7 अगस्त 2026
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का जेन-जी से संवाद 'अत्यंत प्रासंगिक' — एनडीए नेताओं ने सराहा

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का जेन-जी से संवाद 'अत्यंत प्रासंगिक' — एनडीए नेताओं ने सराहा

सारांश

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में जेन-जी छात्रों से संवाद कर स्पष्ट किया कि युवाओं के प्रदर्शन का अधिकार लोकतांत्रिक है और उन्हें 'देश विरोधी' नहीं कहा जाना चाहिए। एनडीए नेताओं ने इसे सराहा, जबकि विपक्ष ने पूछा — क्या सरकारें भी इन सिद्धांतों पर चलती हैं?

मुख्य बातें

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में जेन-जी और जेन-अल्फा छात्रों के साथ संवाद किया।
भागवत ने कहा कि युवाओं को 'देश विरोधी' नहीं माना जाना चाहिए और उनकी चिंताएँ जायज हैं।
बिहार मंत्री रामकृपाल यादव और तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन.
रामचंदर राव ने संवाद को 'फलदायी' और 'उपयोगी' बताया।
भागवत ने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार माना, लेकिन दुरुपयोग के प्रति आगाह किया।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने पलटवार करते हुए सरकार से इन सिद्धांतों को व्यवहार में लाने की माँग की।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी के छात्रों के साथ की गई बातचीत को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने 7 अगस्त को 'अत्यंत महत्वपूर्ण और समयोचित' करार दिया। नेताओं ने कहा कि भागवत ने युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुना और लोकतंत्र में संवाद की अनिवार्यता पर बल दिया।

मुख्य घटनाक्रम

मुंबई में गुरुवार को आयोजित इस संवाद में भागवत ने स्पष्ट किया कि जेन-जी आंदोलनों से जुड़े युवाओं को 'देश विरोधी' नहीं कहा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज का अभिन्न हिस्सा माना जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं की चिंताएँ जायज हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद व विमर्श के लिए पर्याप्त स्थान होना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने यह भी रेखांकित किया कि आज का युवा अंधे अनुसरण की बजाय तर्कसंगत उत्तर और सार्थक संवाद की अपेक्षा रखता है।

एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया

बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने भागवत की इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा, 'मोहन भागवत ने बड़े पैमाने पर युवाओं से बातचीत की और उनके विचारों व चिंताओं को समझने का प्रयास किया। मुझे लगता है कि उनकी टिप्पणियाँ बिल्कुल सही थीं और हम सभी के लिए एक अच्छा उदाहरण हैं।'

तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने भी इस संवाद को समाज के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा, 'मोहन भागवत का युवाओं और छात्रों के साथ संवाद बहुत फलदायी रहा। उनका पूरे देश के लिए संदेश बहुत दिलचस्प और उपयोगी था। मुझे यकीन है कि मौजूदा समय में मोहन भागवत का संदेश बहुत महत्वपूर्ण है।' रामचंदर राव के अनुसार भागवत ने छात्र आंदोलनों सहित कई मुद्दों पर खुलकर बात की और माना कि प्रदर्शन करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है — हालाँकि उन्होंने आगाह किया कि इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

विपक्ष का पलटवार

विपक्षी दलों ने भागवत के बयान का स्वागत करते हुए सरकार पर निशाना साधा। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, 'उन्हें अपनी ही सरकार को यह सलाह मानने के लिए कहना चाहिए। लोकतंत्र में प्रदर्शन जरूरी हैं।' उन्होंने पुराने छात्र प्रदर्शनों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जायज माँगें उठाने वाले युवाओं पर लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

आम जनता और युवाओं पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्र समुदाय रोजगार, शिक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर मुखर हो रहा है। गौरतलब है कि आरएसएस जैसी संस्था के प्रमुख का युवाओं के प्रदर्शन के अधिकार को 'लोकतांत्रिक' मानना, वैचारिक दृष्टि से एक उल्लेखनीय संकेत माना जा रहा है।

क्या होगा आगे

भागवत के इस संवाद के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एनडीए सरकारें — केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर — युवाओं की शिकायतों के प्रति अपनी नीतियों में कोई व्यावहारिक बदलाव लाती हैं या नहीं। आलोचकों का कहना है कि संवाद की सराहना और जमीनी नीतिगत बदलाव के बीच का अंतर ही इस पहल की असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

आरएसएस के पारंपरिक स्वर से एक सूक्ष्म लेकिन उल्लेखनीय बदलाव है — और इसे केवल सराहना से आगे जाकर परखा जाना चाहिए। असली सवाल यह है कि क्या यह संवाद नीतिगत लचीलेपन में तब्दील होगा, या सद्भावना की प्रतीकात्मक कवायद बनकर रह जाएगा। विपक्ष का यह तर्क — कि भागवत को अपनी ही सरकारों को यह सलाह देनी चाहिए — उस विरोधाभास को उजागर करता है जो बयानबाजी और जमीनी हकीकत के बीच अक्सर दिखता है। जब तक छात्र प्रदर्शनों पर प्रशासनिक प्रतिक्रिया नहीं बदलती, यह संवाद महज एक सकारात्मक शुरुआत भर रहेगी।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने जेन-जी छात्रों से क्या कहा?
भागवत ने कहा कि जेन-जी आंदोलनों से जुड़े युवाओं को 'देश विरोधी' नहीं माना जाना चाहिए और उनकी चिंताएँ जायज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज का युवा तर्कसंगत उत्तर और सार्थक संवाद चाहता है, न कि अंधे अनुसरण की अपेक्षा।
एनडीए नेताओं ने भागवत के संवाद पर क्या प्रतिक्रिया दी?
बिहार मंत्री रामकृपाल यादव और तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने इस संवाद को 'फलदायी', 'उपयोगी' और 'समयोचित' बताया। दोनों नेताओं ने कहा कि भागवत का संदेश पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है।
विपक्ष ने भागवत के बयान पर क्या सवाल उठाए?
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि भागवत को अपनी ही सरकार को यह सलाह मानने के लिए कहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने छात्र प्रदर्शनों में जायज माँगें उठाने वाले युवाओं पर लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
भागवत ने छात्र प्रदर्शनों पर क्या रुख अपनाया?
भागवत ने माना कि प्रदर्शन करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है और यह चिंताओं को जताने का अहम तरीका हो सकता है। हालाँकि उन्होंने आगाह किया कि इस अधिकार का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और संवाद रचनात्मक रहना चाहिए।
यह संवाद कब और कहाँ हुआ?
यह संवाद मुंबई में गुरुवार को आयोजित हुआ, जिसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी के छात्रों से सीधी बातचीत की। एनडीए नेताओं ने 7 अगस्त, शुक्रवार को इस पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं।
राष्ट्र प्रेस
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