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मोहन भागवत का जेन-जी युवाओं से संवाद 'अत्यंत प्रासंगिक': एनडीए नेताओं की सराहना

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मोहन भागवत का जेन-जी युवाओं से संवाद 'अत्यंत प्रासंगिक': एनडीए नेताओं की सराहना

सारांश

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में जेन-जी और जेन-अल्फा छात्रों से सीधा संवाद किया — युवाओं को 'देश विरोधी' न कहने और उनकी चिंताओं को जायज मानने की अपील की। एनडीए नेताओं ने इसे ऐतिहासिक पहल बताया, जबकि विपक्ष ने पूछा कि क्या सरकारें भी इन सिद्धांतों पर चलती हैं।

मुख्य बातें

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में गुरुवार को जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी के छात्रों से सीधा संवाद किया।
भागवत ने कहा कि युवाओं को 'देश विरोधी' नहीं कहा जाना चाहिए और उनकी चिंताएँ जायज हैं।
बिहार मंत्री रामकृपाल यादव और तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन.
रामचंदर राव ने संवाद को समाज के लिए फलदायी बताया।
समाजवादी पार्टी सांसद अवधेश प्रसाद ने सवाल उठाया कि क्या सरकारें भी भागवत की सलाह पर अमल करती हैं।
भागवत ने माना कि प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसके दुरुपयोग से बचने की अपील भी की।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी के छात्रों के साथ की गई बातचीत को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने 7 अगस्त को अत्यंत महत्वपूर्ण और समसामयिक बताया है। नेताओं का कहना है कि भागवत ने युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुना और लोकतांत्रिक व्यवस्था में खुले संवाद की अनिवार्यता को रेखांकित किया।

एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया

बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने भागवत के इस संवाद की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 'मोहन भागवत ने बड़े पैमाने पर युवाओं से बातचीत की और उनके विचारों व चिंताओं को समझने का प्रयास किया। मुझे लगता है कि उनकी टिप्पणियाँ बिल्कुल सही थीं और हम सभी के लिए एक अच्छा उदाहरण हैं।'

तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने भी इस संवाद को समाज के लिए उपयोगी बताया। उनके अनुसार, 'मोहन भागवत का युवाओं और छात्रों के साथ संवाद बहुत फलदायी रहा। उनका पूरे देश के लिए संदेश बहुत दिलचस्प और उपयोगी था। मुझे यकीन है कि मौजूदा समय में मोहन भागवत का संदेश बहुत महत्वपूर्ण है।'

भागवत ने क्या कहा

मुंबई में गुरुवार को आयोजित इस संवाद में मोहन भागवत ने कहा कि जेन-जी आंदोलनों से जुड़े युवाओं को समाज का अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए और उन्हें 'देश विरोधी' करार नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं की चिंताएँ जायज हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद तथा चर्चा के लिए पर्याप्त स्थान होना चाहिए।

भागवत ने यह भी रेखांकित किया कि आज का युवा अंधे अनुसरण की बजाय तर्कसंगत उत्तर और सार्थक संवाद चाहता है। एन. रामचंदर राव के मुताबिक, भागवत ने छात्र आंदोलनों सहित कई मुद्दों पर बात करते हुए माना कि प्रदर्शन करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है — हालाँकि उन्होंने आगाह किया कि इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

विपक्ष की आपत्ति

वहीं, विपक्षी दलों ने भागवत के बयान पर सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, 'उन्हें अपनी ही सरकार को यह सलाह मानने के लिए कहना चाहिए। लोकतंत्र में प्रदर्शन जरूरी हैं।' उन्होंने पुराने छात्र प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि जायज माँगें उठाने वाले युवाओं पर लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

आलोचकों का कहना है कि भागवत के उदार स्वर और ज़मीनी हकीकत के बीच एक खाई है, जिसे पाटने के लिए केवल संवाद नहीं बल्कि ठोस नीतिगत बदलाव की ज़रूरत है।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में युवा बेरोज़गारी, शिक्षा की गुणवत्ता और भविष्य की अनिश्चितता को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि आरएसएस प्रमुख का इस तरह सीधे युवा पीढ़ी से संवाद करना अपने आप में एक उल्लेखनीय पहल है, जो संगठन की बदलती संचार रणनीति को दर्शाती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संवाद नीतिगत स्तर पर भी कोई ठोस परिणाम लाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह संवाद केवल भावनात्मक प्रबंधन तक सीमित है। अवधेश प्रसाद का सवाल — 'अपनी ही सरकार को यह सलाह दें' — उस विरोधाभास को उजागर करता है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। बिना नीतिगत जवाबदेही के, यह संवाद एक प्रतीकात्मक इशारे से अधिक नहीं बन पाएगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने जेन-जी युवाओं से संवाद में क्या कहा?
मोहन भागवत ने मुंबई में कहा कि जेन-जी आंदोलनों से जुड़े युवाओं को 'देश विरोधी' नहीं कहा जाना चाहिए और उनकी चिंताएँ जायज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज का युवा तर्कसंगत जवाब और सार्थक संवाद चाहता है, न कि अंधा अनुसरण।
एनडीए नेताओं ने भागवत के संवाद पर क्या प्रतिक्रिया दी?
बिहार मंत्री रामकृपाल यादव और तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने इस संवाद को समाज के लिए फलदायी और देश के लिए उपयोगी बताया। दोनों नेताओं ने कहा कि भागवत की टिप्पणियाँ सभी के लिए एक अच्छा उदाहरण हैं।
विपक्ष ने भागवत के बयान पर आपत्ति क्यों जताई?
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने सवाल उठाया कि भागवत को अपनी ही सरकार को यह सलाह मानने के लिए कहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने छात्र प्रदर्शनों में जायज माँगें उठाने वाले युवाओं पर लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल हुआ।
भागवत ने छात्र आंदोलनों पर क्या रुख अपनाया?
भागवत ने माना कि प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है और यह चिंताएँ जताने का एक अहम तरीका हो सकता है। हालाँकि उन्होंने आगाह किया कि इस अधिकार का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और संवाद रचनात्मक दिशा में होना चाहिए।
आरएसएस प्रमुख का जेन-जी से यह संवाद क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
यह संवाद इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि आरएसएस प्रमुख ने सीधे नई पीढ़ी के छात्रों से बात करते हुए उनकी चिंताओं को वैधता दी और उन्हें मुख्यधारा समाज का हिस्सा बताया। यह संगठन की बदलती संचार रणनीति और युवाओं तक पहुँचने के प्रयास को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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