है — लोकतंत्र में यही सही तरीका है।' उन्होंने इसे अंग्रेजी में 'डिबेट' और भारतीय परंपरा में 'शास्त्रार्थ' की संज्ञा दी।
आंदोलन और लोकतंत्र
भागवत ने लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन की भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि यह सहमति बनाने का एक माध्यम है। उनके अनुसार यदि किसी कारण से लोगों की बात नहीं सुनी जाती, तब आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है — लेकिन उसका उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान सभा में दिए गए भाषणों और संविधान की भावना को समझने की सलाह देते हुए कहा कि युवा किसी व्यक्ति के विरोध में नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार की माँग को लेकर आवाज उठा रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर चिंता
भागवत ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में अभी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों के लगभग 10 लाख रिक्त पदों का उल्लेख किया और शिक्षा पर सकल बजट का 6 प्रतिशत खर्च किए जाने की लंबे समय से चली आ रही माँग का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'शिक्षा हमारे बच्चों और अगली पीढ़ी के निर्माण के लिए है, पैसा कमाने का माध्यम नहीं।'
उन्होंने सबसे पहले शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए।
पैलेट गन, सोशल मीडिया और विदेश नीति
छात्रों पर कथित पैलेट गन फायरिंग के सवाल पर भागवत ने कहा कि इस घटना की पूरी जानकारी उनके पास नहीं है और उन्होंने भी इस संबंध में मीडिया में खबर पढ़ी है। उन्होंने कहा कि बिना पूरी जानकारी के टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, हालाँकि यदि आँख मूँदकर किसी पर विश्वास करने की बात होगी तो वह जेन-Z पर विश्वास करेंगे।
सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा कि केवल नियम और अनुशासन बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों का दृष्टिकोण भी बदलना होगा। आधुनिक तकनीक के जरिए फर्जी वीडियो बनाए जाने की चुनौती का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रामाणिक और विश्वसनीय स्रोतों की आवश्यकता पर बल दिया।
पाकिस्तान और चीन के साथ नागरिक समाज के संपर्क पर भागवत ने कहा कि संघर्ष या युद्ध की स्थिति में ऐसे संवाद उचित नहीं हैं, परंतु इन देशों के साथ हमेशा के लिए संवाद बंद नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी किसी देश पर कब्जा नहीं किया।
LGBT और महिलाओं पर RSS प्रमुख का दृष्टिकोण
LGBT समुदाय के बारे में भागवत ने कहा कि वे भी समाज का हिस्सा हैं। समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में विवाह संस्था के साथ छेड़छाड़ से समाज के सामने कठिनाइयाँ आ सकती हैं, लेकिन ऐसा तरीका विकसित किया जाना चाहिए जिससे दो लोग सम्मानपूर्वक साथ रह सकें।
महिलाओं की भूमिका पर उन्होंने कहा कि महिलाएँ हर क्षेत्र में सक्षम हैं और उन्हें सभी प्रकार के कार्यों के लिए प्रशिक्षण तथा अवसर मिलने चाहिए। RSS में महिलाओं की भागीदारी के सवाल पर उन्होंने स्वीकार किया कि समय बदल चुका है और ऐसे प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठते हैं।
भागवत का यह संवाद ऐसे समय में आया है जब देश में छात्र आंदोलनों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है और युवाओं की पहचान तथा उनकी माँगों को लेकर व्यापक विमर्श जारी है।